Ojhiana Bhilwara (ओझियाना, भीलवाड़ा) – आहड़ संस्कृति से सम्बद्ध ताम्रयुगीन स्थल

  • Post author:
  • Post category:sabhyata

Ojhiana Bhilwara राजस्थान का एक प्रमुख ताम्रयुगीन पुरास्थल है जो आहड़ संस्कृति से सम्बद्ध है। यहाँ 1999-2000 में खुदाई से प्राचीन मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ और ताम्र आभूषण मिले।

1. Introduction (परिचय)

ओझियाना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित एक ताम्रयुगीन पुरास्थल (Copper Age site) है।

यह स्थल आहड़ संस्कृति (Ahar Culture) से सम्बद्ध है।

इसका काल लगभग 2000 ई.पू. (Before Common Era) माना गया है।

यहाँ की खुदाई से प्राचीन कृषि एवं धातु संस्कृति के प्रमाण मिले हैं।

2. Discovery and Excavation (खोज और उत्खनन)

1. इस स्थल का पुरातात्विक उत्खनन वर्ष 1999-2000 में किया गया था।

2. खुदाई से प्राप्त अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र आहड़ सभ्यता का अंग था।

3. अन्य आहड़ स्थलों के विपरीत, ओझियाना नदी किनारे नहीं बल्कि पहाड़ी पर स्थित है।

4. उत्खनन ने इस स्थल की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को उजागर किया।

3. Location and Significance (स्थान व महत्व)

ओझियाना भीलवाड़ा जिले में स्थित है।

यह आहड़ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पहाड़ी पुरास्थल है।

इस स्थल से प्राप्त कलात्मक मूर्तियाँ और मृद्भाण्ड राजस्थान की धातु-आधारित संस्कृति के विकास को दर्शाते हैं।

यहाँ की विशेषता यह है कि यह स्थल ऊँचाई पर बसाया गया, जिससे यह संरक्षणीय व रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।

4. Main Findings (मुख्य प्राप्तियाँ)

खुदाई से प्राप्त प्रमुख वस्तुएँ —

1. वृषभ (Ojhiana Bull) और गाय की मृण्यमय मूर्तियाँ, जिन पर सफेद रंग से डिजाइन बनी है।

2. कार्नेलियन (Carnelian), फियांस (Faience) और पत्थर के मनके (Beads)।

3. शंख, ताम्र चूड़ियाँ और विभिन्न आभूषण।

4. मृद्भाण्ड (Pottery) – लाल रंग के, हाथ से बने, परिष्कृत और सजावटी।

5. भवन अवशेष – तीन सांस्कृतिक चरणों में विकसित निर्माण शैली के प्रमाण।

5. Cultural Phases (सांस्कृतिक चरण)

ओझियाना की संस्कृति को तीन विकास चरणों में बाँटा गया है –

1. प्रारंभिक चरण (Initial Phase): मिट्टी के साधारण बर्तन और प्रारंभिक निवास के संकेत।

2. मध्य चरण (Middle Phase): सजावटी मृद्भाण्ड और धातु उपयोग की शुरुआत।

3. उत्तर चरण (Final Phase): मूर्तिकला और आभूषण निर्माण में उच्च स्तर का विकास।

6. सारांश (Summary)

ओझियाना, भीलवाड़ा राजस्थान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ताम्रयुगीन स्थल है जो आहड़ संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। सन् 1999-2000 में यहाँ किए गए पुरातात्विक उत्खनन से यह स्पष्ट हुआ कि जहाँ अधिकांश आहड़ सभ्यताएँ नदी किनारे विकसित हुईं, वहीं ओझियाना एक पहाड़ी स्थल के रूप में विशिष्ट है। यहाँ से प्राप्त मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ, मनके, शंख और ताम्र आभूषण दर्शाते हैं कि यहाँ के लोग कृषि, धातु कार्य, पशुपालन और कलात्मक गतिविधियों में निपुण थे। विशेष रूप से वृषभ और गाय की मिट्टी की मूर्तियाँ इस क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक सोच को दर्शाती हैं। ओझियाना की संस्कृति को तीन चरणों में विभाजित किया गया है, जिससे इसके क्रमिक विकास का अध्ययन संभव हुआ। लगभग 2000 ईसा पूर्व में आबाद यह स्थल राजस्थान की ताम्रयुगीन सभ्यताओं में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी (important link) के रूप में जाना जाता है।

7. Facts Table (तथ्य तालिका)

तथ्य 

विवरण

स्थान   ओझियाना, जिला भीलवाड़ा, राजस्थान
सम्बद्ध संस्कृति आहड़ संस्कृति (Ahar Culture)
उत्खनन वर्ष  1999–2000
विशेषता   पहाड़ी पर स्थित ताम्रयुगीन स्थल
प्रमुख प्राप्तियाँ मृद्भाण्ड, मूर्तियाँ, मनके, शंख, ताम्र चूड़ियाँ

8. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. ओझियाना कहाँ स्थित है?

भीलवाड़ा।

2. ओझियाना किस संस्कृति से सम्बद्ध है?

आहड़ संस्कृति।

3. ओझियाना का उत्खनन कब हुआ था?

1999–2000।

4. यह स्थल नदी किनारे है या पहाड़ी पर?

पहाड़ी पर।

5. यहाँ से कौन-सी मूर्तियाँ मिली हैं?

वृषभ और गाय की मृण्यमय मूर्तियाँ।

6. यहाँ से कौन-से आभूषण मिले हैं?

ताम्र चूड़ियाँ और पत्थर के मनके।

7. ओझियाना की संस्कृति कितने चरणों में विकसित हुई?

तीन चरणों में।

8. इस स्थल का काल कब का माना जाता है?

लगभग 2000 ई.पू।

9. यहाँ के बर्तनों की क्या विशेषता थी?

लाल रंग के, सजावटी और हाथ से बने।

10. ओझियाना किस जिले में स्थित है?

भीलवाड़ा।

More Information 

Our Telegram Channel – GKFAST
राजस्थान के लोकदेवता 
राजस्थान की लोकदेवी 
संत सम्प्रदाय 
राजस्थान के दुर्ग 
राजस्थान के poet-writer
राजस्थान के Festival
दरगाह