Gagron Fort गागरोण किला, राजस्थान का प्रसिद्ध जलदुर्ग है जो कालीसिंध और आहू नदियों के संगम पर स्थित है। जानिए इसका इतिहास, स्थापत्य, प्रमुख युद्ध और FAQs।
1. परिचय
गागरोण का किला राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है और यह राजस्थान का एकमात्र जलदुर्ग (Water Fort) है। तीन ओर नदियाँ और चौथी ओर खाई इसे प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करती है।
2. भौगोलिक स्थिति
किला कालीसिंध और आहू नदियों के संगम स्थल सामेलणी पर बसा है।
दुर्ग तक पानी पहुँचाने के लिए एक भूमिगत सुरंग (Tunnel) बनाई गई थी।
3. निर्माण व नामकरण
11वीं शताब्दी में डोड परमार वंश द्वारा निर्मित।
प्रारंभिक नाम – डोडगढ़ / धूलरगढ़।
खींची वंश के राजा देवनसिंह (धारू) ने अधिकार कर इसे गागरोण नाम दिया।
4. स्थापत्य विशेषताएँ (Table)
विशेषता (Feature) – विवरण (Details)
दुर्ग का प्रकार (Type) – जलदुर्ग (Water Fort)
नदी से घिराव (Surrounding) – कालीसिंध, आहू नदियाँ
प्रवेश द्वार (Main Gate) – गणेश पोल
प्रमुख संरचना (Main Structures) – महल, मंदिर, मस्जिद, सुरंग
यूनेस्को दर्जा (UNESCO Status) विश्व धरोहर स्थल (Hill Forts of Rajasthan)
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5. प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ
1423 ई. – पहला साका → अचलदास खींची की वीरगति।
1444 ई. – दूसरा साका → महमूद खलजी ने किले पर कब्ज़ा किया।
अकबर काल → पृथ्वीराज को जागीर में दिया गया।
मराठा व पिण्डारी काल → कई बार हाथ बदलता रहा।
6. गागरोण का सांस्कृतिक महत्व
यहां संत पीपा जी और संत मेहंदी शाह फकीर से जुड़ी धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं।
यह हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।
7. पर्यटन जानकारी (Tourism Information)
Location – झालावाड़, राजस्थान
Timings – सुबह 9:00 AM से शाम 6:00 PM
Entry Fee – भारतीय ₹25, विदेशी ₹200
Nearest City – झालावाड़ (लगभग 12 KM)
8. निष्कर्ष
गागरोण किला सिर्फ एक स्थापत्य धरोहर नहीं बल्कि राजस्थान की शौर्य गाथाओं का प्रतीक है। इसकी विशेषता इसे अन्य किलों से अलग बनाती है।
FAQs
Q1. गागरोण किला कहाँ स्थित है?
राजस्थान के झालावाड़ जिले में।
Q2. गागरोण किले को जलदुर्ग क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह तीन ओर से नदियों और चौथी ओर से खाई से घिरा है।
Q3. गागरोण किले का निर्माण किसने करवाया था?
डोड परमार शासकों ने।
Q4. UNESCO Heritage में गागरोण कब शामिल हुआ?
2013 में “Hill Forts of Rajasthan” समूह के अंतर्गत।
