Ganeshwar Copper Age Culture (गणेश्वर ताम्रयुगीन संस्कृति)

Ganeshwar Copper Age Culture भारत की सबसे प्राचीन ताम्रयुगीन सभ्यता है, जो राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। यह सभ्यता 2800 ईसा पूर्व की है और इसे भारत की ताम्रयुगीन संस्कृति की जननी कहा जाता है। 1. Introduction (परिचय) गणेश्वर, राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक प्रमुख Copper…

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Gilund Civilization, Rajsamand | गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद – राजस्थान की प्राचीन संस्कृति का केंद्र

Gilund Civilization, Rajsamand गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद राजस्थान की प्राचीन आहड़ संस्कृति से जुड़ा पुरास्थल है, जहाँ से पक्की ईंटों के साक्ष्य, मिट्टी की पशु आकृतियाँ और चित्रित पात्रों पर नृत्य मुद्राएँ मिली हैं। 1. Introduction (परिचय) गिलूण्ड राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है। इसका उत्खनन…

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Festivals of Kartik Month | कार्तिक माह के त्यौहार

Festivals of Kartik Month |  कार्तिक माह के त्यौहार

 Festivals of Kartik Month कार्तिक माह के त्यौहार (करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैयादूज, देव दीपावली आदि) भारतीय संस्कृति, भक्ति और पारिवारिक मूल्यों के अद्भुत संगम हैं। इनके धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को विस्तार से जानें। परिचय | Introduction कार्तिक माह (Kartik Month) हिंदू पंचांग का…

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Kanhaiyalal Sethia : Dharti Dhora Ri Poet | कन्हैयालाल सेठिया : धरती धोरां री के कवि

Kanhaiyalal Sethia : Dharti Dhora Ri Poet | कन्हैयालाल सेठिया : धरती धोरां री के कवि

Kanhaiyalal Sethia जन्म, रचनाएँ और सम्मान। धरती धोरां री के कवि, पद्मविभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार और राजस्थान रत्न सम्मान। Main Body (मुख्य भाग) Early Life and Education | प्रारंभिक जीवन व शिक्षा जन्म: 1919 ई., सुजानगढ़ (चूरू), राजस्थान। प्रारंभिक अवस्था से ही कविता लेखन की रुचि। बचपन में ही रमणए-रा-सोरठा…

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श्रीधर : राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित कवि

श्रीधर, 15वीं शताब्दी के कवि थे जो राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित थे। उन्होंने रणमल छंद, सप्तशती और कवित्त भागवत की रचना की। रणमल छंद इतिहास दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। श्रीधर का परिचय श्रीधर पंद्रहवीं शताब्दी के प्रमुख कवि थे। वे राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित कवि थे।…

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SAMAY SUNDARसमय सुंदर : जालौर के जैन साधु और रचनाकार

SAMAY SUNDAR समय सुंदर, जालौर जिले के सांचोर कस्बे के जैन साधु थे। उन्होंने शास्त्रीय रागों पर अनेक गीतों की रचना की, जिनका संकलन 'समय सुंदर रास पंचक' और 'समय सुंदर कृत कुसुमांजलि' के रूप में प्रसिद्ध है। समय सुंदर का परिचय समय सुंदर जैन साधु थे। इनकी कर्मस्थली राजस्थान…

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Sharangdhar शारंगधर : हम्मीर रासो और शारंगधर संहिता के रचयिता

Sharangdhar शारंगधर, राघव देव का पौत्र और दामोदर का पुत्र था। उसने हम्मीर रासो और शारंगधर संहिता की रचना की। उसकी सारंगधर पद्धति मध्यकालीन भारतीय संगीत और वृक्षायुर्वेद का प्रमुख आधार है। शारंगधर का परिचय शारंगधर, रणथम्भौर के शासक  हम्मीर के गुरु राघव देव का पौत्र तथा दामोदर का पुत्र था।…

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अमरनाथ जोगी और कडाणा की लड़ाई की वीर गाथा

Amarnath jogi अमरनाथ जोगी ने कडाणा की लड़ाई में शहीद हुए वीर गलालसिंह की कथा को गीतबद्ध किया। जानिए कैसे इस लोकगाथा पर उन्हें डूंगरपुर महारावल से जागीर मिली। अमरनाथ जोगी कौन थे? अमरनाथ जोगी ठाकरड़ा गांव के निवासी थे। वे लोककवि और गायक थे जिन्होंने राजस्थान की वीर परंपरा…

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Dr. Sitaram Lalas : Rajsthani Jubaan Ki Mashaal | डॉ. सीताराम लालस : राजस्थानी जुबां की मशाल

Dr. Sitaram Lalas : Rajsthani Jubaan Ki Mashaal | डॉ. सीताराम लालस : राजस्थानी जुबां की मशाल

Dr. Sitaram Lalas biography, जन्म, योगदान और उपलब्धियाँ। राजस्थानी भाषा का शब्द-कोश रचयिता, पद्मश्री सम्मानित, "राजस्थानी जुबां की मशाल"। Main Body (मुख्य भाग) Early Life and Education | प्रारंभिक जीवन व शिक्षा जन्म: 25 नवम्बर 1912, ननिहाल सिरवाड़ी ग्राम, बाड़मेर जिला। मूल निवास: नरेवा ग्राम, जोधपुर। शिक्षा: आठवीं तक पढ़ाई,…

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जैन विश्व भारती लाडनूं (नागौर): Jain Vishva Bharati University, Jain Darshan और Jain Culture का प्रमुख केन्द्र

जैन विश्व भारती लाडनूं (नागौर): Jain Vishva Bharati University, Jain Darshan और Jain Culture का प्रमुख केन्द्र

जैन विश्व भारती लाडनूं Jain Vishva Bharati University आचार्य श्री तुलसी की प्रेरणा से 1970 में स्थापित जैन दर्शन, जैन संस्कृति, साधना और प्रशिक्षण का प्रमुख वैश्विक केन्द्र है। यह Deemed University विश्वभर के विद्वानों व छात्रों को अध्ययन और शोध का अवसर प्रदान करती है 1. जैन विश्व भारती…

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SAINT DADUDAYAL |DADU PANTH | संत दादूदयाल और दादू पंथ (राजस्थान का कबीर) 

SAINT DADUDAYAL |DADU PANTH | संत दादूदयाल और दादू पंथ (राजस्थान का कबीर) 

SAINT DADUDAYAL संत दादूदयाल और दादू पंथ राजस्थान में निर्गुण भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक रहे। इन्हें "राजस्थान का कबीर" कहा जाता है। जानें दादूजी का जीवन, शिक्षाएँ, 52 शिष्य, 6 शाखाएँ, अलख दरीबा सत्संग और पंथ की विशेषताएँ। 1. परिचय संत दादूदयाल: निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रवर्तक "राजस्थान का कबीर"…

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संत मीरां बाई : Rajasthan ki Sant Mahila, Krishna Bhakt Poet & Singer

संत मीरां बाई : Rajasthan ki Sant Mahila, Krishna Bhakt Poet & Singer

संत मीरां बाई (Sant Mira Bai) का जीवन, जन्म, विवाह, भक्ति, रचनाएँ और योगदान। Rajasthan की महान Sant Mahila एवं कृष्ण भक्त कवयित्री का इतिहास।  परिचय (Introduction) मीरां बाई : 16वीं सदी की महान संत महिला कृष्ण भक्त कवयित्री एवं गायिका राजस्थान की राधा (Radha of Rajasthan) कहलायीं सरल भक्ति,…

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कैला देवी करौली |kaila devi | इतिहास, लक्खी मेला, लांगुरिया गीत और पौराणिक मान्यताएं Important Facts | Exclusive Faq

कैला देवी करौली |kaila devi | इतिहास, लक्खी मेला, लांगुरिया गीत और पौराणिक मान्यताएं Important Facts | Exclusive Faq

कैला देवी करौली राजस्थान की यदुवंशीय कुलदेवी मानी जाती हैं। त्रिकूट पर्वत पर स्थित यह शक्तिपीठ चैत्र शुक्ल अष्टमी को लगने वाले लक्खी मेले और भक्तों द्वारा गाए जाने वाले लांगुरिया गीतों के लिए प्रसिद्ध है। जानें कैला देवी का इतिहास, पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व। मुख्य बिंदु (Notes Form)…

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Gaudiya Sampradaya | Chetanya Mahaprabhu|गौडीय संप्रदाय| चैतन्य महाप्रभु|राजस्थान के संत संप्रदाय

"गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रवर्तक चैतन्य महाप्रभु थे। उनका अचिन्त्य भेदाभेद दर्शन और राधा-कृष्ण भक्ति आज भी वृंदावन से जयपुर तक जीवंत है।" Gaudiya Sampradaya  प्रवर्तक – चैतन्य महाप्रभु जन्म - नदिया,बंगाल पत्नी – विष्णुप्रिया गुरु - माध्वाचार्य बचपन का नाम - निमाई उपनाम - विश्वम्भर दर्शन - अचिन्तयभेदाभेद मंदिर स्थान…

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देवनारायण जी/ DevNarayan Ji/राजस्थान लोकदेवता

"लोक देवता देवनारायण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उनकी जीवनी, चमत्कार और पूजा परंपरा आज भी लोगों की आस्था का केंद्र हैं।" जीवन परिचय जन्म - 1243 ई जन्मस्थान - गौठ दडावन्त (आसींद - भीलवाडा) पालन-पोषण - देवास (M.P.) में हुआ जति - बगडावत वंश के…

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