Siwana Fort (सिवाणा दुर्ग) राजस्थान के बाड़मेर जिले की हल्देश्वर पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन गिरि दुर्ग है। इसकी स्थापना 954 ई. में परमार वंशीय वीरनारायण ने की थी। इसे ‘कुमट दुर्ग’ और ‘अणखलों सिवाणों’ भी कहा जाता है। इस किले पर अलाउद्दीन खिलजी का 1308 ई. का आक्रमण, सातलदेव का शौर्य, राठौड़ नरेशों का शरण लेना और दो साके (1308 व अकबर काल) इतिहास को गौरवशाली बनाते हैं। आज भी यह दुर्ग कल्ला रायमलोत का थड़ा, महाराजा अजीतसिंह का दरवाजा और हल्देश्वर महादेव मंदिर जैसी धरोहरों से समृद्ध है।
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1. परिचय (Introduction)
स्थान → सिवाणा कस्बा, बाड़मेर जिला, राजस्थान
दुर्ग प्रकार → गिरि दुर्ग (Hill Fort)
पहचान → राजस्थान का सबसे प्राचीन दुर्ग
2. स्थापना व प्रारंभिक नाम (Foundation & Early Names)
स्थापना → 954 ई. में परमार वीरनारायण
प्रारंभिक नाम → कुम्थान
अन्य नाम → कुमट दुर्ग (झाड़ी “कूमट” से), अणखलों सिवाणों
3. सामरिक महत्व (Strategic Importance)
पहाड़ी मार्ग → दुर्गम व सुरक्षित
राजस्थान-मालवा सीमा पर प्रभाव
जोधपुर राठौड़ नरेशों के लिए शरणस्थली
4. अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण (1308 CE)
सातलदेव ने खिलजी का मार्ग रोका
लंबा संघर्ष व समय की बरबादी
अंततः खिलजी ने किले पर अधिकार किया
किले का नाम बदलकर खैराबाद रखा गया
5. शरण स्थली के रूप में महत्व
राव मालदेव ने गिरि सुमेल युद्ध (1544 ई.) के बाद शरण ली
चन्द्रसेन ने अकबर से युद्ध इसी दुर्ग से किया
विपत्ति काल में राठौड़ नरेशों का मुख्य आश्रय स्थल
6. शाके (Sakas in Fort)
1. प्रथम साका (1308 ई.) → सातलदेव व अलाउद्दीन खिलजी संघर्ष
2. द्वितीय साका → वीर कल्ला रायमलोत व अकबर संघर्ष
7. दर्शनीय स्थल (Attractions in Fort)
कल्ला रायमलोत का थड़ा
महाराजा अजीतसिंह का दरवाजा
कोट (Fort Complex)
हल्देश्वर महादेव मंदिर
पहाड़ी दृश्यावली
8. सारांश
Siwana Fort (सिवाणा दुर्ग) राजस्थान के बाड़मेर जिले में हल्देश्वर पहाड़ी पर स्थित एक प्राचीन गिरि दुर्ग है, जिसकी स्थापना 954 ईस्वी में परमार वंशीय वीरनारायण ने की थी। इसे ‘कुमथान’ नाम से जाना जाता था और बाद में ‘कुमट दुर्ग’ तथा ‘अणखलों सिवाणों’ कहा जाने लगा। यह दुर्ग अपनी दुर्गमता, शौर्य और ऐतिहासिक घटनाओं के लिए विशेष प्रसिद्ध है। अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण (1308 ईस्वी) और सातलदेव की वीरता ने इसे गौरव दिलाया, हालांकि अंततः खिलजी ने इसे जीतकर ‘खैराबाद’ नाम दिया। इतिहास में दो शाके इस किले से जुड़े हैं – पहला सातलदेव के संघर्ष में और दूसरा वीर कल्ला रायमलोत व अकबर के युद्ध में। मेवाड़ के राठौड़ नरेशों ने भी इसे विपत्ति काल में शरणस्थली के रूप में उपयोग किया। स्थापत्य दृष्टि से यह किला कल्ला रायमलोत का थड़ा, अजीतसिंह दरवाजा और हल्देश्वर महादेव मंदिर जैसी धरोहरों से युक्त है। यह दुर्ग राजस्थान की प्राचीनता, संस्कृति और शौर्यगाथा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

9. मुख्य तथ्य तालिका (Facts Table)
तथ्य (Fact) |
विवरण (Detail) |
| स्थान (Location) | सिवाणा, बाड़मेर जिला |
| स्थापना (Foundation) | 954 ई., वीरनारायण परमार |
| प्रारंभिक नाम (Early Name) | कुम्थान / कुमट दुर्ग |
| विजेता (Conqueror) | अलाउद्दीन खिलजी, 1308 ई. |
| विशेष स्थल (Attractions) | अजीतसिंह दरवाजा, हल्देश्वर मंदिर |
10. FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. सिवाणा दुर्ग कहाँ स्थित है?
यह राजस्थान के बाड़मेर जिले के सिवाणा कस्बे में स्थित है।
Q2. सिवाणा दुर्ग का निर्माण कब हुआ था?
954 ईस्वी में परमार वंशीय वीरनारायण ने इसका निर्माण करवाया।
Q3. सिवाणा दुर्ग का प्रारंभिक नाम क्या था?
इसका प्रारंभिक नाम कुम्थान था।
Q4. इसे ‘कुमट दुर्ग’ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यहां ‘कूमट’ नामक झाड़ी बहुतायत में मिलती थी।
Q5. अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाणा किले पर कब आक्रमण किया?
1308 ईस्वी में।
Q6. खिलजी ने किले का क्या नाम रखा?
खैराबाद।
Q7. सिवाणा दुर्ग में कितने शाके हुए?
दो – पहला सातलदेव व खिलजी संघर्ष, दूसरा कल्ला रायमलोत व अकबर युद्ध।
Q8. राठौड़ नरेशों ने इस किले का उपयोग कैसे किया?
विपत्ति काल में इसे शरणस्थली के रूप में।
Q9. सिवाणा किले में कौन-कौन से प्रमुख स्थल दर्शनीय हैं?
अजीतसिंह दरवाजा, कल्ला रायमलोत का थड़ा, हल्देश्वर महादेव मंदिर।
Q10. सिवाणा दुर्ग राजस्थान के किस प्रकार का किला है?
यह गिरि दुर्ग (Hill Fort) है।
Q11. राव मालदेव का सिवाणा से क्या संबंध था?
1544 ई. गिरि सुमेल युद्ध के बाद उन्होंने यहां शरण ली थी।
