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मांडलगढ़ दुर्ग (Mandalgarh Fort), भीलवाड़ा – History, Architecture & Facts

मांडलगढ़ दुर्ग (Mandalgarh Fort), भीलवाड़ा – History, Architecture & Facts

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मांडलगढ़ दुर्ग (Mandalgarh Fort) राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख गिरि दुर्ग है, जो अरावली पर्वतमाला की विशाल उपत्यका पर बसा है। यह किला बनास, बेड़च और मेनाल नदियों के त्रिवेणी संगम के निकट स्थित है। जानें इसका इतिहास, स्थापत्य, युद्धों और प्रमुख स्थलों की पूरी जानकारी

1. परिचय

मेवाड़ का प्रमुख गिरि दुर्ग

अरावली पर्वतमाला की उपत्यका पर स्थित

त्रिवेणी संगम – बनास, बेड़च, मेनाल नदियाँ

लंबाई लगभग 800 मीटर

कौटिल्य द्वारा बताए आदर्श दुर्ग की परिभाषा पर खरा

2. मांडलगढ़ नाम की उत्पत्ति

मण्डलाकार आकार → “मांडलगढ़” नाम

मान्यता: माण्डिया भील के नाम पर

निर्माणकर्ता: चाणना गुर्जर

दूसरी मान्यता: शाकंभरी चौहान (12वीं शताब्दी)

पुनर्निर्माण: राणा कुंभा (14वीं शताब्दी)

3. निर्माण और स्थापत्य

चौहान वंश द्वारा प्रारंभिक निर्माण

राणा कुंभा द्वारा प्राचीन अवशेषों पर पुनर्निर्माण

किले का घेराव – 800 मीटर लंबा

जलस्रोत: देवसागर, जालेसर तालाब

पातालतोड़ कुएँ – मेहता अगरचंद द्वारा

4. ऐतिहासिक घटनाएँ

1. मुग़लों के अधिकार में आगमन

2. अकबर की सेना ने किले को युद्धकेंद्र बनाया

3. 1576 ई. हल्दीघाटी युद्ध से पूर्व

कुंवर मानसिंह ने लगभग 1 माह किले में डेरा डाला

शाही सेना की तैयारी यहीं हुई

4. जगन्नाथ कछवाहा और राव खंगार – वीरगति प्राप्त (पुर-मांडल)

5. आज भी उनके स्मारक मेजा बांध के पास

5. प्रमुख भवन व स्थल

ऋषभदेव जैन मंदिर

ऊंडेश्वर महादेव मंदिर

जलेश्वर महादेव मंदिर

सैनिक आवासगृह

रूपसिंह द्वारा निर्मित महल

सागर और सागरी जलाशय

6.सारांश 

मांडलगढ़ दुर्ग (Mandalgarh Fort) राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का एक ऐतिहासिक गढ़ है, जो अपनी रणनीतिक स्थिति और स्थापत्य विशेषताओं के कारण प्रसिद्ध है। यह किला अरावली की उपत्यका में स्थित है और इसके निकट बनास, बेड़च और मेनाल नदियों का संगम होता है, जिससे यह कौटिल्य द्वारा वर्णित आदर्श दुर्ग की परिभाषा को पूरा करता है। इसका आकार मण्डलाकार है और इसी कारण इसे मांडलगढ़ कहा जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण पहले शाकंभरी के चौहानों ने कराया, बाद में राणा कुंभा ने इसे पुनः निर्मित किया। 16वीं शताब्दी में यह दुर्ग मुग़लों के हाथ में चला गया और हल्दीघाटी युद्ध से पहले यह एक प्रमुख सैनिक केंद्र रहा। आम्बेर के कुंवर मानसिंह ने यहां लगभग एक माह तक अपनी सेना को तैयार किया। किले के भीतर जैन मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, जलाशय और कुएँ आज भी इसकी भव्यता का प्रमाण हैं। मांडलगढ़ दुर्ग न केवल स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण है, बल्कि मेवाड़ और मुग़ल संघर्ष का जीवंत साक्षी भी है।

7. मुख्य तथ्य तालिका

तथ्य  विवरण
स्थान  भीलवाड़ा, राजस्थान
दुर्ग प्रकार  गिरि दुर्ग (Hill Fort)
लंबाई लगभग 800 मीटर
निर्माण   शाकंभरी चौहान, 12वीं शताब्दी
पुनर्निर्माण  राणा कुंभा, 14वीं शताब्दी

8.  FAQs

Q1. मांडलगढ़ दुर्ग कहाँ स्थित है?

मांडलगढ़ दुर्ग राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में अरावली पर्वतमाला की उपत्यका पर स्थित है।

Q2. मांडलगढ़ का नाम कैसे पड़ा?

इसका नाम इसके मण्डलाकार आकार और माण्डिया भील के नाम से जुड़ा माना जाता है।

Q3. मांडलगढ़ दुर्ग का निर्माण किसने कराया?

प्रारंभिक निर्माण शाकंभरी चौहानों ने कराया और राणा कुंभा ने 14वीं शताब्दी में पुनर्निर्माण किया।

Q4. यह दुर्ग किस युद्ध से जुड़ा है?

1576 ई. के प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध से पूर्व यह दुर्ग सैनिक तैयारी का केंद्र रहा।

Q5. अकबर की सेना ने यहाँ क्या किया?

अकबर की शाही सेना ने यहीं से राणा प्रताप के विरुद्ध अभियान चलाया।

Q6. मांडलगढ़ दुर्ग की लंबाई कितनी है?

लगभग 800 मीटर।

Q7. किले के अंदर कौन से मंदिर प्रसिद्ध हैं?

ऋषभदेव जैन मंदिर, ऊंडेश्वर महादेव और जलेश्वर महादेव मंदिर।

Q8. यहाँ कौन से जलस्रोत हैं?

देवसागर तालाब, जालेसर तालाब और पातालतोड़ कुएँ।

Q9. किसने वीरगति पाई?

जगन्नाथ कछवाहा और राव खंगार ने पुर-मांडल की रक्षा करते हुए बलिदान दिया।

Q10. यह दुर्ग किसका प्रतीक है?

यह दुर्ग मेवाड़-मुग़ल संघर्ष और मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है।

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