आमेर का किला (Amber Fort Jaipur) जयपुर से 11 किमी दूर स्थित एक शानदार गिरि दुर्ग है। 1036 ई. में काकिलदेव ने इसे मीणा शासक से छीना और बाद में महाराजा मानसिंह व सवाई जयसिंह ने इसे भव्य रूप दिया। हिंदू और मुगल स्थापत्य कला के सम्मिश्रण से बने इस किले में शीश महल, गणेश पोल, जलेब चौक और शिला देवी मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं।
Page Contents
Toggleआमेर किले का परिचय
स्थान: जयपुर से 11 किमी उत्तर
प्रकार: गिरि दुर्ग (Hill Fort)
स्थापना: 1036 ई., काकिलदेव (कच्छवाहा वंश)
प्रमुख शासक: महाराजा मानसिंह, सवाई जयसिंह
स्थापत्य शैली: हिंदू और मुगल कला का सम्मिश्रण
विशेषता: राजमहल ऊँचाई पर पर्वतीय ढलान पर निर्मित
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1036 ई.: काकिलदेव ने मीणा शासक भुट्टो से किला छीना
महाराजा मानसिंह काल: अनेक निर्माण कार्य
1707 ई.: मुगल सम्राट बहादुरशाह प्रथम ने किले पर कब्ज़ा किया, नाम रखा मोमिनाबाद
कब्ज़े के दौरान चित्रकारी पर सफेदी, 2009 में विशेषज्ञों द्वारा पुनः प्राप्त
ब्रिटिश यात्री बिशप हैबर ने कहा: “ये महल क्रेमलिन और अलहम्ब्रा से भी सुंदर हैं।”
स्थापत्य कला और निर्माण शैली
संपूर्ण दुर्ग प्राचीर और बुर्जों से घिरा
राजमहल सीधे ढलान पर बने, दुर्ग का ही स्वरूप
हिंदू + मुगल स्थापत्य का अनूठा मेल
सफेद संगमरमर की अलंकृत जालियाँ (Jali work)
कांच की जड़ाई (Glass inlay)
प्रमुख द्वार और प्रवेश मार्ग
1. जयपोल – मुख्य प्रवेश द्वार
2. जलेब चौक – विशाल प्रांगण
3. सूरजपोल और चाँदपोल – मेहराबदार छोटे दरवाजे
4. सिंहपोल – राजप्रासाद में प्रवेश हेतु
5. गणेशपोल – भव्य स्थापत्य, सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित
प्रमुख आकर्षण (Important Sections)
जलेब चौक – सैनिकों और आम प्रजा का स्थल
सिंहपोल – राजप्रासाद की ओर प्रवेश द्वार
गणेश पोल – सुंदर पेंटिंग और स्थापत्य
शिला देवी मंदिर – धार्मिक महत्व
दीवाने आम – जनसभा
दीवाने खास – विशेष सभा
शीश महल (Mirror Palace) – अद्वितीय कांच की जड़ाई
दिल खुश महल
24 रानियों का महल
रंग महल
सौभाग्य मंदिर (सुहाग मंदिर) – रानियों का मनोरंजन स्थल
केसर बाग (Saffron Garden) – मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा निर्मित
लाइट एंड साउंड शो – आधुनिक पर्यटन आकर्षण
शीश महल (Sheesh Mahal)
छत और दीवारों पर कांच की जड़ाई
एक मोमबत्ती से सैकड़ों प्रतिबिंब
विश्वप्रसिद्ध स्थापत्य कला का उदाहरण
सारांश
आमेर का किला (Amber Fort Jaipur) राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध दुर्गों में से एक है। यह जयपुर से 11 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है और इसे 1036 ई. में काकिलदेव ने मीणा शासक से छीनकर स्थापित किया। बाद में महाराजा मानसिंह और सवाई जयसिंह ने इसे भव्य स्वरूप दिया। किले में हिंदू और मुगल स्थापत्य का अद्वितीय संगम है। राजमहल ऊँचाई पर पर्वतीय ढलानों पर बने हैं जिससे इन्हें किले का ही स्वरूप मिल गया।
किले के मुख्य आकर्षणों में जलेब चौक, सिंहपोल, गणेशपोल, शिला देवी मंदिर, दीवाने आम, दीवाने खास, शीश महल और केसर बाग प्रमुख हैं। शीश महल अपनी कांच की जड़ाई और प्रतिबिंबों के कारण विशेष ख्याति प्राप्त है। बहादुरशाह प्रथम ने इसे कुछ समय तक अपने कब्जे में लेकर मोमिनाबाद नाम दिया था। अंग्रेज यात्री बिशप हैबर ने इसकी सुंदरता की तुलना अलहम्ब्रा और क्रेमलिन से भी अधिक बताई। आज यह किला पर्यटन विभाग के पास है और यहां शाम को लाइट एंड साउंड शो आयोजित होता है। स्थापत्य, इतिहास और कला के अद्वितीय मेल के कारण आमेर किला भारत की धरोहर और राजस्थान का गौरव माना जाता है।
Facts Table – आमेर किला
| तथ्य | विवरण |
| स्थान | जयपुर से 11 किमी उत्तर |
| स्थापना | वर्ष 1036 ई. |
| निर्माता | काकिलदेव (कच्छवाहा वंश) |
| प्रमुख शासक | मानसिंह, सवाई जयसिंह |
| प्रसिद्ध स्थल | शीश महल, गणेश पोल, शिला देवी मंदिर |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. आमेर किला किसने बनवाया था?
Ans. इसे 1036 ई. में कच्छवाहा शासक काकिलदेव ने मीणा शासक भुट्टो से छीनकर स्थापित किया।
Q2. आमेर किला किस प्रकार का किला है?
Ans. यह एक गिरि दुर्ग (Hill Fort) है।
Q3. आमेर किले की स्थापत्य शैली क्या है?
Ans. इसमें हिंदू और मुगल स्थापत्य कला का मिश्रण है।
Q4. आमेर किले का सबसे प्रसिद्ध महल कौन सा है?
Ans. शीश महल (Mirror Palace) सबसे प्रसिद्ध है।
Q5. गणेश पोल किसने बनवाया था?
Ans. महाराजा सवाई जयसिंह ने।
Q6. शीश महल की खासियत क्या है?
Ans. यहाँ एक मोमबत्ती जलाने पर सैकड़ों प्रतिबिंब दिखाई देते हैं।
Q7. आमेर किले का नाम मोमिनाबाद कब रखा गया था?
Ans. 1707 ई. में मुगल सम्राट बहादुरशाह प्रथम के समय।
Q8. आमेर किले में कौन सा उद्यान प्रसिद्ध है?
Ans. सेफ्रोन गार्डन (केसर बाग)।
Q9. आमेर किले में प्रवेश का पहला द्वार कौन सा है?
Ans. जयपोल।
Q10. आज आमेर किला किसके अधीन है?
Ans. वर्तमान में यह पर्यटन विभाग के अधीन है।
