श्रीमहावीरजी करौली जैन श्रावक अमरचन्द बिलाला द्वारा निर्मित प्रसिद्ध तीर्थ है। महावीर जयंती पर यहां चार दिवसीय मेला और जिनेन्द्र रथ यात्रा इसका मुख्य आकर्षण है।
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1. श्रीमहावीरजी करौली का परिचय
स्थान: करौली जिला, राजस्थान
जैन धर्म का अत्यंत प्रसिद्ध तीर्थ
सभी वर्ग और धर्मों के लोग श्रद्धा से दर्शन करते हैं
प्राचीन नाम: चाँदनपुर महावीरजी
2. मंदिर की स्थापना और इतिहास
निर्माता: जैन श्रावक अमरचन्द बिलाला
प्रारंभिक नाम: चाँदनपुर महावीरजी
बाद में प्रसिद्ध हुआ: श्रीमहावीरजी
तीर्थ का विस्तार: धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
3. तीर्थ का धार्मिक महत्व
जैन परंपरा का प्रमुख तीर्थ
तीर्थयात्रियों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केन्द्र
सभी संप्रदाय और धर्मों के लोगों की समान आस्था
4. महावीर जयंती और वार्षिक मेला
चार दिवसीय उत्सव
समय: चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती)
विशेष आयोजन: धार्मिक अनुष्ठान, भजन, प्रवचन
देशभर से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति
जिनेन्द्र रथ यात्रा
मुख्य आकर्षण
प्रारंभ: मुख्य मंदिर से
मार्ग: गंभीर नदी के तट तक
रथ: स्वर्ण आभा से सुशोभित
परंपरा: प्रतिमा का अभिषेक पीतवस्त्रधारी भक्तजन करते हैं
विशेष: क्षेत्रीय उपखंड अधिकारी शासन के प्रतिनिधि स्वरूप सारथी बनते हैं
5. विशेष परंपराएँ और आकर्षण
स्वर्णाभा से सुसज्जित भव्य रथ
पीतवस्त्रधारी भक्तों द्वारा अभिषेक
सामाजिक और धार्मिक एकता का संदेश
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
6. सारांश
श्रीमहावीरजी करौली राजस्थान का अत्यंत प्रसिद्ध जैन तीर्थ है, जिसकी स्थापना जैन श्रावक अमरचन्द बिलाला ने करवाई थी। यह स्थल प्रारंभ में चाँदनपुर महावीरजी के नाम से प्रसिद्ध था, परंतु समय के साथ श्रीमहावीरजी के रूप में विख्यात हुआ। इस मंदिर की विशेषता है कि यहां न केवल जैन धर्म के अनुयायी बल्कि सभी वर्ग और धर्मों के लोग गहरी श्रद्धा के साथ आते हैं।
प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) पर यहाँ चार दिवसीय भव्य मेला आयोजित होता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण जिनेन्द्र रथ यात्रा है, जो मंदिर से गंभीर नदी तक जाती है। स्वर्णाभा से सुसज्जित रथ पर विराजमान महावीर स्वामी की प्रतिमा का अभिषेक पीतवस्त्रधारी भक्तजन करते हैं। इस परंपरा की विशेषता यह भी है कि रथ का सारथ्य प्रशासनिक अधिकारी (क्षेत्रीय उपखंड अधिकारी) शासन के प्रतिनिधि के रूप में करते हैं।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है।
7. प्रमुख तथ्य (Table)
तथ्य |
विवरण |
| स्थान | करौली जिला, राजस्थान |
| निर्माता | अमरचन्द बिलाला (जैन श्रावक) |
| प्रारंभिक नाम | चाँदनपुर महावीरजी |
| प्रमुख आयोजन | महावीर जयंती पर चार दिवसीय मेला |
| मुख्य आकर्षण | जिनेन्द्र रथ यात्रा |
8. FAQs
Q1. श्रीमहावीरजी मंदिर कहाँ स्थित है?
यह राजस्थान के करौली जिले में स्थित है।
Q2. श्रीमहावीरजी मंदिर का निर्माण किसने कराया था?
जैन श्रावक अमरचन्द बिलाला ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।
Q3. इस मंदिर का प्रारंभिक नाम क्या था?
प्रारंभ में इसे चाँदनपुर महावीरजी कहा जाता था।
Q4. श्रीमहावीरजी में मेला कब आयोजित होता है?
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) पर प्रतिवर्ष चार दिवसीय मेला भरता है।
Q5. मेले का मुख्य आकर्षण क्या है?
स्वर्णाभा से सुसज्जित जिनेन्द्र रथ यात्रा इसका मुख्य आकर्षण है।
Q6. जिनेन्द्र रथ यात्रा कहाँ से कहाँ तक जाती है?
यह मुख्य मंदिर से गंभीर नदी के तट तक जाती है।
Q7. प्रतिमा का अभिषेक कौन करता है?
पीतवस्त्रधारी भक्तजन प्रतिमा का अभिषेक करते हैं।
Q8. रथ का सारथी कौन होता है?
क्षेत्रीय उपखंड अधिकारी शासन के प्रतिनिधि स्वरूप सारथी बनते हैं।
Q9. इस तीर्थ का महत्व केवल जैन धर्म तक सीमित है क्या?
नहीं, सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग श्रद्धा से यहाँ आते हैं।
Q10. श्रीमहावीरजी करौली क्यों प्रसिद्ध है?
यह जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ है और महावीर जयंती मेले व रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है।
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