रणथम्भौर दुर्ग (Ranthambhore Fort) राजस्थान का प्रसिद्ध गिरि एवं वन दुर्ग है, जिसका निर्माण चौहान शासकों ने किया। जानें इसका इतिहास, स्थापत्य कला, प्रमुख स्थल और FAQs।
Page Contents
Toggleरणथम्भौर दुर्ग: परिचय
- स्थान: सवाई माधोपुर, राजस्थान
- दुर्ग का प्रकार: गिरि दुर्ग एवं वन दुर्ग
- निर्माण काल: 8वीं शताब्दी
- निर्माता: चौहान शासक, परंपरा अनुसार रणथान देव चौहान
- विशेषता: सात पहाड़ियों से घिरा, प्राकृतिक सुरक्षा
इतिहास (History)
- 8वीं शताब्दी – निर्माण की शुरुआत
- रणथान देव चौहान से जुड़ी परंपरा
- चौहान शासकों का प्रमुख गढ़
- राणा हम्मीर देव चौहान का शौर्यगाथा स्थल
- 1301 ई. – अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध, हम्मीर देव का बलिदान
स्थापत्य एवं संरचना (Architecture & Structure)
प्रवेश द्वार
- नौलखा दरवाजा
- हाथी पोल
- गणेश पोल
- सूरज पोल
- त्रिपोलिया (अंधेरी दरवाजा)
प्रमुख स्थल
- हम्मीर महल
- रानी महल
- हम्मीर की कचहरी
- सुपारी महल
- बादल महल
- जौरां-भौरां
- 32 खंभों की छतरी
धार्मिक स्थल
- गणेश मंदिर (प्रसिद्ध)
- लक्ष्मी नारायण मंदिर
- जैन मंदिर
- पीर सदरुद्दीन की दरगाह
जल स्रोत
- पद्मला तालाब
- रनिहाड़ तालाब
- अन्य जलाशय
अबुल फजल का उल्लेख
- “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।”
- खाइयां और नाले सुरक्षा के साधन
- नाले – चम्बल और बनास नदियों से जुड़े
सारांश (150+ words)
रणथम्भौर दुर्ग (Ranthambhore Fort) राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित एक विशाल गिरि एवं वन दुर्ग है, जो भारत के प्राचीन दुर्गों में अपनी विशिष्टता रखता है। यह दुर्ग सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इसकी प्राकृतिक संरचना इसे सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य बनाती है। इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में चौहान शासकों ने किया, किंतु लोक परंपरा इसे रणथान देव चौहान से जोड़ती है। इतिहास में यह दुर्ग चौहानों के साहस और शौर्य का गवाह रहा है, विशेषकर राणा हम्मीर देव चौहान का बलिदान, जिन्होंने 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध युद्ध करते हुए अपने शरणागत धर्म की रक्षा की। इस दुर्ग में नौलखा दरवाजा, हाथी पोल, गणेश पोल और सूरज पोल जैसे विशाल प्रवेश द्वार, हम्मीर महल, रानी महल, बादल महल तथा 32 खंभों की छतरियां स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। यहाँ स्थित गणेश मंदिर भारतवर्ष में विख्यात है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था का संगम होने के कारण रणथम्भौर दुर्ग आज भी पर्यटकों और इतिहासकारों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
रणथम्भौर दुर्ग: तथ्य सारणी (Facts Table)
| तथ्य | विवरण |
| स्थान | सवाई माधोपुर, राजस्थान |
| प्रकार | गिरि दुर्ग एवं वन दुर्ग |
| निर्माण काल | 8वीं शताब्दी |
| निर्माता | चौहान शासक (रणथान देव) |
| विशेष आकर्षण | गणेश मंदिर, हम्मीर महल, पद्मला तालाब |
FAQs (10+)
Q1. रणथम्भौर दुर्ग कहाँ स्थित है?
A1. रणथम्भौर दुर्ग राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित है।
Q2. रणथम्भौर दुर्ग किस प्रकार का दुर्ग है?
A2. यह गिरि एवं वन दुर्ग है, जो पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है।
Q3. रणथम्भौर दुर्ग का निर्माण कब और किसने किया था?
A3. इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में चौहान शासकों ने करवाया था।
Q4. रणथम्भौर दुर्ग से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटना कौन सी है?
A4. 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी और हम्मीर देव चौहान के बीच युद्ध, जिसमें हम्मीर देव ने बलिदान दिया।
Q5. अबुल फजल ने रणथम्भौर दुर्ग के बारे में क्या लिखा?
A5. उन्होंने लिखा कि “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।”
Q6. रणथम्भौर दुर्ग के प्रमुख प्रवेश द्वार कौन से हैं?
A6. नौलखा दरवाजा, हाथी पोल, गणेश पोल, सूरज पोल और त्रिपोलिया।
Q7. रणथम्भौर दुर्ग में कौन-कौन से धार्मिक स्थल हैं?
A7. गणेश मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, जैन मंदिर और पीर सदरुद्दीन की दरगाह।
Q8. रणथम्भौर दुर्ग के अंदर कौन-कौन से महल प्रसिद्ध हैं?
A8. हम्मीर महल, रानी महल, बादल महल और सुपारी महल।
Q9. रणथम्भौर दुर्ग की जल व्यवस्था कैसे थी?
A9. यहाँ पद्मला तालाब, रनिहाड़ तालाब और अन्य जलाशय बनाए गए थे।
Q10. रणथम्भौर दुर्ग क्यों प्रसिद्ध है?
A10. यह अपनी स्थापत्य कला, धार्मिक महत्व और राणा हम्मीर देव की शौर्यगाथा के लिए प्रसिद्ध है।
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