Paane – पाने कला: राजस्थान की पारंपरिक देवचित्र कला

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Paane – पाने कला राजस्थान की पारंपरिक लोककला है जिसमें कागज़ पर देवताओं के चित्र बनाकर पूजा की जाती है। यह शुभता और समृद्धि का प्रतीक है। 1. Introduction – परिचय पाने राजस्थान की एक धार्मिक लोककला है। यह त्यौहारों और मांगलिक अवसरों पर बनाई जाती है। पाने का अर्थ…

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Saanjhi – साँझी कला: श्रीकृष्ण की आराधना से जनजीवन तक की पारंपरिक लोककला

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Saanjhi – साँझी कला भगवान श्रीकृष्ण द्वारा आरंभ की गई भारतीय लोककला है, जो राजस्थान और वृंदावन की धार्मिक परंपराओं में आज भी जीवित है। 1. Introduction – परिचय Saanjhi Art भारत की एक प्राचीन लोककला है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी है। यह कला पितृपक्ष…

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Batik Painting – बातिक चित्रकला : मोम और रंगों से सजी पारंपरिक कपड़ा कलाl

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Batik Painting राजस्थान की पारंपरिक कला है, जिसमें मोम और रंगों से सूती या रेशमी कपड़ों पर अनोखे चित्र बनाए जाते हैं। 1. Introduction – परिचय Batik Painting (बातिक चित्रकला) वस्तुतः एक शिल्प कला है, जो कपड़े पर मोम और रंगों की सहायता से की जाती है। इस कला में…

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Phad Painting of Rajasthan – राजस्थान की पारंपरिक फड़ चित्रकला : लोककला, परंपरा और भक्ति का संगम

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Phad Painting of Rajasthan – भीलवाड़ा और शाहपुरा की अनोखी फड़ चित्रकला लोककला, धर्म, संगीत और भक्ति का जीवंत संगम है। 1. Introduction – परिचय Phad Painting of Rajasthan (फड़ चित्रकला) राजस्थान की प्राचीन पटचित्र परंपरा है। यह भीलवाड़ा और शाहपुरा में विशेष रूप से विकसित हुई। यह एक चलती…

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Sunari Jhunjhunu – सुनारी, झुंझुनूं : भारत की प्राचीनतम लौह भट्टियाँ और वैदिक आर्य बस्ती

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Sunari Jhunjhunu भारत की प्राचीनतम लौह भट्टियों वाला स्थल है, जहाँ मौर्यकालीन लोहे के औज़ार, मातृदेवी की मूर्तियाँ और वैदिक आर्य बस्ती के प्रमाण मिले हैं। 1. Introduction – परिचय सुनारी (Sunari) राजस्थान के झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील में कांटली नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल…

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Junakheda, Pali – जूनाखेड़ा, पाली : राजस्थान का बहुस्तरीय सांस्कृतिक स्थल

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Junakheda, Pali राजस्थान का प्राचीन बहुस्तरीय स्थल है, जहाँ चार सांस्कृतिक स्तर मिले—1800 ई.पू. से 9वीं शताब्दी तक के मृद्भाण्ड, दीपक और शालभंजिका अंकित अवशेष प्राप्त हुए। 1. Introduction – परिचय जूनाखेड़ा, राजस्थान के पाली जिले के नाडोल क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यह स्थल राजस्थान की…

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Bhinmal, Jalore – भीनमाल, जालौर : राजस्थान का प्राचीन सांस्कृतिक नगर

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Bhinmal, Jalore राजस्थान का प्राचीन नगर है जहाँ 1953–54 में खुदाई में शक क्षत्रपों के सिक्के और यूनानी सुराही मिली, जिससे इसका द्वितीय शताब्दी ई.पू. का सांस्कृतिक इतिहास स्पष्ट होता है। 1. Introduction – परिचय भीनमाल, राजस्थान के जालौर जिले में स्थित एक प्राचीन नगर है। ऐतिहासिक रूप से यह…

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Noh Excavation (नोह उत्खनन) – भरतपुर का लौह युगीन सभ्यता स्थल

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Noh Excavation नोह उत्खनन भरतपुर का प्रसिद्ध लौह युगीन स्थल है, जहाँ 1100 ई.पू. से 900 ई.पू. के अवशेष मिले। यहाँ लोहे के प्रयोग और ब्राह्मी लेख के प्रमाण मिले हैं। 1. Introduction (परिचय) नोह, राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित एक प्राचीन स्थल है। यहाँ की खुदाई 1963-64 ई.…

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Nagar Tonk – नगर, टोंक : मालव सभ्यता का प्राचीन केंद्र और कलात्मक धरोहर

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Nagar Tonk नगर टोंक राजस्थान का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है जहाँ शुंग युगीन मूर्तियाँ, मृद्भाण्ड, सिक्के और प्रतिमाएँ मिलीं। इसे प्राचीन मालव सभ्यता का केंद्र माना जाता है 1. Introduction (परिचय) नगर, टोंक जिले का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। इसे “कार्कोट नगर” नाम से भी जाना जाता है।…

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Raidh Tonk – रैढ़, टोंक : प्राचीन राजस्थान का टाटानगर और औद्योगिक धरोहर

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Raidh Tonk रैढ़ टोंक राजस्थान का एक प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल है, जहाँ धातु उद्योग, मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ और सिक्के मिले हैं। इसे प्राचीन राजस्थान का ‘टाटानगर’ कहा जाता है। 1. Introduction (परिचय) रैढ़, राजस्थान के टोंक जिले में ढील नदी के किनारे स्थित एक प्राचीन औद्योगिक नगर था। इसे “प्राचीन राजस्थान…

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Iswal Udaipur – ईसवाल, उदयपुर : राजस्थान की प्राचीन औद्योगिक बस्ती का ऐतिहासिक महत्व

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Iswal Udaipur ईसवाल उदयपुर राजस्थान की एक प्राचीन औद्योगिक बस्ती है, जहाँ दो हजार वर्षों तक लौहा गलाने के प्रमाण मिले हैं। जानिए इसका इतिहास, उत्खनन और सांस्कृतिक महत्व। 1. Introduction (परिचय) ईसवाल, उदयपुर जिले में स्थित एक प्राचीन औद्योगिक स्थल है। यहाँ लगातार दो हजार वर्षों तक लौहा गलाने…

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बैराठ (विराटनगर) जयपुर – प्राचीन इतिहास और पुरातात्विक महत्व | Bairat (Viratnagar) Jaipur Ancient History and Archaeology

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Bairat (Viratnagar) बैराठ जयपुर राजस्थान का एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख, बौद्ध अवशेष और महाभारत कालीन विराटनगर के प्रमाण मिले हैं। 1. Introduction / परिचय बैराठ (वर्तमान विराटनगर, जयपुर जिला) राजस्थान का अत्यंत प्राचीन स्थल है। यह स्थान प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी रहा…

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लौहयुगीन संस्कृति | Iron Age Culture in India

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Iron Age Culture in India लौहयुगीन संस्कृति भारत के प्राचीन इतिहास में वह काल है जब मानव ने लोहे का उपयोग प्रारम्भ किया। इस काल में कृषि, शिल्प, और युद्ध उपकरणों का तीव्र विकास हुआ। 1. Introduction / परिचय लौहयुग भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण था, जहाँ मानव ने…

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 ताम्रयुगीन स्थल (Other Chalcolithic Sites of Rajasthan) – राजस्थान की ताम्र संस्कृति का गौरवशाली इतिहास

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ताम्रयुगीन स्थल राजस्थान के प्राचीन सभ्यता केंद्र हैं, जहाँ से ताम्र उपकरण, मृद्भांड और आभूषण मिले हैं। ये स्थल प्राचीन भारत और पश्चिम एशिया के सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण हैं। 1. परिचय (Introduction – ताम्रयुगीन राजस्थान का परिचय) राजस्थान के ताम्रयुगीन स्थल भारत की प्राचीन सभ्यता और धातु संस्कृति के…

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लाछूरा भीलवाड़ा पुरास्थल Lachhura Bhilwara Archaeological Site  इतिहास, खोज और प्रमुख तथ्य

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Lachhura Bhilwara लाछूरा भीलवाड़ा पुरास्थल राजस्थान का एक महत्वपूर्ण उत्खनन स्थल है, जहाँ 700 BC से 200 AD तक की सांस्कृतिक परतें मिलीं। इस स्थल से मानव व पशु मूर्तियाँ, ताम्र चूड़ियाँ और ब्राह्मी लिपि की मुहरें प्राप्त हुईं। 1. परिचय (Introduction – लाछूरा भीलवाड़ा परिचय) स्थान: लाछूरा, जिला भीलवाड़ा,…

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Ojhiana Bhilwara (ओझियाना, भीलवाड़ा) – आहड़ संस्कृति से सम्बद्ध ताम्रयुगीन स्थल

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Ojhiana Bhilwara राजस्थान का एक प्रमुख ताम्रयुगीन पुरास्थल है जो आहड़ संस्कृति से सम्बद्ध है। यहाँ 1999-2000 में खुदाई से प्राचीन मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ और ताम्र आभूषण मिले। 1. Introduction (परिचय) ओझियाना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित एक ताम्रयुगीन पुरास्थल (Copper Age site) है। यह स्थल आहड़ संस्कृति (Ahar Culture)…

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Ganeshwar Copper Age Culture (गणेश्वर ताम्रयुगीन संस्कृति)

Ganeshwar Copper Age Culture भारत की सबसे प्राचीन ताम्रयुगीन सभ्यता है, जो राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। यह सभ्यता 2800 ईसा पूर्व की है और इसे भारत की ताम्रयुगीन संस्कृति की जननी कहा जाता है। 1. Introduction (परिचय) गणेश्वर, राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक प्रमुख Copper…

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Gilund Civilization, Rajsamand | गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद – राजस्थान की प्राचीन संस्कृति का केंद्र

Gilund Civilization, Rajsamand गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद राजस्थान की प्राचीन आहड़ संस्कृति से जुड़ा पुरास्थल है, जहाँ से पक्की ईंटों के साक्ष्य, मिट्टी की पशु आकृतियाँ और चित्रित पात्रों पर नृत्य मुद्राएँ मिली हैं। 1. Introduction (परिचय) गिलूण्ड राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है। इसका उत्खनन…

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Balathal Civilization, Udaipur (बालाथल सभ्यता, उदयपुर)

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बालाथल सभ्यता, उदयपुर भारत की प्राचीन ताम्रपाषाण संस्कृति का प्रमुख केंद्र है, जहाँ से तांबे के सिक्के, दुर्गनुमा भवन और कुष्ठ रोग का सबसे पुरातन प्रमाण मिला है। 1. Introduction (परिचय) Balathal Civilization (बालाथल सभ्यता) राजस्थान के प्रमुख ताम्रपाषाण (Chalcolithic) स्थलों में से एक है। यह सभ्यता मानव सभ्यता के…

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Bagor Civilization, Bhilwara (बागौर सभ्यता, भीलवाड़ा)

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Bagor Civilization, Bhilwara is one of the oldest Neolithic settlements in Rajasthan, discovered near Kothari River dating back to 3000–500 BCE. 1. Introduction (परिचय) Bagor Civilization (बागौर सभ्यता) राजस्थान की सबसे प्राचीन नवपाषाण (Neolithic) बस्तियों में से एक है। यह भीलवाड़ा से 25 किमी दूर कोठारी नदी के किनारे स्थित…

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रंगमहल सभ्यता (हनुमानगढ़) – Rang Mahal Civilization (Hanumangarh)

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रंगमहल सभ्यता (हनुमानगढ़) राजस्थान की प्राचीन संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ प्रस्तरयुग से गुप्तकाल तक के अवशेष प्राप्त हुए हैं। 1. Introduction (परिचय) स्थान – हनुमानगढ़ जिले का सूरतगढ़ क्षेत्र। आसपास के स्थल – बड़ोपल, मुंडा, डाबरी आदि। प्रमुख टीला – रंगमहल का टीला, सबसे ऊँचा। सभ्यता का काल…

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Ahad Civilization (आहड़ सभ्यता, उदयपुर) – Rajasthan की ताम्रयुगीन संस्कृति

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Ahad Civilization (आहड़ सभ्यता) उदयपुर की ताम्रयुगीन संस्कृति है। धूलकोट क्षेत्र से मिली यह सभ्यता 1900–1200 ई.पू. के बीच समृद्ध रही और विदेशी व्यापार से जुड़ी थी। 1. Introduction – परिचय आहड़ सभ्यता ताम्रयुगीन संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है। यह उदयपुर से 3 किमी दूर धूलकोट नामक स्थान पर स्थित…

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अढ़ाई दिन का झोपड़ा, अजमेर | Adhai Din Ka Jhonpra, Ajmer

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अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर का प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है, जो हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। 1. Introduction | परिचय अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर में तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में स्थित है। यह हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का श्रेष्ठ उदाहरण…

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Tomb of Saint Abdullah Pir, Bhagwanpura (Banswara) संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा, भगवानपुरा (बाँसवाड़ा)

Tomb of Saint Abdullah Pir, Bhagwanpura (Banswara) संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा, भगवानपुरा (बाँसवाड़ा)

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Tomb of Saint Abdullah Pir, Bhagwanpura (Banswara) संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा भगवानपुरा, बाँसवाड़ा का प्रसिद्ध दाऊदी बोहरा धार्मिक स्थल है, जहाँ हर वर्ष उर्स का आयोजन होता है। 1. Introduction | परिचय संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा बाँसवाड़ा शहर के पास भगवानपुरा ग्राम में स्थित है। यह दाऊदी बोहरा…

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Hazrat Shakkar Peer Baba Dargah, Narhar (झुंझुनूं)

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Hazrat Shakkar Peer Baba Dargah नरहड़, झुंझुनूं की प्रसिद्ध दरगाह है जहाँ हर धर्म के लोग श्रद्धा से आते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर यहाँ विशाल मेला लगता है। 1. Introduction (परिचय) हजरत शक्कर पीर बाबा की दरगाह झुंझुनूं जिले के नरहड़ गाँव में स्थित है। यह दरगाह शेखावाटी क्षेत्र की…

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