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Isardas |  ईसरदास : जीवन परिचय एवं रचनाएँ

 Isardas |  ईसरदास : जीवन परिचय एवं रचनाएँ

Isardas ईसरदास राजस्थान के डिंगल साहित्य के ऐसे महान कवि थे, जिन्होंने भक्ति, कर्म और ज्ञान के गहन विचारों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया। उनका साहित्य लोक संस्कृति, शक्ति उपासना और वीर रस से सराबोर है।

👤 जन्म एवं प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)

जन्म: चैत्र शुक्ल नवमी, 1538 ई.

जन्मस्थान: मालानी परगना (बाड़मेर) का भादरेस ग्राम

पिता: चारण सूजा जी

माता: अमर बाई

शिक्षा-दीक्षा: माता-पिता की मृत्यु के बाद चाचा आसजी ने दी

विवाह: 14 वर्ष की आयु में देवल बाई से विवाह, जिनका निधन 1559 ई. में बिच्छु डंक से हुआ

✍️ साहित्यिक रचनाएँ (Literary Works of Isardas)

ईसरदास ने मुख्यतः डिंगल भाषा में रचनाएँ कीं। उनकी रचनाएँ आध्यात्म, भक्ति, कर्मयोग और लोकभावना का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करती हैं।

प्रमुख रचनाएँ:

1. गुण हरिरस – भक्ति, कर्म और ज्ञान का संगम

2. देवियाँणा – शक्ति उपासना पर आधारित, दुर्गा सप्तशती के समान महत्ता

3. गुण वैराट

4. गुण निन्दा स्तुति

5. गुण भगवन्त हंस

6. आपण

7. हालाँ-झालाँ-री कुण्डलियाँ – वीर रस प्रधान ग्रंथ

 साहित्यिक महत्त्व (Importance in Literature)

डिंगल भाषा के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि माने जाते हैं।

शक्ति उपासना के लिए देवियाँणा ग्रंथ आज भी विशेष स्थान रखता है।

उनकी कविताएँ लोक जीवन, वीरता, भक्ति और नैतिकता का संदेश देती हैं।

ईसरदास ने राजस्थानी समाज को कर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाया।

सारांश (Summary)

भक्त कवि ईसरदास का जन्म 1538 ई. में बाड़मेर जिले के भादरेस ग्राम में हुआ। उनके पिता चारण सूजा जी और माता अमर बाई थीं। माता-पिता की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी परवरिश चाचा आसजी ने की। बाल्यावस्था में ही उन्हें जीवन की कठिनाइयाँ देखने को मिलीं। 14 वर्ष की आयु में उनका विवाह देवल बाई से हुआ, जिनका निधन 1559 ई. में हुआ। ईसरदास डिंगल भाषा के महान कवि थे। उनकी रचना गुण हरिरस कर्म, भक्ति और ज्ञान का लोकजीवन के अनुसार सुंदर चित्रण करती है। दूसरी प्रमुख रचना देवियाँणा शक्ति उपासकों में दुर्गा सप्तशती के समान महत्त्व रखती है। इसके अलावा उन्होंने गुण वैराट, गुण-निन्दा स्तुति, गुण भगवन्त हंस, आपण और हालाँ-झालाँ-री कुण्डलियाँ जैसी कृतियाँ रचीं, जो वीर रस और भक्ति रस से परिपूर्ण हैं। ईसरदास ने राजस्थान के लोक जीवन और धार्मिक परंपराओं को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी और डिंगल साहित्य को अमर बनाया। उनकी रचनाएँ आज भी अध्ययन और परीक्षा के लिए अत्यंत मूल्यवान मानी जाती हैं।

सारणी (Summary Table)

विषय

 विवरण

नाम भक्त कवि ईसरदास
जन्म 1538 ई., भादरेस ग्राम, बाड़मेर
पिता  चारण सूजा जी
माता  अमर बाई
प्रमुख रचनाएँ  गुण हरिरस, देवियाँणा, गुण वैराट, गुण-निन्दा स्तुति, हालाँ-झालाँ-री कुण्डलियाँ
भाषा   डिंगल
साहित्यिक योगदान  भक्ति, ज्ञान, कर्म और शक्ति उपासना का समन्वय

 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. भक्त कवि ईसरदास का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

👉 1538 ई. में बाड़मेर जिले के भादरेस गाँव में।

Q2. ईसरदास की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?

👉 गुण हरिरस, देवियाँणा, गुण वैराट, गुण निन्दा स्तुति, हालाँ-झालाँ-री कुण्डलियाँ आदि।

Q3. ईसरदास किस भाषा के कवि थे?

👉 डिंगल भाषा के।

Q4. देवियाँणा ग्रंथ किस विषय पर आधारित है?

👉 यह शक्ति उपासना पर आधारित है और इसकी महत्ता दुर्गा सप्तशती जैसी है।

Q5. ईसरदास का साहित्यिक योगदान क्यों महत्त्वपूर्ण है?

👉 क्योंकि उन्होंने भक्ति, ज्ञान और कर्म को लोकजीवन से जोड़कर सरल भाषा में प्रस्तुत किया।

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