Nagar Tonk – नगर, टोंक : मालव सभ्यता का प्राचीन केंद्र और कलात्मक धरोहर

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Nagar Tonk नगर टोंक राजस्थान का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है जहाँ शुंग युगीन मूर्तियाँ, मृद्भाण्ड, सिक्के और प्रतिमाएँ मिलीं। इसे प्राचीन मालव सभ्यता का केंद्र माना जाता है

1. Introduction (परिचय)

नगर, टोंक जिले का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।

इसे “कार्कोट नगर” नाम से भी जाना जाता है।

यहाँ मिले अवशेष शुंग युग, गुप्तोत्तर काल और मालव काल की कला एवं संस्कृति के जीवंत प्रमाण हैं।

2. Excavation History (उत्खनन का इतिहास)

1. नगर की खुदाई पुरातत्त्ववेत्ता कृष्णदेव की देखरेख में हुई।

2. बाद में के.वी. सौन्दरराजन ने पुनः उत्खनन करवाया।

3. खुदाई से 6000 मालव सिक्के, 1000 से अधिक पात्रों के टुकड़े, और 500 से अधिक छोटे अवशेष प्राप्त हुए।

4. ये सभी वस्तुएँ नगर को मालव सभ्यता के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं।

3. Art and Sculpture (कला और मूर्तिकला)

शुंग कालीन श्वेत फलस्तर जैसी मिट्टी से बनी फलकों पर कामदेव-रति, इन्द्र-इंद्राणी जैसी आकृतियाँ मिलीं।

ये मूर्तियाँ उस समय की संवेदनशील और उन्नत कलात्मक अभिव्यक्ति का परिचायक हैं।

नगर से मिली मूर्तियाँ उच्च तकनीक और सुंदर रचना का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

4. Pottery and Artifacts (मृद्भाण्ड और अवशेष)

यहाँ के मृद्भाण्ड अधिकतर लाल रंग के हैं।

पात्रों पर मानव और पशु आकृतियों की सजावट देखने को मिलती है।

यह दर्शाता है कि नगर के निवासी कुशल शिल्पकार और कलाकार थे।

यहाँ से प्राप्त अवशेष दैनिक जीवन, धर्म और कला से जुड़ी विविध गतिविधियों को दर्शाते हैं।

5. Coins and Inscriptions (सिक्के और अभिलेख)

खुदाई में मिले 6000 मालव सिक्के नगर को मालव जनपद के अधीन क्षेत्र सिद्ध करते हैं।

सिक्कों से यहाँ की व्यापारिक समृद्धि और आर्थिक विकास का पता चलता है।

सिक्कों के अलावा मालव शासन काल की आर्थिक प्रणाली के भी संकेत मिलते हैं।

6. Religious and Cultural Finds (धार्मिक एवं सांस्कृतिक खोजें)

महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा (स्लेटी पत्थर में निर्मित) – गुप्तोत्तर कालीन।

गणेश की मूर्ति – पत्थर पर मोदक रूप में अंकित।

तीन फणधारी नाग की आकृति – धार्मिक आस्था का प्रतीक।

लक्ष्मी की प्रतिमा – खड़ी मुद्रा में कमल धारण करती हुई।

ये प्रतिमाएँ नगर को धार्मिक कला का केंद्र सिद्ध करती हैं।

7. Significance (ऐतिहासिक महत्त्व)

नगर, टोंक राजस्थान की शुंग और गुप्तोत्तरकालीन कला का केंद्र रहा है।

यहाँ की मूर्तियाँ और सिक्के मालव जनपद की सभ्यता, धर्म, और अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब हैं।

यह स्थल राजस्थान की संस्कृति और पुरातत्व का अमूल्य स्रोत है।

8. सारांश (Summary)

नगर, टोंक राजस्थान का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है, जिसने शुंग युग से लेकर गुप्तोत्तर काल तक की कलात्मक और औद्योगिक प्रगति के अनेक प्रमाण दिए हैं। इसकी खुदाई सबसे पहले पुरातत्त्ववेत्ता कृष्णदेव के निर्देशन में हुई, और बाद में के.वी. सौन्दरराजन ने इसे पुनः उत्खनित कराया। यहाँ से 6000 मालव सिक्के, लाल मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ और अन्य अवशेष प्राप्त हुए। कामदेव-रति, इन्द्र-इंद्राणी जैसी मूर्तियाँ इस नगर की कलात्मक संवेदनशीलता को उजागर करती हैं। नगर से मिली महिषासुरमर्दिनी, गणेश, नाग और लक्ष्मी की प्रतिमाएँ उस काल की धार्मिक आस्था और शिल्पकला के उत्कर्ष का प्रमाण हैं। यहाँ के सिक्के मालव शासन के आर्थिक विस्तार को दर्शाते हैं। इन सभी खोजों से सिद्ध होता है कि नगर न केवल कला और संस्कृति का केंद्र था बल्कि एक सशक्त आर्थिक इकाई भी थी, जिसने राजस्थान के इतिहास में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया।

9. Facts Table (तथ्य तालिका)

 

तथ्य 

विवरण

स्थान   टोंक, राजस्थान
अन्य नाम कार्कोट नगर
 खुदाईकर्ता   कृष्णदेव, के.वी. सौन्दरराजन
प्रमुख अवशेष  6000 मालव सिक्के, मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ
प्रमुख प्रतिमाएँ   महिषासुरमर्दिनी, गणेश, नाग, लक्ष्मी

10. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. नगर कहाँ स्थित है?

टोंक जिले में।

2. नगर का दूसरा नाम क्या है?

कार्कोट नगर।

3. नगर की खुदाई किसने की थी?

कृष्णदेव और के.वी. सौन्दरराजन ने।

4. यहाँ कितने सिक्के मिले हैं?

लगभग 6000 मालव सिक्के।

5. नगर की मूर्तियाँ किस काल की हैं?

शुंग और गुप्तोत्तर काल की।

6. यहाँ कौन सी प्रसिद्ध प्रतिमाएँ मिली हैं?

महिषासुरमर्दिनी, गणेश, लक्ष्मी, नाग प्रतिमाएँ।

7. नगर के मृद्भाण्ड किस रंग के हैं?

लाल रंग के।

8. नगर की खुदाई से क्या सिद्ध होता है?

यह मालव सभ्यता का प्रमुख केंद्र था।

9. नगर का धार्मिक प्रतीक कौन-सा मिला?

तीन फणधारी नाग और लक्ष्मी की प्रतिमा।

10. नगर का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?

यह राजस्थान की कला और संस्कृति का केंद्र था।

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