BHATNER DURG भटनेर दुर्ग हनुमानगढ़ का ऐतिहासिक धान्वन दुर्ग है, जिसका निर्माण 295 ई. में भाटी राजा भूपत ने किया था। 52 बुर्जों वाला यह किला सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा और महमूद गजनवी, तैमूर, अकबर सहित कई आक्रमण झेल चुका है।
Page Contents
Toggle1. भटनेर दुर्ग का परिचय
स्थान: हनुमानगढ़, राजस्थान
निर्माण: 295 ईस्वी, भाटी राजा भूपत
प्रकार: धान्वन दुर्ग (Marusthal Fort)
विशेषता: 52 बुर्ज, पकी हुई ईंटों और चूने से निर्मित
नदी: घग्घर नदी के किनारे
2. निर्माण और स्थापत्य
निर्मित: राजा भूपत (श्री कृष्ण की 90वीं पीढ़ी)
सामग्री: ईंट व चूना
संरचना: विशाल बुर्जों से युक्त
संख्या: 52 बुर्ज
सुरक्षा: रेगिस्तान व नदी से घिरा
3. सामरिक महत्व
दिल्ली-मुल्तान मार्ग पर स्थिति
व्यापार मार्ग का केंद्र
सेनाओं का पड़ाव स्थल
उत्तर भारत से मध्य एशिया जोड़ने वाला मार्ग
4. प्रमुख आक्रमण और ऐतिहासिक घटनाएँ
1. 1001 ई. – महमूद गजनवी ने अधिकार किया
2. 1266-87 ई. – बलबन के समय शेरखाँ ने मंगोल आक्रमण रोके
3. 1398 ई. – तैमूर ने हमला किया, दुर्ग की प्रशंसा की
4. 1527 ई. – बीकानेर के राव जैतसिंह ने अधिकार किया
5. 1570 ई. – अकबर ने अधिकार कर बाघा को सौंपा
6. 1574-1612 ई. – रायसिंह और दलपतसिंह के अधीन
7. 1805 ई. – सूरतसिंह ने मंगलवार को अधिकार किया, नाम हनुमानगढ़ पड़ा
5. बीकानेर राज्य और नाम परिवर्तन
महाराजा सूरतसिंह ने अधिकार किया
मंगलवार के दिन विजय → नाम पड़ा हनुमानगढ़
बीकानेर रियासत का हिस्सा बना
6. दर्शनीय स्थल
विशाल प्राचीर व बुर्ज
नदी किनारे का सामरिक दृश्य
व्यापारिक मार्ग अवशेष
ऐतिहासिक तोपखाना व द्वार
7. निष्कर्ष
भटनेर दुर्ग केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। इसकी सामरिक स्थिति, स्थापत्य कला और वीरता की कहानियाँ इसे अनूठा बनाती हैं।
सारांश
भटनेर दुर्ग, जिसे आज हनुमानगढ़ किला कहा जाता है, राजस्थान का एक प्राचीन और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण धान्वन दुर्ग है। इसका निर्माण 295 ईस्वी में भाटी राजा भूपत द्वारा कराया गया था और इसका नाम उनके पिता की स्मृति में रखा गया। घग्घर नदी के तट पर स्थित इस किले में कुल 52 बुर्ज हैं और यह पकी हुई ईंटों व चूने से निर्मित है। दिल्ली-मुल्तान मार्ग पर होने के कारण यह दुर्ग व्यापार और सेना दोनों के लिए अहम रहा।
इतिहास में यह दुर्ग कई बार आक्रमणों का केंद्र रहा। 1001 ई. में महमूद गजनवी ने इसे जीता, बलबन के शासनकाल में शेरखाँ ने मंगोल आक्रमण रोके, 1398 ई. में तैमूर ने इसे लूटा और अपनी आत्मकथा में इसकी मजबूती की प्रशंसा की। आगे चलकर राठौड़ों, मुगलों और बीकानेर के राजाओं के अधीन यह दुर्ग आया। 1805 ई. में महाराजा सूरतसिंह ने मंगलवार को इस पर अधिकार कर नाम बदलकर हनुमानगढ़ रख दिया। आज यह दुर्ग राजस्थान के गौरव और वीरता का प्रतीक है, जहाँ पर्यटक इसकी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक गाथाओं का साक्षात्कार करते हैं।
Facts Table
| तथ्य | विवरण |
| निर्माण | 295 ईस्वी |
| निर्माता | भाटी राजा भूपत |
| प्रकार | धान्वन दुर्ग |
| बुर्जों की संख्या | 52 |
| नया नाम | हनुमानगढ़ (1805 ई., सूरतसिंह द्वारा) |
FAQs
Q1. भटनेर दुर्ग कहाँ स्थित है?
भटनेर दुर्ग राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है।
Q2. भटनेर दुर्ग का निर्माण कब और किसने कराया?
295 ईस्वी में भाटी राजा भूपत ने इस दुर्ग का निर्माण कराया।
Q3. भटनेर दुर्ग किस प्रकार का किला है?
यह एक धान्वन दुर्ग (Desert Fort) है।
Q4. भटनेर दुर्ग में कितनी बुर्ज हैं?
इसमें 52 बुर्ज (bastions) हैं।
Q5. तैमूर ने भटनेर दुर्ग के बारे में क्या लिखा था?
उसने कहा कि इतना मजबूत व सुरक्षित दुर्ग उसने हिंदुस्तान में कहीं नहीं देखा।
Q6. भटनेर दुर्ग का नाम हनुमानगढ़ कब पड़ा?
1805 ई. में मंगलवार के दिन महाराजा सूरतसिंह ने इस पर अधिकार किया और नाम बदलकर हनुमानगढ़ रखा।
Q7. भटनेर दुर्ग का सामरिक महत्व क्या था?
यह दिल्ली-मुल्तान मार्ग पर होने से व्यापार और सैनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।
Q8. अकबर ने भटनेर दुर्ग पर कब अधिकार किया था?
लगभग 1570 ईस्वी में।
Q9. भटनेर दुर्ग का नाम किसके सम्मान में रखा गया था?
राजा भूपत ने अपने पिता की स्मृति में इसका नाम भटनेर रखा।
Q10. भटनेर दुर्ग किस राजवंश से सबसे पहले जुड़ा था?
यह भाटी राजवंश से जुड़ा था।
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