रंगमहल सभ्यता (हनुमानगढ़) – Rang Mahal Civilization (Hanumangarh)

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रंगमहल सभ्यता (हनुमानगढ़) राजस्थान की प्राचीन संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ प्रस्तरयुग से गुप्तकाल तक के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

1. Introduction (परिचय)

स्थान – हनुमानगढ़ जिले का सूरतगढ़ क्षेत्र।

आसपास के स्थल – बड़ोपल, मुंडा, डाबरी आदि।

प्रमुख टीला – रंगमहल का टीला, सबसे ऊँचा।

सभ्यता का काल – प्रस्तरयुग से लेकर 6वीं शताब्दी ई.पू. तक।

सिंधु घाटी संस्कृति से संबंध।

2. Excavations (उत्खनन कार्य)

समय – 1952–1954।

नेतृत्व – लुण्ड विश्वविद्यालय (स्वीडन) का दल।

पुरातत्वविद् – डॉ. हन्ना रिड, होलगर अर्बमेन, के. एरिस्किन।

खुदाई से प्रस्तरयुगीन व धातुयुगीन संस्कृति के अवशेष मिले।

3. Settlement Phases (बस्ती चरण)

यहाँ बस्तियाँ तीन बार बसीं और उजड़ीं।

तीनों चरणों के मृद्भाण्डों में ज्यादा अंतर नहीं था।

लगातार सांस्कृतिक निरंतरता का प्रमाण।

4. Pottery (मृद्भाण्ड)

लाल और गुलाबी रंग की।

अधिकतर चाक से बनी, पतली और चिकनी।

सजावट – नाखून व तीक्ष्ण वस्तु से रेखाएँ।

विशेषता – सरल किन्तु आकर्षक डिज़ाइन।

5. Coins and Seals (मुद्राएँ और मुद्रिकाएँ)

105 तांबे की मुद्राएँ मिलीं।

पंच-मार्क, कुषाणकालीन, कनिष्क प्रथम और कनिष्क तृतीय की।

दो कांस्य सीलें – ब्राह्मी लिपि में नाम अंकित।

6. Architecture (वास्तुकला)

ईंटों से बने मकान।

कई दीवारों के अवशेष उत्खनन में मिले।

एक प्रसिद्ध मिट्टी का कटोरा (कुषाणकालीन आकृतियों सहित) – अब स्वीडन के लुण्ड संग्रहालय में।

7. Art & Terracotta Figurines (कला और टेराकोटा मूर्तियाँ)

दानलीला मृदाफलक – कृष्ण और गोपी।

लिंगोद्भव, शिव-पार्वती, चक्रपुरुष, अजैकपाद की प्रतिमाएँ।

गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि में अभिलेख – “यशोदाकृति”।

गोवर्धनधर मृण्फलक – मुकुटधारी कृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाए।

मथुरा और गांधार शैली का समन्वय।

8. सारांश (Summary)

रंगमहल सभ्यता, राजस्थान की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। हनुमानगढ़ जिले के सूरतगढ़ क्षेत्र में स्थित इस स्थल की खुदाई 1952 से 1954 के बीच स्वीडन के पुरातत्वविदों द्वारा की गई थी। यहाँ से प्राप्त साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह क्षेत्र प्रस्तरयुग से लेकर छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक एक समृद्ध सभ्यता का केंद्र था। इस स्थल से लाल और गुलाबी रंग के चिकने व चाक पर बने मृद्भाण्ड मिले हैं, जो इस सभ्यता की कुम्हारकला की उन्नति दर्शाते हैं। यहाँ से कुषाणकालीन तथा उससे पूर्व की 105 तांबे की मुद्राएँ और ब्राह्मी लिपि अंकित सीलें मिलीं, जो यहाँ की आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमाण हैं। कला के क्षेत्र में रंगमहल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ से प्राप्त टेराकोटा मूर्तियाँ, जैसे कृष्ण की दानलीला, गोवर्धनधर, शिव-पार्वती और चक्रपुरुष की आकृतियाँ, भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। इस प्रकार रंगमहल सभ्यता न केवल राजस्थान बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत की झलक देती है।

9. Facts Table (तथ्य तालिका)

तथ्य

 विवरण

स्थान सूरतगढ़ क्षेत्र, हनुमानगढ़ (राजस्थान)
खुदाई   वर्ष 1952–1954
नेतृत्व हन्ना रिड, होलगर अर्बमेन, के. एरिस्किन (स्वीडन)
विशेष खोज 105 तांबे की मुद्राएँ, कांस्य सीलें, टेराकोटा मूर्तियाँ
प्रमुख कला  कृष्णलीला, गोवर्धनधर, शिव-पार्वती मृदाफलक

10. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. Where is Rang Mahal located? / रंगमहल कहाँ स्थित है?

हनुमानगढ़ जिले के सूरतगढ़ क्षेत्र में।

2. When was Rang Mahal excavated? / रंगमहल की खुदाई कब हुई?

1952–1954 के बीच।

3. Who led the excavation of Rang Mahal? / रंगमहल की खुदाई किसने की?

हन्ना रिड, होलगर अर्बमेन और के. एरिस्किन ने।

4. What kind of pottery was found in Rang Mahal? / रंगमहल में किस प्रकार के मृद्भाण्ड मिले?

लाल और गुलाबी रंग के, पतले और चिकने चाक से बने बर्तन।

5. How many coins were discovered in Rang Mahal? / रंगमहल से कितनी मुद्राएँ मिलीं?

कुल 105 तांबे की मुद्राएँ।

6. Which dynasty’s coins were found here? / यहाँ किस वंश की मुद्राएँ मिलीं?

पंच-मार्क, कुषाण, कनिष्क प्रथम और कनिष्क तृतीय की मुद्राएँ।

7. What inscriptions were found in Rang Mahal? / रंगमहल से कौन से अभिलेख मिले?

गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि में “यशोदाकृति”।

8. Which museum preserves Rang Mahal artifacts? / रंगमहल की वस्तुएँ कहाँ सुरक्षित हैं?

स्वीडन के लुण्ड संग्रहालय में।

9. What are the main terracotta figures found? / प्रमुख टेराकोटा मूर्तियाँ कौन-सी हैं?

कृष्णलीला, गोवर्धनधर, शिव-पार्वती, लिंगोद्भव आदि।

10. What is the importance of Rang Mahal Civilization? / रंगमहल सभ्यता का महत्व क्या है?

यह राजस्थान की धातुयुगीन और गुप्तकालीन कला का प्रमुख केंद्र है

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