Lohagarh Fort Bharatpur या लोहागढ़ दुर्ग राजस्थान का विश्वविख्यात earth fort (Bhumi Durg) है। 1733 ई. में जाट राजा सूरजमल ने इसका निर्माण करवाया। यह दुर्ग अपनी मजबूत मिट्टी की प्राचीर, गहरी खाई और अजेय किलेबंदी के लिए जाना जाता है, जहाँ अहमदशाह अब्दाली और ब्रिटिश सेनाएँ भी असफल रही थीं।
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परिचय (Introduction)
स्थान: भरतपुर, राजस्थान
श्रेणी: पारिख दुर्ग (Parikh Durg) एवं भूमि दुर्ग (Earth Fort)
निर्माता: महाराजा सूरजमल (1733 ई.)
विशेषता: दुर्ग कभी शत्रु द्वारा पराजित नहीं हुआ (Invincible Fort)
निर्माण व इतिहास (History & Construction)
नींव: 1733 ई., खेमकरण जाट की कच्ची गढ़ी “चौबुर्जा” पर रखी गई।
निर्माण समय: लगभग 8 वर्ष
शासक: महाराजा सूरजमल, आगे जसवंतसिंह (1853–93 ई.) तक विस्तार कार्य।
उद्देश्य: आक्रमणकारियों से रक्षा व जाट शक्ति का केंद्र।
स्थापत्य विशेषताएँ (Architectural Features)
दुर्ग पत्थर की प्राचीर से घिरा।
बाहरी सुरक्षा: 100 फुट चौड़ी और 60 फुट गहरी खाई।
दोहरी प्राचीर (Double Fortification)।
पानी की आपूर्ति: सुजान गंगा नहर से मोती झील के माध्यम से।
महल: कमरा खास महल (राजसी दरबार हेतु)।
प्रमुख बुर्ज व द्वार (Important Bastions & Gates)
जवाहर बुर्ज – महाराजा जवाहरसिंह की दिल्ली विजय स्मृति।
फतेह बुर्ज – अंग्रेजों पर विजय (1806 ई.)।
अन्य बुर्ज: सिनसिनी बुर्ज, गोकला बुर्ज, कालिका बुर्ज, बागरवाली बुर्ज, नवलसिंह बुर्ज।
गोपालगढ़ द्वार – अष्टधातु का दरवाजा (लाल किले से लाया गया)।
लोहिया दरवाजा – दक्षिण दिशा का प्रवेश द्वार।
ऐतिहासिक युद्ध व घटनाएँ (Historical Battles & Events)
अहमदशाह अब्दाली और जनरल लेक भी किला नहीं जीत सके।
1805 ई.: अंग्रेज सेनापति लेक ने 5 बार आक्रमण किया, पर असफल रहे।
अंग्रेजी गोले मिट्टी की प्राचीर में धँस जाते थे।
17 मार्च 1948: मत्स्य संघ का उद्घाटन समारोह।
स्वतंत्रता के बाद: दुर्ग में सरकारी कार्यालय स्थापित।
सारांश (Summary)
लोहागढ़ दुर्ग, भरतपुर राजस्थान का अनुपम भूमि दुर्ग है। इसका निर्माण 1733 ई. में जाट राजा सूरजमल ने किया था। दुर्ग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूत दोहरी प्राचीर और गहरी चौड़ी खाई है, जिसने इसे विश्व का सबसे अजेय किला बना दिया। यह दुर्ग न केवल स्थापत्य दृष्टि से अद्वितीय है, बल्कि अपनी ऐतिहासिक घटनाओं और युद्धों के लिए भी प्रसिद्ध है।
इस किले पर अहमदशाह अब्दाली और ब्रिटिश सेना तक विजय प्राप्त नहीं कर सकी। 1805 ई. में अंग्रेजों द्वारा पाँच बार घेराबंदी करने पर भी यह दुर्ग अडिग खड़ा रहा। यहाँ बने जवाहर बुर्ज और फतेह बुर्ज, जाट शासकों की वीरता और विजय के प्रतीक हैं। गोपालगढ़ द्वार पर लगा अष्टधातु का दरवाजा इसकी भव्यता को और भी बढ़ा देता है।
स्वतंत्रता आंदोलन और मत्स्य संघ के उद्घाटन समारोह तक, यह दुर्ग ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा। आज यह राजस्थान का प्रमुख tourist destination और जाट गौरव का प्रतीक है।

तथ्य तालिका (Table of Facts)
तथ्य (Fact) |
विवरण (Detail) |
| स्थान (Location) | भरतपुर, राजस्थान |
| निर्माण वर्ष (Year) | 1733 ई. |
| निर्माता (Builder) | महाराजा सूरजमल |
| दुर्ग प्रकार (Type) | पारिख दुर्ग व भूमि दुर्ग (Earth Fort) |
| प्रमुख बुर्ज (Bastions) | जवाहर बुर्ज, फतेह बुर्ज आदि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. लोहागढ़ दुर्ग कहाँ स्थित है?
Ans: यह राजस्थान के भरतपुर शहर में स्थित है।
Q2. लोहागढ़ दुर्ग किसने बनवाया था?
Ans: इसका निर्माण जाट राजा सूरजमल ने 1733 ई. में करवाया था।
Q3. लोहागढ़ दुर्ग किस प्रकार का किला है?
Ans: यह पारिख दुर्ग (Parikh Durg) और भूमि दुर्ग (Earth Fort) है।
Q4. लोहागढ़ दुर्ग की मुख्य विशेषता क्या है?
Ans: इसकी दोहरी प्राचीर और गहरी खाई, जिसने इसे अजेय बना दिया।
Q5. लोहागढ़ दुर्ग पर किसने आक्रमण किया?
Ans: अहमदशाह अब्दाली और अंग्रेज सेनापति जनरल लेक ने, पर असफल रहे।
Q6. अष्टधातु का दरवाजा कहाँ से लाया गया था?
Ans: दिल्ली के लाल किले से, जिसे महाराजा जवाहरसिंह लाए थे।
Q7. लोहागढ़ दुर्ग पर अंग्रेजों का सबसे बड़ा हमला कब हुआ?
Ans: 1805 ई. में, लेकिन असफल रहा।
Q8. फतेह बुर्ज किसके प्रतीक के रूप में बना?
Ans: अंग्रेजों पर विजय के प्रतीक के रूप में (1806 ई.)।
Q9. जवाहर बुर्ज क्यों प्रसिद्ध है?
Ans: महाराजा जवाहरसिंह की दिल्ली विजय के स्मारक रूप में।
Q10. स्वतंत्रता के बाद लोहागढ़ दुर्ग का उपयोग किसलिए हुआ?
Ans: यहाँ कई सरकारी कार्यालय स्थापित किए गए।
