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Toggleपरिचय (Introduction)
Poet Māgha कवि माघ का जन्म 8वीं सदी में राजस्थान के भीनमाल (जालौर) में हुआ था। वे संस्कृत के श्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। माघ को उनके महान ग्रंथ “शिशुपालवध” के कारण अमरता प्राप्त हुई। माघ को “कवियों का कवि” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने कालिदास, भारवि और दण्डी तीनों की विशेषताओं का अद्भुत समन्वय किया।
साहित्यिक योगदान (Literary Contribution)
माघ की प्रमुख रचना है “शिशुपालवध महाकाव्य”, जो महाभारत की कथा पर आधारित है।
इस काव्य में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा चेदिराज शिशुपाल का वध वर्णित है।
इसमें कालिदास की उपमा (Similes),
भारवि का विचार-गांभीर्य (Depth of Thought),
तथा दण्डी की शैली-निष्ठा (Stylistic Discipline) का समन्वय है।
माघ की विशेषताएँ (Special Features of Māgha’s Poetry)
1. भाषा की परिष्कृतता – संस्कृत का अत्यंत शुद्ध एवं समृद्ध प्रयोग।
2. अलंकार-प्रयोग – उपमा, रूपक, श्लेष, अनुप्रास आदि का सुंदर प्रयोग।
3. गंभीर चिंतन – दार्शनिक एवं गूढ़ विचारों की अभिव्यक्ति।
4. शैली का अनुशासन – छंद और व्याकरण की पूर्णता।
5. सामाजिक-सांस्कृतिक झलक – तत्कालीन समाज और संस्कृति का अप्रत्यक्ष चित्रण।
प्रसिद्ध उक्ति (Famous Saying about Māgha)
संस्कृत आलोचना में कहा गया है:
“उपमा कालिदासस्य, भारवेरर्थगौरवम्। दण्डिनः पदलालित्यं, माघे सन्ति त्रयो गुणाः॥”
अर्थ: माघ में कालिदास की उपमा, भारवि का अर्थगौरव और दण्डी का पदलालित्य – तीनों गुण मिलते हैं।
महत्व (Significance)
माघ संस्कृत काव्य परंपरा के त्रिकालजयी कवि हैं।
उनकी रचना “शिशुपालवध” आज भी काव्यशास्त्र के विद्यार्थियों और आलोचकों के लिए अध्ययन का प्रमुख आधार है।
उन्होंने काव्य परंपरा को उच्च कोटि के सौंदर्य, वैचारिक गंभीरता और शैलीगत अनुशासन से समृद्ध किया।
सारांश (Summary):
कवि माघ, 8वीं सदी के भीनमाल (जालौर) के महान संस्कृत कवि थे। उनकी अमर कृति “शिशुपालवध” में कालिदास, भारवि और दण्डी की विशेषताओं का संगम है। वे संस्कृत साहित्य के शिखर कवियों में गिने जाते हैं, जिनके काव्य में भव्यता, गहनता और कलात्मकता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
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