Kumbhalgarh Fort Rajasthan का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण किला है, जिसे महाराणा कुंभा ने 1448 ई. में बनवाया था। यह भारत की महान दीवार (Great Wall of India) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसकी लंबाई 36 किलोमीटर है और यह मेवाड़-मारवाड़ की सीमा पर स्थित है।
Page Contents
Toggleपरिचय
स्थान: राजसमंद, राजस्थान
प्रकार: गिरि दुर्ग (Hill Fort)
निर्माण: महाराणा कुम्भा (1448–1458 ई.)
दूसरा सबसे महत्वपूर्ण किला (चित्तौड़गढ़ के बाद)
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति – 36 किमी लंबी दीवार
निर्माण एवं स्थापत्य
निर्माता एवं शिल्पी
निर्माण प्रारंभ: 1448 ई.
समाप्ति: 1458 ई.
प्रमुख शिल्पी: मण्डन
प्राचीन नाम: कुंभलमेर / कुंभलमेरु
सुरक्षा व्यवस्था
अरावली की 13 ऊँची चोटियाँ किले को घेरती हैं
9 प्रवेश द्वार (Pols)
दीवार की चौड़ाई: 8 घुड़सवार साथ चल सकें
समुद्रतल से ऊँचाई: 3,568 फीट
36 किमी लंबा परकोटा (World Record)
सामरिक महत्व
मेवाड़-मारवाड़ की सीमा पर स्थित
युद्धकालीन शरणस्थली
संकटकाल में मेवाड़ के राजपरिवार का आश्रय
दुर्गम घाटियाँ और घने वन सुरक्षा प्रदान करते थे
सम्प्रति और प्राचीनता
मान्यता: तीसरी शताब्दी ईसा में जैन राजा सम्प्रति ने मूल किला बनवाया
मंदिरों के अवशेष इसकी प्राचीनता प्रमाणित करते हैं
वेदी – दो मंजिला भवन, यज्ञ एवं दर्शकों के बैठने की व्यवस्था
स्मारक एवं मंदिर
लगभग 960 मंदिर
कुम्भस्वामी विष्णु मंदिर
झालीबाव बावड़ी
मामादेव तालाब
उड़ना राजकुमार की छतरी (पृथ्वीराज राठौड़)
बादल महल (Palace of Cloud) – महाराणा प्रताप का जन्म स्थल
ऐतिहासिक घटनाएँ
पन्ना
पन्ना धाय का बलिदान (1535 ई.)
गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण और मेवाड़ में संकट के समय, महाराणा सांगा के पुत्र उदयसिंह (जो बाद में महाराणा उदयसिंह द्वितीय कहलाए) का जीवन संकट में था। राजपरिवार की धाय माता पन्ना धाय ने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान देकर शत्रुओं से उदयसिंह की रक्षा की। उसने उदयसिंह को सुरक्षित रूप से कुम्भलगढ़ दुर्ग पहुँचा दिया। यही घटना मेवाड़ के इतिहास में त्याग और निष्ठा का अमर उदाहरण बन गई।
इसी कुम्भलगढ़ दुर्ग में:
उदयसिंह का राज्याभिषेक हुआ।
महान वीर महाराणा प्रताप का जन्म हुआ।
यह दुर्ग लंबे समय तक मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी बना रहा।
प्रमुख द्वार (9 Pols)
1. करक ओरठ पोल
2. हल्ला पोल
3. हनुमान पोल
4. विजय पोल
5. भैख पोल
6. नींबू पोल
7. चौगान पोल
8. पागड़ा पोल
9. गणेश पोल
किले के रास्ते (Daras / Passes)
उत्तर दिशा: टूटया का होड़ा
पूर्व दिशा: दाणीवटा (हाथिया गुढ़ा की नाल)
पश्चिम दिशा: टीडाबारी
सारांश
Kumbhalgarh Fort, built by Maharana Kumbha in 1448 CE, stands as one of the strongest hill forts of Rajasthan after Chittorgarh. Known as the Great Wall of India, its 36 km long fortification is the second largest continuous wall in the world after the Great Wall of China. Surrounded by dense forests, deep valleys, and 13 mountain peaks of the Aravalli range, it served as a crucial military stronghold and a safe haven for the Mewar dynasty during times of crisis. The fort contains over 960 temples, palaces like the Badal Mahal (birthplace of Maharana Pratap), sacred ponds, stepwells, and memorials. Legends connect its foundation to the Jain ruler Samprati in the 3rd century BCE, though it was completed in its current form by Maharana Kumbha with the architectural guidance of Mandan. Historically, it is remembered for Panna Dhai’s sacrifice to save Udai Singh, marking it as a fort of loyalty, bravery, and sacrifice. With its architectural grandeur, historical depth, and cultural heritage, Kumbhalgarh Fort truly epitomizes the glory of Rajputana.
Facts Table
| तथ्य | विवरण |
| निर्माण | वर्ष 1448–1458 ई. |
| निर्माता | महाराणा कुम्भा |
| ऊँचाई | 3,568 फीट समुद्रतल से |
| दीवार की लंबाई | 36 किलोमीटर |
| प्रसिद्धि | भारत की महान दीवार |
FAQs
Q1. कुम्भलगढ़ दुर्ग कहाँ स्थित है?
Ans: यह राजस्थान के राजसमंद जिले में, सादड़ी गाँव के पास स्थित है।
Q2. कुम्भलगढ़ दुर्ग का निर्माण किसने करवाया?
Ans: महाराणा कुंभा ने 1448–1458 ई. के बीच करवाया।
Q3. कुम्भलगढ़ को ‘भारत की महान दीवार’ क्यों कहा जाता है?
Ans: क्योंकि इसकी परकोटे की लंबाई 36 किलोमीटर है, जो विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार है।
Q4. कुम्भलगढ़ दुर्ग किस शैली का उदाहरण है?
Ans: यह गिरि दुर्ग (Hill Fort) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Q5. कुम्भलगढ़ दुर्ग में कितने मंदिर हैं?
Ans: लगभग 960 मंदिर, जिनमें जैन और हिन्दू मंदिर शामिल हैं।
Q6. बादल महल किसके लिए प्रसिद्ध है?
Ans: यह महाराणा प्रताप का जन्म स्थल है।
Q7. कुम्भलगढ़ दुर्ग का शिल्पकार कौन था?
Ans: प्रमुख शिल्पी मण्डन थे।
Q8. कुम्भलगढ़ किस कारण से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी बनी?
Ans: इसकी दुर्गमता, घने वन और पहाड़ियों से सुरक्षा के कारण।
Q9. पन्ना धाय की क्या भूमिका रही?
Ans: पन्ना धाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर महाराणा उदयसिंह की रक्षा की।
Q10. कुम्भलगढ़ को और किन नामों से जाना जाता है?
Ans: इसे कुंभलमेर और कुंभलमेरु भी कहते हैं।
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