BIHARIMAL बिहारी मल जीवन परिचय – हिंदी साहित्य के महान कवि, ‘बिहारी सतसई’ के रचयिता। जानिए उनका जन्म, भाषा शैली, दरबारी जीवन और साहित्यिक योगदान।
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1. परिचय (Introduction)
बिहारी मल हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे।
इनकी रचना बिहारी सतसई हिंदी काव्य जगत की अनुपम कृति है।
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रज।
2. जन्म एवं प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)
जन्म: संवत 1642 (1585 ई.)
स्थान: बसुवा गोविंदपुर, ग्वालियर राज्य
पिता: केशवदास
बचपन से ही कविता और साहित्य में गहरी रुचि।
3. दरबारी जीवन (Court Life)
जयपुर नरेश मिर्जा जयसिंह के दरबारी कवि बने।
साहित्यिक प्रतिभा और काव्य-कला के लिए दरबार में सम्मानित।
4. साहित्यिक योगदान (Literary Contribution)
हिंदी साहित्य में श्रृंगार रस और नीति दोहों का अनमोल योगदान।
कवि बिहारी को नीति और काव्य सौंदर्य का अद्वितीय संगम माना जाता है।
5. प्रमुख ग्रंथ – बिहारी सतसई (Bihari Satsai)
बिहारी सतसई: 713 दोहों का संग्रह।
हर दोहे में गहरी दार्शनिकता, नीति, श्रृंगार और भाव-सौंदर्य।
परंपरा के अनुसार, प्रत्येक दोहे पर राजा जयसिंह ने एक अशर्फी दी।
इसे हिंदी साहित्य का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
6. भाषा शैली (Language & Style)
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा।
अलंकारिक सौंदर्य, संक्षिप्तता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति।
विशेषता: कम शब्दों में गहन अर्थ व्यक्त करना।
7. विशेष तथ्य और योगदान (Special Facts & Achievements)
बिहारी के दोहे आज भी हिंदी साहित्य और संस्कृति में जीवित हैं।
बिहारी सतसई विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा।
काव्य में श्रृंगार रस और नीति शिक्षा का अद्वितीय संगम।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
बिहारी मल हिंदी साहित्य के अमर कवि थे। उनकी बिहारी सतसई केवल दोहों का संग्रह नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन और नीति का मार्गदर्शन है।
9. सारांश
बिहारी मल का जन्म संवत 1642 (1585 ई.) में ग्वालियर राज्य के बसुवा गोविंदपुर गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम केशवदास था। बिहारी जयपुर नरेश मिर्जा जयसिंह के दरबारी कवि रहे। हिंदी साहित्य में उनका सबसे बड़ा योगदान “बिहारी सतसई” है, जिसमें कुल 713 दोहे हैं। कहा जाता है कि राजा जयसिंह हर एक दोहे पर बिहारी को एक अशर्फी प्रदान करते थे। उनकी भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है, जो अलंकारिक सौंदर्य और संक्षिप्तता के लिए प्रसिद्ध है। बिहारी सतसई हिंदी साहित्य की उन कालजयी कृतियों में गिनी जाती है जिसमें श्रृंगार, नीति और दर्शन का अद्भुत मेल है। बिहारी के दोहे गहन अर्थ और भावों की गहराई से परिपूर्ण हैं। उनकी रचना ने हिंदी काव्य को नई ऊँचाई प्रदान की। आज भी उनके दोहे हिंदी पाठ्यक्रम और जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बिहारी मल को साहित्य में नीति और काव्य सौंदर्य का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करने वाले अमर कवि के रूप में याद किया जाता है।
10. तथ्य तालिका (Facts Table)
तथ्य |
विवरण |
| जन्म | संवत 1642 (1585 ई.), बसुवा गोविंदपुर (ग्वालियर) |
| पिता | केशवदास |
| दरबार | जयपुर नरेश मिर्जा जयसिंह |
| प्रमुख कृति | बिहारी सतसई (713 दोहे) |
| भाषा | राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा |
11. FAQs (प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1: बिहारी मल का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: बिहारी मल का जन्म संवत 1642 (1585 ई.) में ग्वालियर राज्य के बसुवा गोविंदपुर में हुआ।
प्रश्न 2: बिहारी मल के पिता का नाम क्या था?
उत्तर: उनके पिता का नाम केशवदास था।
प्रश्न 3: बिहारी मल किसके दरबारी कवि थे?
उत्तर: वे जयपुर नरेश मिर्जा जयसिंह के दरबारी कवि थे।
प्रश्न 4: बिहारी मल की प्रमुख रचना कौन-सी है?
उत्तर: उनकी प्रमुख रचना “बिहारी सतसई” है।
प्रश्न 5: बिहारी सतसई में कितने दोहे हैं?
उत्तर: इसमें कुल 713 दोहे हैं।
प्रश्न 6: बिहारी सतसई की विशेषता क्या है?
उत्तर: इसमें श्रृंगार रस, नीति और जीवन-दर्शन का अद्भुत संगम है।
प्रश्न 7: राजा जयसिंह ने बिहारी को किस प्रकार सम्मानित किया?
उत्तर: हर दोहे पर उन्होंने बिहारी को एक अशर्फी दी।
प्रश्न 8: बिहारी मल की भाषा क्या थी?
उत्तर: उनकी भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा थी।
प्रश्न 9: बिहारी के दोहे क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: उनके दोहे कम शब्दों में गहन अर्थ और अलंकारिक सौंदर्य प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 10: हिंदी साहित्य में बिहारी मल का स्थान क्या है?
उत्तर: वे नीति और श्रृंगार रस के महान कवि माने जाते हैं और अमर काव्यकार कहलाते हैं।
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