श्रीधर : राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित कवि

श्रीधर, 15वीं शताब्दी के कवि थे जो राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित थे। उन्होंने रणमल छंद, सप्तशती और कवित्त भागवत की रचना की। रणमल छंद इतिहास दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है।

श्रीधर का परिचय

श्रीधर पंद्रहवीं शताब्दी के प्रमुख कवि थे।

वे राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित कवि थे।

प्रमुख कृतियाँ

1. रणमल छंद – इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ, संस्कृत भाषा में लिखा गया।

2. सप्तशती

3. कवित्त भागवत

महत्व

रणमल छंद राजस्थानी इतिहास व संस्कृति को समझने का प्रामाणिक स्रोत है।

इनकी रचनाएँ साहित्य और इतिहास दोनों की दृष्टि से मूल्यवान हैं।

सारांश

श्रीधर पंद्रहवीं शताब्दी के एक प्रतिष्ठित कवि थे जो राठौड़ नरेश रणमल के राज्याश्रित थे। उन्होंने साहित्य और इतिहास दोनों को समृद्ध करने वाले ग्रंथों की रचना की। उनकी प्रमुख रचनाएँ रणमल छंद, सप्तशती और कवित्त भागवत हैं। इनमें रणमल छंद विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संस्कृत भाषा में लिखा गया है और ऐतिहासिक दृष्टि से मूल्यवान स्रोत माना जाता है। श्रीधर ने अपने लेखन से उस समय के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन की झलक प्रस्तुत की। उनकी कृतियाँ आज भी राजस्थानी साहित्य और इतिहास के अध्ययन में प्रमुख स्थान रखती हैं।

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पहलू

विवरण

नाम श्रीधर
काल पंद्रहवीं शताब्दी
आश्रयदाता राठौड़ नरेश रणमल
प्रमुख कृतियाँ रणमल छंद, सप्तशती, कवित्त भागवत
भाषा संस्कृत
विशेष महत्व रणमल छंद – इतिहास हेतु प्रमुख स्रोत

FAQs (One-word Answer)

Q1. श्रीधर किस नरेश के आश्रित थे? – रणमल

Q2. किस शताब्दी के कवि थे? – 15वीं

Q3. प्रमुख ग्रंथ का नाम? – रणमल छंद

Q4. रणमल छंद किस भाषा में है? – संस्कृत

Q5. कुल कितनी कृतियाँ मानी जाती हैं? – तीन

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