Junakheda, Pali – जूनाखेड़ा, पाली : राजस्थान का बहुस्तरीय सांस्कृतिक स्थल

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Junakheda, Pali राजस्थान का प्राचीन बहुस्तरीय स्थल है, जहाँ चार सांस्कृतिक स्तर मिले—1800 ई.पू. से 9वीं शताब्दी तक के मृद्भाण्ड, दीपक और शालभंजिका अंकित अवशेष प्राप्त हुए।

1. Introduction – परिचय

जूनाखेड़ा, राजस्थान के पाली जिले के नाडोल क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।

यह स्थल राजस्थान की प्राचीन सभ्यता के निरंतर विकास का साक्षी है।

यहाँ से चार अलग-अलग कालखंडों की सांस्कृतिक परतें मिली हैं, जो लगभग 1800 ई.पू. से 9वीं शताब्दी ईस्वी तक फैली हैं

2. Discovery – खोज

1. जूनाखेड़ा की खोज वर्ष 1883–84 ई. में की गई।

2. इसे एच. डब्ल्यू. बी. के. गैरिक (H.W.B.K. Garrick) ने खोजा।

3. यह खोज राजस्थान के प्रारंभिक मानव बस्तियों के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी।

3. Excavation Details – उत्खनन विवरण

राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा 1889–90 से 1995–96 के बीच चार अलग-अलग सत्रों में उत्खनन कराया गया।

खुदाई के दौरान चार सांस्कृतिक स्तर (Cultural Layers) की पहचान हुई।

प्रत्येक स्तर ने राजस्थान के सांस्कृतिक विकास की एक अलग कहानी प्रस्तुत की।

4. Cultural Layers – सांस्कृतिक स्तर

1. प्रथम सांस्कृतिक स्तर (लगभग 1800 ई.पू.)

काले और लाल धरातल के अचित्रित मृद्भाण्ड खण्ड प्राप्त हुए।

यह स्तर राजस्थान की प्रारंभिक मिट्टी बर्तनों की परंपरा को दर्शाता है।

2. द्वितीय सांस्कृतिक स्तर (1वीं से 5वीं शताब्दी ईस्वी)

इस स्तर के मृद्भाण्ड खण्डों पर शालभंजिका (स्त्री आकृति) का अंकन मिला।

यह धार्मिक और कलात्मक विकास का प्रमाण है।

3. तृतीय सांस्कृतिक स्तर (6वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी)

यहाँ से काले ओपदार (polished black) कटोरे और लघु आकार के दीपक मिले।

यह स्तर मध्यकालीन जीवनशैली और पूजा-पद्धति को दर्शाता है।

4. चतुर्थ सांस्कृतिक स्तर (9वीं शताब्दी के बाद)

इसमें स्थानीय बस्तियों के निवास अवशेष और संरचनाएँ मिलीं।

5. Major Findings – प्रमुख खोजें

अचित्रित लाल-काले मृद्भाण्ड (1800 ई.पू.)

शालभंजिका अंकित मृद्भाण्ड (1वीं–5वीं शताब्दी)

काले ओपदार कटोरे (6वीं–9वीं शताब्दी)

लघु दीपक (धार्मिक उपयोग)

स्थानीय निवास अवशेष (9वीं शताब्दी के बाद)

 सारांश (Summary in Hindi – 150+ words)

जूनाखेड़ा, पाली का यह पुरातात्विक स्थल राजस्थान की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के विकास का अद्भुत उदाहरण है। इसकी खोज 1883–84 में एच.डब्ल्यू.बी.के. गैरिक ने की थी, और बाद में राज्य पुरातत्व विभाग ने 1889–90 से 1995–96 के बीच चार सत्रों में इसका उत्खनन कराया। खुदाई में चार अलग-अलग सांस्कृतिक स्तर मिले—पहला स्तर 1800 ई.पू. का है जिसमें अचित्रित लाल-काले मृद्भाण्ड मिले, दूसरा स्तर पहली से पाँचवीं शताब्दी का है जिसमें शालभंजिका अंकित मृपात्र मिले, तीसरे स्तर (6वीं से 9वीं शताब्दी) से काले ओपदार कटोरे और छोटे दीपक प्राप्त हुए। यह स्थल दर्शाता है कि जूनाखेड़ा क्षेत्र में निरंतर मानव बस्ती रही और यहाँ की संस्कृति समय के साथ विकसित होती रही। यह राजस्थान की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का सशक्त प्रमाण है।

Facts Table (तथ्य तालिका)

 तथ्य 

विवरण

खोजकर्ता एच. डब्ल्यू. बी. के. गैरिक
खोज वर्ष 1883–84 ई.
उत्खनन अवधि  1889–90 से 1995–96
 कुल सांस्कृतिक स्तर  चार
 प्रमुख खोज  शालभंजिका अंकित मृद्भाण्ड, काले कटोरे, दीपक

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. Where is Junakheda located? / जूनाखेड़ा कहाँ स्थित है?

पाली जिले के नाडोल क्षेत्र में।

2. Who discovered Junakheda site? / खोज किसने की?

एच.डब्ल्यू.बी.के. गैरिक ने।

3. When was Junakheda discovered? / खोज कब हुई?

1883–84 ई. में।

4. How many cultural layers were found? / कितने सांस्कृतिक स्तर मिले?

चार।

5. Which department conducted the excavation? / उत्खनन किस विभाग ने कराया?

राज्य पुरातत्व विभाग, राजस्थान।

6. What was found in the first layer? / प्रथम स्तर से क्या मिला?

अचित्रित लाल-काले मृद्भाण्ड।

7. What was found in the second layer? / द्वितीय स्तर से क्या मिला?

शालभंजिका अंकित मृद्भाण्ड।

8. What was found in the third layer? / तृतीय स्तर से क्या मिला?

काले ओपदार कटोरे और लघु दीपक।

9. What is the significance of Junakheda? / जूनाखेड़ा का महत्व क्या है?

यह स्थल राजस्थान की प्राचीन सभ्यता की निरंतरता दर्शाता है।

10. Which period does the first layer belong to? / प्रथम स्तर किस काल का है?

लगभग 1800 ई.पू. का।

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