Gilund Civilization, Rajsamand | गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद – राजस्थान की प्राचीन संस्कृति का केंद्र

Gilund Civilization, Rajsamand गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद राजस्थान की प्राचीन आहड़ संस्कृति से जुड़ा पुरास्थल है, जहाँ से पक्की ईंटों के साक्ष्य, मिट्टी की पशु आकृतियाँ और चित्रित पात्रों पर नृत्य मुद्राएँ मिली हैं।


1. Introduction (परिचय)

गिलूण्ड राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है।

इसका उत्खनन सन् 1957-58 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् प्रो. बी. बी. लाल ने किया था।

यह स्थल आहड़ सभ्यता से समानता रखता है और इसे राजस्थान की ताम्रपाषाण संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

2. Excavation and Discovery (उत्खनन और खोज)

1. उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किया गया था।

2. यहाँ पक्की ईंटों के प्रयोग के साक्ष्य प्राप्त हुए — जो आहड़ से अधिक विकसित निर्माण तकनीक दर्शाते हैं।

3. स्थल पर दो प्रमुख सांस्कृतिक स्तर (Cultural Layers) मिले —

प्रथम स्तर: ताम्रपाषाण कालीन संस्कृति

द्वितीय स्तर: लौह युग की ओर संक्रमण

3. Major Findings (प्रमुख खोजें)

 मिट्टी की पशु आकृतियाँ (Terracotta Animal Figurines)

 क्रीम रंग पर काले रंग से चित्रित पात्र, जिन पर नृत्य मुद्राएँ व हरिण चित्र अंकित हैं।

 सिलेटी रंग की तश्तरियाँ व कटोरे, जो उच्च शिल्प कौशल का प्रतीक हैं।

 पक्की ईंटों का उपयोग — जो आहड़ सभ्यता की तुलना में अधिक उन्नत निर्माण शैली को दर्शाता है।

4. Cultural Significance (सांस्कृतिक महत्व)

गिलूण्ड सभ्यता राजस्थान की ताम्रपाषाण संस्कृति और आहड़ सभ्यता के बीच का संक्रमण स्थल मानी जाती है।

यहाँ की कला में नृत्य मुद्रा वाले मानव चित्र और पशु आकृतियाँ जीवन शैली और धार्मिक मान्यताओं की झलक प्रस्तुत करती हैं।

यह सभ्यता राजस्थान में शहरीकरण की प्रारंभिक झलक प्रदान करती है।

5. सारांश (Summary)

गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद राजस्थान की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, जो आहड़ संस्कृति की परंपरा को आगे बढ़ाती है। सन् 1957-58 में प्रो. बी.बी. लाल द्वारा किए गए उत्खनन से इस क्षेत्र में पक्की ईंटों के प्रयोग, मिट्टी की आकृतियों और चित्रित मृद्भाण्डों के साक्ष्य मिले। इन पात्रों पर नृत्य मुद्राओं और हरिणों के सुंदर चित्र अंकित हैं, जो उस युग की कलात्मक उन्नति का प्रमाण हैं। इस स्थल से यह भी स्पष्ट होता है कि यहाँ के लोग न केवल कृषि और पशुपालन में दक्ष थे, बल्कि उनके जीवन में कला, संस्कृति और धर्म का भी विशेष स्थान था। गिलूण्ड सभ्यता राजस्थान की ताम्रपाषाण और लौह युगीन संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य करती है और यह बताती है कि राजस्थान में प्राचीन काल में भी उन्नत सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन मौजूद था।

6. Facts Table (तथ्य तालिका)

तथ्य

 विवरण

खोज का वर्ष  1957–58
उत्खननकर्ता  प्रो. बी. बी. लाल
 स्थान  राजसमंद, राजस्थान
 प्रमुख खोजें पक्की ईंटें, नृत्य मुद्राएँ, पशु आकृतियाँ
सभ्यता काल लगभग 1000 ईसा पूर्व

7. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – Hindi One Word Answers)

1. गिलूण्ड कहाँ स्थित है? — राजसमंद

2. गिलूण्ड का उत्खनन कब हुआ? — 1957-58

3. उत्खनन किसने किया? — प्रो. बी. बी. लाल

4. गिलूण्ड किस सभ्यता से संबंधित है? — आहड़ सभ्यता

5. यहाँ कौन-सी ईंटें मिलीं? — पक्की ईंटें

6. प्रमुख खोज क्या थी? — नृत्य मुद्रा वाले पात्र

7. यहाँ कितने सांस्कृतिक स्तर मिले? — दो

8. कौन-से पात्र प्रमुख हैं? — सिलेटी तश्तरियाँ, कटोरे

9. किस काल की सभ्यता है? — ताम्रपाषाण काल

10. मिट्टी की आकृतियाँ क्या दर्शाती हैं? — कला और संस्कृति


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