Ahad Civilization (आहड़ सभ्यता) उदयपुर की ताम्रयुगीन संस्कृति है। धूलकोट क्षेत्र से मिली यह सभ्यता 1900–1200 ई.पू. के बीच समृद्ध रही और विदेशी व्यापार से जुड़ी थी।
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Toggle1. Introduction – परिचय
आहड़ सभ्यता ताम्रयुगीन संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है।
यह उदयपुर से 3 किमी दूर धूलकोट नामक स्थान पर स्थित है।
प्राचीन नाम: ताम्रवती, आघाटपुर, आघट दुर्ग।
2. Location & Discovery – स्थान और खोज
1. बनास और आयड़ (बेड़च) नदी के किनारे स्थित।
2. 1953 – अक्षय कीर्ति व्यास ने खोज की।
3. 1956 – रत्नचंद्र अग्रवाल के निर्देशन में उत्खनन।
4. 1961–62 – H.D. सांकलिया, डेकन कॉलेज, राजस्थान पुरातत्व विभाग और मेलबर्न विश्वविद्यालय का संयुक्त अभियान।
3. Excavations – उत्खनन कार्य
यहाँ से 8 स्तरों की बस्तियाँ प्राप्त।
स्तर दर स्तर –
1. मिट्टी की दीवारें, बर्तन।
2. पक्की दीवारें, मिट्टी के बर्तन।
3. चित्रित बर्तन, घरेलू उपयोग।
4. तांबे की कुल्हाड़ियाँ।
सभी स्तर लगातार विकसित और नष्ट होते रहे।
4. Settlements & Architecture – बस्तियाँ व स्थापत्य
मकान:
पत्थर की नींव + मिट्टी की दीवारें।
छतें बांस से ढकी।
बड़े कमरे (33 × 20 फीट)।
सामूहिक जीवन के प्रमाण – 4–6 बड़े चूल्हे।
घरों की फर्श: काली मिट्टी + नदी की बालू।
5. Pottery & Artifacts – मृद्भाण्ड और पुरावशेष
लाल, काले और भूरे रंग के बर्तन।
अनाज रखने के बर्तन: गोरे और कोठ।
काले-लाल बर्तन पर सफेदी।
ताम्र उपकरण व कुल्हाड़ियाँ।
यूनानी मुद्राएँ (त्रिशूल, अपोलो देवता चित्रित)।
टेराकोटा वृषभ (Banassian Bull)।
6. Economy & Trade – अर्थव्यवस्था व व्यापार
मुख्य आधार: पशुपालन और कृषि।
तांबा गलाना और औजार बनाना प्रमुख उद्योग।
विदेशी व्यापार – यूनानी मुद्राओं और मुहरों से प्रमाणित।
7. Religion & Burial Practices – धर्म व अंतिम संस्कार
मृतकों को कपड़े और आभूषणों के साथ दफनाते थे।
आस्था और जीवन शैली में सामूहिकता स्पष्ट।
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8. Importance in Indian Archaeology – भारतीय पुरातत्व में महत्त्व
ताम्रयुगीन सभ्यता का प्रमुख केन्द्र।
राजस्थान की आहड़-संस्कृति (Ahar Culture) का आधार।
गिलूण्ड (राजसमंद) में समान संस्कृति के प्रमाण।
आहड़ में पक्की ईंटों का उपयोग नहीं, गिलूण्ड में प्रचुर मात्रा में।
सारांश (Summary)
आहड़ सभ्यता (Ahar Civilization) उदयपुर के पास स्थित भारत की प्राचीन ताम्रयुगीन संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यह लगभग 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता बनास और आयड़ नदी के किनारे विकसित हुई थी। इस स्थल का प्राचीन नाम ताम्रवती रहा है, जिसे बाद में आघाटपुर और धूलकोट के नाम से भी जाना गया। 1953 से 1962 तक हुए विभिन्न उत्खननों में इस स्थल से आठ बस्तियों के स्तर मिले, जो सभ्यता के विकास और पतन दोनों को दर्शाते हैं।
आहड़ सभ्यता की सबसे उल्लेखनीय विशेषता है – तांबे का व्यापक उपयोग। यहाँ से तांबे की कुल्हाड़ियाँ, औजार और गले हुए धातु के प्रमाण मिले हैं। यही कारण है कि इसे ताम्रयुगीन सभ्यता भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में लाल, काले और भूरे रंग के बर्तन प्रमुख थे, जिन पर कभी-कभी चित्रकारी की जाती थी। बड़े बर्तनों को स्थानीय भाषा में गोरे और कोठ कहा जाता था। उत्खनन से मिले टेराकोटा वृषभ को “Banassian Bull” नाम दिया गया है, जो कला और धार्मिक मान्यताओं दोनों को दर्शाता है।
यह सभ्यता न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से भी जुड़ी थी। यहाँ मिली यूनानी मुद्राएँ और मुहरें इस बात का प्रमाण हैं कि ईसा पूर्व तृतीय शताब्दी से ही राजस्थान का संपर्क विदेशों से था। इन मुद्राओं पर अपोलो देवता और त्रिशूल की आकृतियाँ अंकित थीं। आहड़ के लोग मृतकों को कपड़े और आभूषणों के साथ दफनाते थे, जिससे उनकी धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं का पता चलता है।
स्थापत्य दृष्टि से आहड़ के मकान बड़े और चौकोर होते थे। पत्थर की नींव पर मिट्टी की दीवारें और बांस से ढकी छतें इनकी खासियत थीं। एक मकान में 4 से 6 चूल्हों का होना यह दर्शाता है कि परिवार बड़े और सामूहिक रूप से रहते थे।
डॉ. गोपीनाथ शर्मा के अनुसार, आहड़ सभ्यता का समृद्ध काल 1900 ई.पू. से 1200 ई.पू. तक रहा। इस अवधि में आहड़ ने न केवल एक सांस्कृतिक पहचान बनाई बल्कि भारतीय पुरातत्व को भी एक नया आयाम दिया। गिलूण्ड जैसे अन्य स्थलों पर मिली समान संस्कृति इस तथ्य को मजबूत करती है। आहड़ सभ्यता हमें यह सिखाती है कि प्राचीन भारत का समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति कितनी उन्नत और समृद्ध थी।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| स्थान | उदयपुर से 3 किमी दूर, धूलकोट |
| खोजकर्ता | अक्षय कीर्ति व्यास (1953) |
| काल | 1900 ई.पू.–1200 ई.पू. |
| प्रमुख उद्योग | तांबा गलाना व औजार बनाना |
| विशेष पुरावशेष | यूनानी मुद्राएँ, टेराकोटा वृषभ |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. What is Ahad Civilization? (आहड़ सभ्यता क्या है?)
Ans: आहड़ सभ्यता राजस्थान की ताम्रयुगीन संस्कृति है, जो उदयपुर के धूलकोट क्षेत्र से मिली है।
Q2. Where is Ahad Civilization located? (आहड़ सभ्यता कहाँ स्थित है?)
Ans: यह उदयपुर से 3 किमी दूर बनास और आयड़ नदी के किनारे स्थित है।
Q3. When was Ahad Civilization discovered? (आहड़ सभ्यता की खोज कब हुई?)
Ans: इसकी खोज 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास ने की थी।
Q4. What was the ancient name of Ahad? (आहड़ का प्राचीन नाम क्या था?)
Ans: आहड़ का प्राचीन नाम ताम्रवती था।
Q5. What is the time period of Ahad Civilization? (आहड़ सभ्यता का काल कौन सा है?)
Ans: इसका समृद्ध काल 1900 ई.पू. से 1200 ई.पू. तक माना गया है।
Q6. Which foreign evidence was found here? (यहाँ कौन से विदेशी प्रमाण मिले हैं?)
Ans: यहाँ यूनानी मुद्राएँ और मुहरें मिली हैं।
Q7. What was the main industry of Ahad Civilization? (आहड़ सभ्यता का मुख्य उद्योग क्या था?)
Ans: तांबा गलाना और औजार बनाना इसका मुख्य उद्योग था।
Q8. What were the burial practices? (यहाँ अंतिम संस्कार की पद्धति क्या थी?)
Ans: लोग मृतकों को कपड़ों और आभूषणों के साथ दफनाते थे।
Q9. Which famous artifact is related to Ahad Civilization? (आहड़ सभ्यता का प्रसिद्ध पुरावशेष कौन सा है?)
Ans: टेराकोटा वृषभ जिसे “Banassian Bull” कहा जाता है।
Q10. Which similar site is linked with Ahad Civilization? (आहड़ सभ्यता से संबंधित समान स्थल कौन सा है?)
Ans: गिलूण्ड (राजसमंद) में आहड़ जैसी संस्कृति मिली है।
