SAMAY SUNDAR समय सुंदर, जालौर जिले के सांचोर कस्बे के जैन साधु थे। उन्होंने शास्त्रीय रागों पर अनेक गीतों की रचना की, जिनका संकलन ‘समय सुंदर रास पंचक’ और ‘समय सुंदर कृत कुसुमांजलि’ के रूप में प्रसिद्ध है।
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Toggleसमय सुंदर का परिचय
समय सुंदर जैन साधु थे।
इनकी कर्मस्थली राजस्थान के जालौर जिले का सांचोर कस्बा थी।
रचनात्मक योगदान
इन्होंने शास्त्रीय रागों पर विपुल संख्या में गीत लिखे।
इनके गीतों के बारे में कहा गया है –
“समय सुंदर रा गीतड़ा,
भीतां पर न चीतरा।”
प्रमुख कृतियाँ:
समय सुंदर रास
पंचकसमय सुंदर कृत
कुसुमांजलि
सारांश
जैन साधु समय सुंदर राजस्थान के जालौर जिले के सांचोर कस्बे से जुड़े हुए थे। इनकी रचनाएँ राजस्थान की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा मानी जाती हैं। कहा जाता है कि – “समय सुंदर रा गीतड़ा, भीतां पर न चीतरा”, अर्थात इनके गीत इतने मधुर और भावपूर्ण थे कि वे मन में गहरी छाप छोड़ते थे। समय सुंदर ने विपुल मात्रा में शास्त्रीय रागों पर आधारित गीतों की रचना की, जिससे संगीत परंपरा और भी समृद्ध हुई। उनकी प्रमुख कृतियाँ “समय सुंदर रास पंचक” और “समय सुंदर कृत कुसुमांजलि” के रूप में प्रकाशित हुईं, जो आज भी शोध और अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं। इनकी रचनाओं में आध्यात्मिकता, संगीत की गहराई और लोकजीवन का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। समय सुंदर का योगदान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि संगीत और साहित्यिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी रचनाएँ आज भी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का गौरव बढ़ाती हैं।
संक्षिप्त टेबल
पहलू |
विवरण |
| नाम | समय सुंदर |
| पहचान | जैन साधु, रचनाकार |
| कर्मस्थली | सांचोर, जालौर जिला |
| विशेषता | शास्त्रीय रागों पर गीत |
| प्रमुख कृतियाँ | समय सुंदर रास पंचक, समय सुंदर कृत कुसुमांजलि |
❓FAQs (One-word Answer)
Q1. समय सुंदर किस धर्म से जुड़े थे? – जैन
Q2. इनकी कर्मस्थली कहाँ थी? – सांचोर
Q3. इनकी प्रसिद्ध कृति? – रास पंचक
Q4. किस विधा में रचना की? – शास्त्रीय राग
Q5. गीतों का संकलन नाम? – कुसुमांजलि
