Agarchand Nahata | अगरचन्द नाहटा : जीवन परिचय एवं साहित्यिक योगदान

 Agarchand Nahata अगरचन्द नाहटा जीवन परिचय – बीकानेर के जैन परिवार के प्राचीन ग्रंथ शोधकर्ता और अभय जैन ग्रंथालय के संस्थापक। जानिए उनके योगदान, खोजी ग्रंथ और साहित्यिक उपलब्धियाँ।

📌 परिचय (Introduction)

अगरचन्द नाहटा बीकानेर के जैन परिवार के सुप्रसिद्ध ग्रंथ शोधकर्ता और संपादक थे। औपचारिक शिक्षा केवल पाँचवी तक थी, लेकिन उन्होंने प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों और शिलालेखों की खोज में अमूल्य योगदान दिया।

👤 जन्म एवं प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)

जन्म: बीकानेर, जैन परिवार

शिक्षा: औपचारिक रूप से केवल पाँचवी तक

उन्हें कई संस्थाओं द्वारा D.Litt. की उपाधि प्रदान की गई

✍️ साहित्यिक योगदान (Literary Contributions)

प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों की खोज में प्रमुख योगदान।

खोजी गई महत्वपूर्ण कृतियाँ:

पृथ्वीराज रासो

बीसलदेव रासो

ढोला मारू रा दूहा

बेलि क्रिसन रुकमण री

65,000+ हस्तलिखित ग्रंथों का संग्रह कर अभय जैन ग्रंथालय की स्थापना।

लगभग दो दर्जन शोध ग्रंथों का संपादन।

अनेक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन।

🌟 महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ (Achievements)

प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण में अमूल्य योगदान।

बीकानेर के साहित्यिक और ऐतिहासिक अध्ययन में अग्रणी।

जैन साहित्य और राजस्थान की संस्कृति के प्रचारक।

सारांश

अगरचन्द नाहटा बीकानेर के जैन परिवार के प्राचीन ग्रंथ शोधक थे। औपचारिक शिक्षा केवल पाँचवी कक्षा तक होने के बावजूद, उन्होंने प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों और शिलालेखों के अध्ययन और खोज में अपार योगदान दिया। उनके शोध से पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, ढोला मारू रा दूहा और बेलि क्रिसन रुकमण री जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ सामने आईं। उन्होंने 65,000 से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह कर अभय जैन ग्रंथालय की स्थापना की, जो आज भी शोधकर्ताओं के लिए अमूल्य संसाधन है। इसके अलावा उन्होंने लगभग दो दर्जन शोध ग्रंथों का संपादन किया और कई पत्रिकाओं का प्रकाशन व संपादन किया। उनके योगदान ने राजस्थान के साहित्यिक और ऐतिहासिक अध्ययन को मजबूत किया। अगरचन्द नाहटा की मेहनत और लगन ने जैन साहित्य और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन 12 जनवरी 1983 को बीकानेर में हुआ।

 तथ्य तालिका (Facts Table)

विषय

 विवरण

नाम  अगरचन्द नाहटा
जन्म  बीकानेर, जैन परिवार
शिक्षा  औपचारिक रूप से केवल पाँचवी
प्रमुख योगदान प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों की खोज
ग्रंथालय अभय जैन ग्रंथालय, 65,000+ ग्रंथ
निधन  12 जनवरी 1983, बीकानेर

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अगरचन्द नाहटा का जन्म कहाँ और कब हुआ था?

👉 उनका जन्म बीकानेर के जैन परिवार में हुआ।

Q2. अगरचन्द नाहटा की औपचारिक शिक्षा कितनी थी?

👉 वे केवल पाँचवी कक्षा तक पढ़े थे।

Q3. अगरचन्द नाहटा ने कौन-कौन से ग्रंथ खोजे?

👉 पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो, ढोला मारू रा दूहा, बेलि क्रिसन रुकमण री।

Q4. अभय जैन ग्रंथालय किसने स्थापित किया?

👉 अगरचन्द नाहटा ने 65,000+ हस्तलिखित ग्रंथों का संग्रह कर स्थापित किया।

Q5. अगरचन्द नाहटा को कौन-सी उपाधियाँ मिलीं?

👉 कई संस्थाओं ने उन्हें D.Litt. प्रदान की।

Q6. अगरचन्द नाहटा ने कौन-कौन सी पत्रिकाएँ संपादित कीं?

👉 उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया।

Q7. उनका साहित्यिक योगदान क्यों महत्त्वपूर्ण है?

👉 उन्होंने प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों की खोज कर राजस्थान और जैन साहित्य के संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया।

Q8. अगरचन्द नाहटा का निधन कब हुआ?

👉 12 जनवरी 1983 को बीकानेर में।

Q9. उन्होंने कितने शोध ग्रंथ संपादित किए?

👉 लगभग दो दर्जन शोध ग्रंथ।

Q10. अगरचन्द नाहटा का राजस्थान साहित्य में स्थान क्या है?

👉 वे प्राचीन ग्रंथ शोधक और जैन साहित्य के संरक्षण में अग्रणी माने जाते हैं।

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