Lawan Fort लवाण का गढ़ राजस्थान का एक प्राचीन Fort (दुर्ग) है, जिसका निर्माण मीणा शासकों ने किया और बाद में आम्बेर के राजा भारमल ने मुगल बादशाह अकबर की सहायता से इस पर अधिकार किया। इस किले को बांके राजा भगवन्तदास और उनके वंशजों (बांकावत) से भी जोड़ा जाता है। किला स्थापत्य, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
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परिचय
राजस्थान का इतिहास अपने किलों (Forts) और गढ़ों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक है लवाण का गढ़ (Lawan Fort), जो राजनीतिक संघर्ष, सामरिक महत्व और स्थापत्य की दृष्टि से अद्वितीय है।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मीणा शासकों द्वारा निर्माण
प्राचीन काल में मीणा rulers ने इस गढ़ का निर्माण करवाया।
यह उनकी शक्ति और सामरिक क्षमता का प्रतीक था।
आम्बेर शासकों का अधिकार
आम्बर (Amber) के राजा भारमल ने Mughal Emperor Akbar की सहायता से नहान/नई के प्रसिद्ध मीणा राज्य को पराजित किया।
इसके बाद उन्होंने लवाण Fort पर अधिकार कर लिया।
बांके राजा और बांकावत वंश
राजा भारमल के कनिष्ठ पुत्र भगवन्तदास को लवाण की गद्दी मिली।
अकबर उन्हें “बांके राजा (Banke Raja)” कहकर पुकारते थे।
उनके वंशज आगे चलकर “बांकावत (Bankawat)” कहलाए।
स्थापत्य महत्व
विशाल (Massive) और प्राचीन संरचना।
मजबूत दीवारें और कई प्रवेश द्वार (Gateways)।
सामरिक दृष्टि से सुरक्षित स्थान।
कर्नल टॉड का उल्लेख
कर्नल टॉड ने इस किले के बारे में लिखा –
“बावन कोट, छप्पन दरवाजा,
मीणा मर्द नहान का राजा।”
सारांश
लवाण का गढ़ राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। इसका निर्माण सबसे पहले मीणा rulers ने करवाया, जिन्होंने इसे शक्ति और सामरिक महत्व का केंद्र बनाया। बाद में आम्बेर के राजा भारमल ने अकबर की सहायता से नहान राज्य के मीणा शासकों को पराजित किया और इस गढ़ पर अपना अधिकार जमाया। इसके पश्चात राजा भारमल के पुत्र भगवन्तदास को यहां का शासक बनाया गया। अकबर उन्हें बांके राजा कहा करते थे, और यही कारण है कि उनके वंशज बांकावत के नाम से प्रसिद्ध हुए।
स्थापत्य की दृष्टि से यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी विशाल संरचना, मजबूत परकोटे और कई दरवाजे इस बात का प्रमाण हैं कि यह न केवल एक Military Fort था, बल्कि राजनीति और संस्कृति का भी केंद्र था। कर्नल टॉड ने भी अपने लेखों में इस गढ़ की भव्यता का उल्लेख किया है। आज यह किला भले ही आंशिक रूप से खंडहर में है, लेकिन यह राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर और वीरता का अमिट प्रतीक बना हुआ है |

मुख्य तथ्य तालिका
तथ्य |
विवरण |
| स्थान | लवाण, बाँसखों के पास, राजस्थान |
| निर्माणकर्ता | मीणा शासक |
| विकासकर्ता | कछवाहा शासक (Amber rulers) |
| कब्ज़ा किया | राजा भारमल ने अकबर की सहायता से |
| प्रसिद्ध शासक | बांके राजा भगवन्तदास |
प्रश्नोत्तर (FAQs)
Q1. लवाण का गढ़ कहाँ स्थित है?
लवाण का गढ़ बाँसखों से लगभग 6-7 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।
Q2. लवाण Fort का निर्माण किसने करवाया?
इस किले का निर्माण सबसे पहले मीणा rulers द्वारा करवाया गया था।
Q3. लवाण का गढ़ किस शासक ने जीता था?
आम्बर के राजा भारमल ने मुगल सम्राट अकबर की सहायता से इसे जीता था।
Q4. बांके राजा कौन थे?
राजा भारमल के पुत्र भगवन्तदास को अकबर “बांके राजा” कहा करते थे।
Q5. बांकावत किसे कहा जाता है?
बांके राजा भगवन्तदास के वंशज बांकावत कहलाते थे।
Q6. इस किले की स्थापत्य विशेषता क्या है?
यह विशाल, प्राचीन और मजबूत परकोटे वाला किला है, जिसमें कई द्वार हैं।
Q7. कर्नल टॉड ने इस किले का क्या उल्लेख किया है?
उन्होंने लिखा – “बावन कोट, छप्पन दरवाजा, मीणा मर्द नहान का राजा।”
Q8. क्या लवाण का गढ़ आज भी मौजूद है?
हाँ, यह आज भी मौजूद है, हालांकि आंशिक रूप से खंडहर में है।
Q9. इस किले का महत्व किस दृष्टि से है?
यह सामरिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
Q10. क्या लवाण का गढ़ पर्यटन स्थल है?
हाँ, यह किला राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पर्यटकों को आकर्षित करता है।
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