जैन विश्व भारती लाडनूं Jain Vishva Bharati University आचार्य श्री तुलसी की प्रेरणा से 1970 में स्थापित जैन दर्शन, जैन संस्कृति, साधना और प्रशिक्षण का प्रमुख वैश्विक केन्द्र है। यह Deemed University विश्वभर के विद्वानों व छात्रों को अध्ययन और शोध का अवसर प्रदान करती है
Page Contents
Toggle1. जैन विश्व भारती लाडनूं का परिचय
स्थान: लाडनूं, जिला नागौर, राजस्थान
अमूर्तिपूजक जैन परंपरा का केन्द्र
जैन दर्शन (Jain Philosophy) और साधना का वैश्विक संस्थान
विद्वानों और छात्रों का International Hub
2. स्थापना और आचार्य श्री तुलसी का योगदान
वर्ष: 1970
प्रेरणा: युगप्रधान आचार्य श्री तुलसी
उद्देश्य: जैन संस्कृति (Jain Culture) का प्रशिक्षण, अध्ययन और शोध
लाडनूं को “आध्यात्म तीर्थ” का दर्जा
3. जैन दर्शन और संस्कृति का अध्ययन
Jain Darshan
अहिंसा, अपरिग्रह और आत्म-शुद्धि के सिद्धांत
आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता
Comparative Philosophy के अंतर्गत शोध
Jain Culture Training
लोकाचार और जीवनशैली
Value-based Education
विश्वभर में शांति व सह-अस्तित्व का संदेश
4. साधना और आध्यात्मिकता
ध्यान (Meditation) और प्राणायाम
Preksha Dhyan पर विशेष जोर
आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति
5. वैश्विक पहचान और Research Opportunities
अनेक देशों के छात्र और शोधार्थी
Jainism पर International Conferences
Cross-cultural dialogue का मंच
6. Deemed University का दर्जा
भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त Deemed University
उच्च शिक्षा, PhD और Research Courses
Academic + Spiritual Integration
7. सारांश
जैन विश्व भारती लाडनूं (नागौर) केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि यह जैन दर्शन और जैन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। आचार्य श्री तुलसी की प्रेरणा से 1970 में स्थापित यह “आध्यात्म तीर्थ” विश्वभर में अहिंसा, शांति और आत्म-शुद्धि का संदेश फैलाता है। यहाँ Jain Darshan और Jain Culture Training का systematic अध्ययन कराया जाता है, जो विद्यार्थियों को न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम बनाता है।
इस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता है साधना और Preksha Meditation, जो मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरण का आधार बनता है। इसकी पहचान Deemed University के रूप में भी है, जहाँ Academic Research और Spiritual Practice का अनोखा समन्वय होता है।
विश्वभर से आए शोधार्थी यहाँ Comparative Philosophy, Jainism और Peace Studies पर कार्य करते हैं। जैन विश्व भारती लाडनूं वास्तव में एक ऐसा केन्द्र है जो प्राचीन दर्शन और आधुनिक शिक्षा को जोड़कर वैश्विक समाज के लिए मार्गदर्शक का कार्य करता है।
8. प्रमुख तथ्य (Table)
तथ्य |
विवरण |
| स्थान | लाडनूं, जिला नागौर, राजस्थान |
| स्थापना | वर्ष 1970 |
| प्रेरणा स्रोत | आचार्य श्री तुलसी |
| पहचान | जैन दर्शन व संस्कृति का वैश्विक केन्द्र |
| दर्जा | Deemed University |
9. FAQs
Q1. जैन विश्व भारती लाडनूं कहाँ स्थित है?
जैन विश्व भारती राजस्थान के नागौर जिले के लाडनूं कस्बे में स्थित है।
Q2. इसकी स्थापना कब और किसने की थी?
इसकी स्थापना 1970 में आचार्य श्री तुलसी की प्रेरणा से की गई थी।
Q3. यहाँ क्या अध्ययन कराया जाता है?
यहाँ Jain Darshan, Jain Culture, Meditation और Spiritual Studies का systematic अध्ययन होता है।
Q4. क्या यह एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है?
हाँ, यह भारत सरकार द्वारा Deemed University का दर्जा प्राप्त संस्थान है।
Q5. यहाँ किस प्रकार के छात्र आते हैं?
यहाँ भारत सहित अनेक देशों से विद्वान और छात्र अध्ययन व शोध के लिए आते हैं।
Q6. जैन विश्व भारती की विशेषता क्या है?
यहाँ आध्यात्म और शिक्षा का अनूठा संगम है। विशेष रूप से Preksha Dhyan इसकी पहचान है।
Q7. क्या यहाँ Research Opportunities उपलब्ध हैं?
हाँ, Jainism, Philosophy और Peace Studies में शोध के अवसर उपलब्ध हैं।
Q8. जैन विश्व भारती को “आध्यात्म तीर्थ” क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह साधना, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख केन्द्र है।
Q9. आचार्य श्री तुलसी का इसमें क्या योगदान है?
उन्होंने इस संस्था की स्थापना की और इसे जैन संस्कृति व दर्शन का केन्द्र बनाया।
Q10. क्या यहाँ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है?
हाँ, यहाँ पारंपरिक दर्शन के साथ आधुनिक Higher Education और Research Courses भी उपलब्ध हैं।
