Pandit Ramkaran Asopa पं. रामकरण आसोपा – इतिहासकार, भाषाविद् और कोशकार, जिन्होंने मारवाड़ का इतिहास, डिंगल शब्दकोश और मारवाड़ी व्याकरण रचकर राजस्थान की ऐतिहासिक परंपरा को नई दिशा दी।
Page Contents
ToggleEarly Life and Education | प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म: 7 अगस्त, 1857, मारवाड़ के बड़लू ग्राम में।
शिक्षा: दादूपंथी साधु से प्राप्त।
निधन: 9 अक्टूबर, 1943।
Academic Career | शैक्षिक कार्य
1. 1920–21 ई. में कलकत्ता विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा और डिंगल के प्रवक्ता नियुक्त।
2. राजस्थानी और डिंगल भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान।
Historical Contributions | ऐतिहासिक योगदान
मारवाड़ राज्य और शासकों का इतिहास लिखा।
जागीरदारों और सामंतों का विस्तृत इतिहास संकलित।
जोधपुर राज्य के विभिन्न ठिकानों का इतिहास तैयार किया।
मारवाड़ के क्षेत्रीय इतिहास लेखन की परंपरा का शुभारंभ।
Major Works | प्रमुख ग्रंथ
1. मारवाड़ का मूल इतिहास
2. मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास
3. गीता की मारवाड़ी टीका
4. डिंगल शब्दकोश
5. सर्वप्रथम मारवाड़ी व्याकरण की रचना।
Multidimensional Personality | बहुआयामी व्यक्तित्व
संस्कृताचार्य
भाषाविद्
अनुवादक और संपादक
पत्रकार
व्याकरणाचार्य
कोशकार
पुरातत्वज्ञ
संशोधक और इतिहासकार
Association with Scholars | विद्वानों से सहयोग
डॉ. एल. पी. टैसीटोरी को डिंगल भाषा और साहित्य के शोध में सहयोग प्रदान किया।
सारांश (Summary)
पं. रामकरण आसोपा (1857–1943 ई.) राजस्थान के एक प्रख्यात इतिहासवेत्ता, भाषाविद् और साहित्यकार थे। उनका जन्म मारवाड़ के बड़लू ग्राम में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने एक दादूपंथी साधु से प्राप्त की। आसोपा जी का विद्वतापूर्ण जीवन बहुआयामी रहा। 1920–21 में उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय में राजस्थानी और डिंगल भाषा का प्रवक्ता नियुक्त किया गया, जिसने उनकी विद्वत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई। उन्होंने न केवल मारवाड़ राज्य और शासकों का इतिहास लिखा, बल्कि जागीरदारों, सामंतों और जोधपुर राज्य के ठिकानों का भी इतिहास संकलित किया। मारवाड़ का मूल इतिहास और मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। भाषाविज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने पहली बार मारवाड़ी व्याकरण की रचना की और डिंगल शब्दकोश का निर्माण किया। साथ ही उन्होंने गीता पर मारवाड़ी भाषा में टीका लिखी। वे संस्कृताचार्य, व्याकरणाचार्य, कोशकार, पुरातत्वज्ञ, संपादक और पत्रकार जैसे विविध आयामों से जुड़े रहे। डॉ. एल. पी. टैसीटोरी को डिंगल साहित्य के शोध में सहयोग देकर उन्होंने राजस्थान के साहित्यिक इतिहास को समृद्ध बनाया।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| जन्म | 9 अक्टूबर, 1943 |
| विश्वविद्यालय पद | 1920–21 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रवक्ता |
| प्रमुख ग्रंथ | मारवाड़ का मूल इतिहास, मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास |
| विशेष योगदान | डिंगल शब्दकोश और मारवाड़ी व्याकरण का निर्माण |
FAQs (Frequently Asked Questions – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. Who was Pandit Ramkaran Asopa? | पं. रामकरण आसोपा कौन थे?
वे राजस्थान के इतिहासकार, भाषाविद् और कोशकार थे।
2. When was Pandit Ramkaran Asopa born? | पं. रामकरण आसोपा का जन्म कब हुआ?
7 अगस्त, 1857 को।
3. Where was he born? | उनका जन्म कहाँ हुआ?
मारवाड़ के बड़लू ग्राम में।
4. What was his profession? | उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र क्या था?
इतिहास लेखन, भाषाविज्ञान और शिक्षण।
5. When did he die? | उनका निधन कब हुआ?
9 अक्टूबर, 1943।
6. Which university appointed him as a lecturer? | उन्हें प्रवक्ता के रूप में कहाँ नियुक्त किया गया?
कलकत्ता विश्वविद्यालय (1920–21)।
7. Name his major works. | उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन सी हैं?
मारवाड़ का मूल इतिहास, मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास, गीता की मारवाड़ी टीका, डिंगल शब्दकोश।
8. What was his contribution in linguistics? | भाषाविज्ञान में उनका योगदान क्या था?
उन्होंने सर्वप्रथम मारवाड़ी व्याकरण का निर्माण किया।
9. With whom did he collaborate in research? | उन्होंने किस विद्वान को सहयोग दिया?
डॉ. एल. पी. टैसीटोरी को।
10. Why is Pandit Ramkaran Asopa remembered? | उन्हें क्यों याद किया जाता है?
मारवाड़ के इतिहास लेखन और भाषाई योगदान के लिए।
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