Dr. Sitaram Lalas biography, जन्म, योगदान और उपलब्धियाँ। राजस्थानी भाषा का शब्द-कोश रचयिता, पद्मश्री सम्मानित, “राजस्थानी जुबां की मशाल”।
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Early Life and Education | प्रारंभिक जीवन व शिक्षा
जन्म: 25 नवम्बर 1912, ननिहाल सिरवाड़ी ग्राम, बाड़मेर जिला।
मूल निवास: नरेवा ग्राम, जोधपुर।
शिक्षा: आठवीं तक पढ़ाई, साथ में अध्यापक की नौकरी।
बाद में मैट्रिक उत्तीर्ण।
Initial Career and Turning Point | प्रारंभिक करियर व मोड़
1. 1932 – जयपुर के साहित्यकार पुरोहित प्रताप नारायण ने डिंगल कोश भेजा।
2. लालस जी ने उसकी आलोचना की, जिस पर पुरोहितजी ने समझाया – “दिल्ली अभी दूर है।”
3. इस सीख से लालस जी ने ठाना कि राजस्थानी का संपूर्ण शब्द-कोश तैयार करेंगे।
Major Contribution | प्रमुख योगदान
राजस्थानी भाषा का सबसे बड़ा शब्द-कोश तैयार किया।
10 जिल्दों में 2 लाख से अधिक शब्द।
50 वर्षों तक निरंतर परिश्रम और साधना।
राजस्थानी भाषा का कोई भी शब्द छूट न जाए, यह संकल्प।
Recognition and Honors | मान्यता व सम्मान
✅ 1973 – राजस्थानी साहित्य अकादमी ने साहित्य मनीषी उपाधि।
✅ 1976 – जोधपुर विश्वविद्यालय से डी.लिट् (मानद्)।
✅ 1977 – भारत सरकार से पद्मश्री अलंकरण।
✅ ब्रिटेनिका एनसाइक्लोपीडिया ने कहा – “राजस्थानी जुबां की मशाल”।
Later Life and Death | अंतिम जीवन व निधन
परिवार व व्यक्तिगत सुख त्यागकर भाषा को समर्पित।
निधन: 29 दिसम्बर 1986, जोधपुर।
सारांश
डॉ. सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के महान सेवक और अद्वितीय शब्द-साधक थे। उनका जन्म 25 नवम्बर 1912 को बाड़मेर जिले के सिरवाड़ी गाँव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने शिक्षक का कार्य किया और आगे चलकर राजस्थानी भाषा के शब्द-कोश के संकलन का महान संकल्प लिया। पंडित सूर्यमल्ल मिश्रण के पुत्र द्वारा रचित डिंगल कोश की समीक्षा ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी। उन्होंने ठाना कि एक ऐसा शब्द-कोश तैयार करना है जिसमें राजस्थानी का कोई भी शब्द छूट न पाए। लगभग आधी सदी की कठिन साधना और त्याग से उन्होंने दस जिल्दों में दो लाख से अधिक शब्दों का संग्रह किया। यह कार्य इतना विशाल था कि इसे देखकर आने वाली पीढ़ियाँ भी आश्चर्य करेंगी। उन्हें “राजस्थानी जुबां की मशाल” कहा गया। भारत सरकार ने 1977 में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनका निधन 29 दिसम्बर 1986 को हुआ, परंतु उनका योगदान राजस्थानी भाषा और साहित्य को सदैव प्रकाशित करता रहेगा।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| जन्म | 25 नवम्बर 1912, सिरवाड़ी, बाड़मेर |
| रचना | राजस्थानी भाषा का शब्द-कोश (10 जिल्दें, 2 लाख शब्द) |
| उपाधियाँ | साहित्य मनीषी (1973), डी.लिट् (1976) |
| राष्ट्रीय सम्मान | पद्मश्री (1977) |
| निधन | 29 दिसम्बर 1986, जोधपुर |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. डॉ. सीताराम लालस कौन थे?
डॉ. सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के महान शब्दकोशकार और साहित्यकार थे, जिन्होंने राजस्थानी शब्द-कोश तैयार किया।
2. डॉ. सीताराम लालस का जन्म कब और कहाँ हुआ?
इनका जन्म 25 नवम्बर 1912 को बाड़मेर जिले के सिरवाड़ी ग्राम में हुआ।
3. डॉ. लालस की प्रमुख रचना कौन-सी है?
उनकी प्रमुख रचना राजस्थानी भाषा का शब्द-कोश है, जिसमें 10 जिल्दों में 2 लाख से अधिक शब्द हैं।
4. उन्हें “राजस्थानी जुबां की मशाल” क्यों कहा गया?
क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन राजस्थानी भाषा को संरक्षित और समृद्ध बनाने में समर्पित कर दिया।
5. भारत सरकार ने डॉ. लालस को कौन-सा सम्मान दिया?
भारत सरकार ने उन्हें 1977 में पद्मश्री से सम्मानित किया।
6. डॉ. लालस को शब्द-कोश बनाने की प्रेरणा किससे मिली?
जयपुर के साहित्यकार पुरोहित प्रताप नारायण से उन्हें प्रेरणा मिली, जिन्होंने उन्हें अधिक काम करने की सलाह दी।
7. डॉ. लालस ने शब्द-कोश पर कितने वर्षों तक काम किया?
उन्होंने लगभग 50 वर्षों तक निरंतर साधना और परिश्रम किया।
8. किस विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट् की मानद उपाधि दी?
1976 में जोधपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट् (मानद्) उपाधि प्रदान की।
9. डॉ. सीताराम लालस का निधन कब हुआ?
उनका निधन 29 दिसम्बर 1986 को जोधपुर में हुआ।
10. डॉ. लालस के शब्द-कोश की विशेषता क्या है?
इसकी विशेषता यह है कि इसमें राजस्थानी भाषा का कोई भी शब्द छूटा नहीं है और इसमें 2 लाख से अधिक शब्द संकलित हैं।
11. राजस्थानी साहित्य अकादमी ने उन्हें कौन-सी उपाधि दी?
अकादमी ने 1973 में उन्हें साहित्य मनीषी की उपाधि दी।
