HARVILAS SHARDA हरविलास शारदा, अजमेर (1867–1955) बाल विवाह निषेध कानून (शारदा एक्ट) के जनक और महान इतिहासकार थे। उन्होंने Hindu Superiority सहित कई ऐतिहासिक ग्रंथ लिखे।
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Toggle1. Introduction / परिचय
हरविलास शारदा (Harvilas Sharda) का जन्म 8 जून 1867 को अजमेर में हुआ।
अंग्रेज़ी शासनकाल के दौरान इन्हें समाज सुधारक, इतिहासकार और विधिवेत्ता के रूप में प्रसिद्धि मिली।
बाल विवाह निषेध कानून (1929) इन्हीं के नाम पर “शारदा एक्ट” कहलाया।
2. Early Life and Education / प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
1. जन्म – 8 जून 1867, अजमेर।
2. दयानंद सरस्वती से निकटता।
3. भारतीय संस्कृति, इतिहास और अंग्रेजी शिक्षा का गहन अध्ययन।
3. Social Reforms / सामाजिक सुधार
बाल विवाह निषेध (Sharda Act, 1929)
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए ऐतिहासिक कानून बनाया गया।
विधवा पुनर्विवाह (Widow Remarriage)
“आर्य मार्तण्ड” और “परोपकारिणी पत्रिका” में लेख प्रकाशित किए।
आर्य समाज से जुड़ाव (Association with Arya Samaj)
स्वामी दयानंद के विचारों को अपनाकर कुरीतियों के विरोधी बने
4. Literary Works / साहित्यिक योगदान
1. Hindu Superiority (1906) – भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता सिद्ध की।
2. Ajmer Historical and Descriptive – अजमेर का ऐतिहासिक विवरण।
3. Maharana Sanga और Maharana Kumbha – राजस्थान के वीर शासकों पर।
4. Hammir of Ranthambhor – रणथंभौर के हम्मीर पर आधारित।
5. Life of Virjanand Saraswati – आचार्य विरजानंद का जीवन।
6. Shankaracharya and Dayanand – दार्शनिक तुलना।
7. Speeches and Writings of Harvilas Sharda – लेखन और भाषण संग्रह।
5. Historical Importance / ऐतिहासिक महत्व
Child Marriage Restraint Act (1929) से इनकी पहचान समाज सुधारक के रूप में हुई।
भारतीय इतिहास, संस्कृति और सामाजिक सुधार आंदोलनों में योगदान।
राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ इतिहास लेखन।
6. Death / निधन
20 जून 1955 को अजमेर में निधन हुआ।
सारांश (Summary )
हरविलास शारदा (1867–1955) राजस्थान और भारत के उन समाज सुधारकों में गिने जाते हैं जिन्होंने भारतीय समाज को कुरीतियों से मुक्त करने में अहम योगदान दिया। अजमेर में जन्मे शारदा दयानंद सरस्वती के विचारों से गहरे प्रभावित थे। उन्होंने सामाजिक बुराइयों जैसे बाल विवाह और विधवा उत्पीड़न के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया। इनके प्रयासों से 1929 में “बाल विवाह निषेध कानून” पारित हुआ, जो शारदा एक्ट के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसने भारतीय समाज को नई दिशा दी। साहित्य और इतिहास के क्षेत्र में भी शारदा का योगदान अविस्मरणीय है। Hindu Superiority (1906) जैसी कृति ने भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को प्रमाणित किया। इसके अलावा Maharana Sanga, Maharana Kumbha, Ajmer Historical and Descriptive, और Life of Virjanand Saraswati जैसी रचनाएँ ऐतिहासिक महत्व की मानी जाती हैं। उन्होंने समाज में विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में लेखन किया और “आर्य समाज” की विचारधारा से प्रेरित होकर सुधार कार्य किए। उनके कार्य आज भी समाज और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायी हैं।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| जन्म | 8 जून 1867, अजमेर |
| मृत्यु | 20 जून 1955, अजमेर |
| प्रसिद्धि | बाल विवाह निषेध कानून (शारदा एक्ट) |
| प्रमुख ग्रंथ | Hindu Superiority, Maharana Sanga आदि |
| प्रेरणा | स्वामी दयानंद सरस्वती, आर्य समाज |
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. Who was Harvilas Sharda? / हरविलास शारदा कौन थे?
Ans: हरविलास शारदा समाज सुधारक और इतिहासकार थे, जिन्हें शारदा एक्ट का जनक कहा जाता है।
Q2. When and where was Harvilas Sharda born? / हरविलास शारदा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
Ans: 8 जून 1867 को अजमेर में।
Q3. What is Sharda Act? / शारदा एक्ट क्या है?
Ans: 1929 में पारित बाल विवाह निषेध कानून को शारदा एक्ट कहा जाता है।
Q4. Which book made Harvilas Sharda famous? / कौन सी पुस्तक से शारदा प्रसिद्ध हुए?
Ans: Hindu Superiority (1906) ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई।
Q5. What were his main contributions? / उनके प्रमुख योगदान क्या थे?
Ans: बाल विवाह निषेध कानून, विधवा पुनर्विवाह आंदोलन और इतिहास लेखन।
Q6. Harvilas Sharda was associated with which movement? / शारदा किस आंदोलन से जुड़े थे?
Ans: आर्य समाज से जुड़े थे।
Q7. When did Harvilas Sharda die? / उनका निधन कब हुआ?
Ans: 20 जून 1955 को अजमेर में।
Q8. Name any two historical works of Sharda. / शारदा की दो ऐतिहासिक रचनाएँ बताइए।
Ans: Maharana Sanga और Maharana Kumbha।
Q9. Which journals published his views on widow remarriage? / विधवा पुनर्विवाह पर उनके लेख कहाँ प्रकाशित हुए?
Ans: आर्य मार्तण्ड और परोपकारिणी पत्रिका।
Q10. Why is Harvilas Sharda remembered today? / आज शारदा को क्यों याद किया जाता है?
Ans: समाज सुधार, शिक्षा और इतिहास लेखन में उनके योगदान के कारण।
