Ranakpur Jain Temple राजस्थान के पाली जिले में स्थित “खंभों का अजायबघर” है, जिसमें 1444 स्तम्भ, 84 शिखर और चौमुखा मंदिर इसकी विशेष पहचान हैं।
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ToggleIntroduction (परिचय)
Ranakpur Jain Temple (रणकपुर जैन मंदिर) राजस्थान के पाली जिले में स्थित है।
संवत् 1446 में प्रसिद्ध शिल्पकार देपा के निर्देशन में निर्माण शुरू हुआ।
मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा ने इस मंदिर को संरक्षण दिया।
मुख्य आकर्षण → चौमुखा मंदिर (Chaumukha Temple)।
Architectural Features (वास्तुकला की विशेषताएं)
1. मण्डप (Mandaps) → कुल 24।
2. शिखर (Shikhars) → कुल 84।
3. स्तम्भ (Pillars) → 1444, जिनमें कोई भी एक जैसा नहीं।
4. अलंकरण (Carvings) → नृत्यांगनाओं की अद्वितीय मूर्तियां।
5. गर्भगृह (Garbha Griha) → भगवान आदिनाथ की 5 फुट ऊँची प्रतिमा।
Unique Identity (अनूठी पहचान)
“खंभों का अजायबघर” – 1444 अलग-अलग स्तम्भ।
“चतुर्मुख जिनप्रासाद” – चार दिशाओं में आदिनाथ की प्रतिमाएं।
तोरणद्वार, सभामण्डप और देवकुलिकाएं शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण।
Royal Patronage (राजसी संरक्षण)
मेवाड़ के महाराणा कुंभा → भूमि दान + नगर बसाया।
समीप सूर्य मंदिर का निर्माण भी करवाया।
मंदिर मथाई नदी के किनारे पर स्थित है।
Historical Reference (ऐतिहासिक संदर्भ)
जैन ग्रंथों में उल्लेख: “नलिनी गुल्म देव विमान”।
15वीं शताब्दी का अद्वितीय स्थापत्य उदाहरण।
जैन संस्कृति और भारतीय कला का वैभवशाली प्रतीक।
सारांश
रणकपुर जैन मंदिर भारतीय स्थापत्य कला, शिल्प और आध्यात्मिकता का अद्वितीय संगम है। यह मंदिर राजस्थान के पाली जिले में स्थित है और इसका निर्माण संवत् 1446 में शिल्पकार देपा के निर्देशन में हुआ। इस भव्य मंदिर के निर्माण में मेवाड़ के महाराणा कुंभा का संरक्षण रहा, जिन्होंने इसके लिए भूमि दान की और आसपास एक नगर भी बसाया। मंदिर मथाई नदी के किनारे स्थित है और भगवान आदिनाथ को समर्पित है। इसका मुख्य आकर्षण चौमुखा मंदिर है, जिसमें 24 मण्डप, 84 शिखर और 1444 स्तम्भ बने हैं। प्रत्येक स्तम्भ का डिज़ाइन अलग है, इसी कारण इसे “खंभों का अजायबघर” कहा जाता है। गर्भगृह में भगवान आदिनाथ की 5 फुट ऊँची प्रतिमा चारों दिशाओं में विराजमान है, जिससे इसका नाम “चतुर्मुख जिनप्रासाद” पड़ा। मंदिर के तोरणद्वार, सभामण्डप, देवकुलिकाएं और नृत्यांगनाओं की मूर्तियां भारतीय कला की उत्कृष्टता का प्रमाण हैं। रणकपुर जैन मंदिर जैन संस्कृति का वैभवशाली धरोहर है और भारतीय स्थापत्य का रत्न माना जाता है।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| निर्माण काल | संवत् 1446 |
| शिल्पकार | देपा |
| संरक्षक | महाराणा कुंभा |
| स्तम्भों की संख्या | 1444 (सभी अलग-अलग) |
| उपनाम | खंभों का अजायबघर / चतुर्मुख जिनप्रासाद |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs in Hindi)
प्र.1. रणकपुर जैन मंदिर कहाँ स्थित है?
रणकपुर जैन मंदिर राजस्थान के पाली जिले में स्थित है।
प्र.2. रणकपुर जैन मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
इसका निर्माण संवत् 1446 में शुरू हुआ था।
प्र.3. रणकपुर जैन मंदिर का निर्माण किसने कराया था?
इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध शिल्पकार देपा के निर्देशन में हुआ।
प्र.4. रणकपुर जैन मंदिर को “खंभों का अजायबघर” क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसमें 1444 स्तम्भ हैं और कोई भी दो स्तम्भ एक-दूसरे से समान नहीं हैं।
प्र.5. रणकपुर जैन मंदिर किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित है।
प्र.6. चौमुखा मंदिर क्या है?
चौमुखा मंदिर रणकपुर का मुख्य मंदिर है, जिसमें चारों दिशाओं में भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
प्र.7. रणकपुर जैन मंदिर में कितने मण्डप हैं?
इसमें कुल 24 मण्डप हैं।
प्र.8. रणकपुर जैन मंदिर में कितने शिखर हैं?
इस मंदिर में 84 शिखर बने हुए हैं।
प्र.9. रणकपुर जैन मंदिर में कितने स्तम्भ हैं?
इसमें 1444 स्तम्भ हैं और हर स्तम्भ का डिज़ाइन अलग है।
प्र.10. रणकपुर जैन मंदिर के गर्भगृह में कौन-सी प्रतिमा स्थापित है?
गर्भगृह में भगवान आदिनाथ की लगभग 5 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित है।
प्र.11. रणकपुर जैन मंदिर को “चतुर्मुख जिनप्रासाद” क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसमें चार दिशाओं में भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
प्र.12. रणकपुर जैन मंदिर के पास कौन-सी नदी बहती है?
यह मंदिर मथाई नदी के किनारे स्थित है।
प्र.13. रणकपुर जैन मंदिर के निर्माण को किस राजा ने संरक्षण दिया था?
मेवाड़ के महाराणा कुंभा ने इस मंदिर को संरक्षण दिया।
प्र.14. रणकपुर जैन मंदिर में कौन-सी कलात्मक विशेषताएं प्रमुख हैं?
तोरणद्वार, सभामण्डप, देवकुलिकाएं और नृत्यांगनाओं की मूर्तियां प्रमुख हैं।
प्र.15. रणकपुर जैन मंदिर किस सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है?
यह जैन संस्कृति और भारतीय स्थापत्य कला का प्रतीक है।
