विजयमंदिर का किला (Vijaymandir kila) राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में स्थित है। इसे यादववंशी राजा विजयपाल ने 1040 ई. में मानी पहाड़ी पर बनवाया था। यह किला हिंदू व मुस्लिम स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। जानिए इसका पूरा इतिहास, स्थापत्य और प्रमुख विशेषताएँ।
Page Contents
Toggle
1. परिचय
स्थान: बयाना, भरतपुर (राजस्थान)
निर्माता: यादववंशी राजा विजयपाल
समय: लगभग 1040 ई.
प्रकार: गिरि दुर्ग (Hill Fort)
विशेषता: हिंदू व मुस्लिम स्थापत्य कला का मिश्रण
2. किले का निर्माण और नामकरण
1040 ई. → विजयपाल ने मानी पहाड़ी पर किला बनवाया
निर्माता के नाम पर → विजयमंदिर किला
प्रारंभिक उद्देश्य → सामरिक शक्ति व राजमहल
3. ऐतिहासिक घटनाएँ (Chronology) – Paragraph Style
1046 ई. में ग़जनी के मुसलमानों ने विजयपाल को हराकर इस किले पर अधिकार कर लिया। इसके बाद यह दुर्ग लगातार सुल्तानों के अधीन रहा। इल्तुतमिश और बलबन जैसे सुल्तानों ने इसे अपने सैन्य गढ़ के रूप में इस्तेमाल किया। मुग़ल काल में भी यह महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा। हुमायूँ के शासनकाल में उसके चचेरे भाई मुहम्मद जमान मिर्ज़ा को इसी बयाना दुर्ग में क़ैद रखा गया था।
मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद अठारहवीं शताब्दी में इस किले पर जाटों का अधिकार हो गया। इस प्रकार विजयमंदिर किला विभिन्न राजवंशों और सल्तनतों के उत्थान-पतन का गवाह रहा है।
4. स्थापत्य व प्रमुख स्थल
4.1 भीमलाट
लाल पत्थर से निर्मित ऊँचा स्तंभ
चौड़ाई लगभग 26 फीट
स्थापना: विष्णुवर्धन (विक्रम संवत 428)
उद्देश्य: पुण्डरीक यज्ञ की समाप्ति पर स्मृति
4.2 ऊषा मंदिर
निर्माण: रानी चित्रलेखा (विक्रम संवत 1012)
हिंदू स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण
लाल पत्थरों का बना भव्य द्वार
इल्तुतमिश काल में मस्जिद में परिवर्तित
ऊषा की प्रतिमा खंडित
4.3 अन्य प्रमुख स्थल
राजप्रासाद → हिंदू स्थापत्य कला
लोदी मीनार → इब्राहीम लोदी काल
बारहदरी, सराय सादुल्ला → इस्लामी स्थापत्य
अकबरी छतरी और जहांगीरी दरवाजा → मुग़ल कला
5. सारांश
विजयमंदिर किला (Vijaymandir Fort) राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन गिरि दुर्ग है। इसका निर्माण 1040 ई. में यादववंशी राजा विजयपाल ने मानी पहाड़ी पर करवाया था और उसी के नाम पर यह विजयमंदिर कहलाया। 1046 ई. में गजनी के आक्रमणकारियों ने इसे जीत लिया और आगे चलकर इल्तुतमिश, बलबन जैसे सुल्तानों ने इसे अपने अधिकार में रखा। मुग़ल काल में यह किला और अधिक महत्वपूर्ण हो गया। हुमायूँ ने अपने चचेरे भाई मुहम्मद जमान मिर्जा को यहीं कैद करवाया था। बाद में जब मुग़ल शक्ति क्षीण हुई तो अठारहवीं शताब्दी में इस किले पर जाटों का अधिकार हो गया। स्थापत्य दृष्टि से यह किला हिंदू और इस्लामी कला का अद्भुत संगम है। यहाँ लाल पत्थर से बना भीमलाट, रानी चित्रलेखा द्वारा निर्मित ऊषा मंदिर, राजप्रासाद, बारहदरी, लोदी मीनार, अकबरी छतरी और जहांगीरी दरवाजा विशेष महत्व रखते हैं। यह किला न केवल युद्धों और सत्ता परिवर्तन का गवाह रहा है बल्कि कला व संस्कृति की धरोहर भी है।
6. मुख्य तथ्य तालिका
| तथ्य | विवरण |
| स्थान | बयाना, भरतपुर (राजस्थान) |
| निर्माता | यादववंशी राजा विजयपाल |
| निर्माण वर्ष | लगभग 1040 ई. |
| प्रमुख स्थल | भीमलाट, ऊषा मंदिर, लोदी मीनार |
| नियंत्रण परिवर्तन | चौहान → सुल्तान → मुग़ल → जाट |
7. FAQs
Q1. विजयमंदिर किला कहाँ स्थित है?
विजयमंदिर किला राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में स्थित है।
Q2. विजयमंदिर किले का निर्माण किसने करवाया?
इस किले का निर्माण यादववंशी राजा विजयपाल ने 1040 ई. में करवाया था।
Q3. विजयमंदिर किले का नाम कैसे पड़ा?
यह नाम इसके निर्माता विजयपाल के नाम पर पड़ा।
Q4. विजयमंदिर किले पर पहला मुस्लिम आक्रमण कब हुआ?
1046 ई. में गजनी के मुसलमानों ने विजयपाल को हराकर इस पर अधिकार कर लिया।
Q5. हुमायूँ से जुड़ी कौन सी घटना इस किले में हुई?
हुमायूँ ने अपने चचेरे भाई मुहम्मद जमान मिर्जा को यहीं कैद रखा।
Q6. भीमलाट स्तंभ की विशेषता क्या है?
यह लाल पत्थर का बना ऊँचा स्तंभ है, जिसे विक्रम संवत 428 में विष्णुवर्धन ने स्थापित कराया।
Q7. ऊषा मंदिर किसने बनवाया था?
रानी चित्रलेखा ने विक्रम संवत 1012 में ऊषा मंदिर बनवाया था।
Q8. ऊषा मंदिर का क्या हुआ?
इल्तुतमिश के शासनकाल में इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया और प्रतिमा खंडित कर दी गई।
Q9. इस किले में मुस्लिम स्थापत्य के कौन से उदाहरण मिलते हैं?
लोदी मीनार, बारहदरी, सराय सादुल्ला, अकबरी छतरी और जहांगीरी दरवाजा।
Q10. जाटों ने विजयमंदिर किले पर कब अधिकार किया?
18वीं शताब्दी में मुग़ल साम्राज्य कमजोर होने पर जाटों ने इस किले पर अधिकार कर लिया।
More Imformative Clicks |
| Our Telegram Channal – GKFAST |
| मांडलगढ़ दुर्ग (Mandalgarh Fort), भीलवाड़ा |
| राजस्थान के लोकदेवता |
| राजस्थान की लोकदेवी |
| संत सम्प्रदाय |
