Dr. L.P. Tacsitori, Italy के योगदान से जुड़े राजस्थानी चारण साहित्य और ऐतिहासिक ग्रंथों के संग्रह एवं अनुवाद की पूरी जानकारी। Exam-oriented नोट्स।
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ToggleEarly Life and Background (प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि)
डॉ. एल. पी. टैसीटोरी इटली निवासी सुप्रसिद्ध भाषाविद् थे।
इटली से राजस्थान आए और बीकानेर में कार्यरत रहे।
1919 ई. में बीकानेर में ही उनका निधन हुआ।
Contribution to Rajputana Historical Survey (राजपूताना ऐतिहासिक सर्वेक्षण में योगदान)
1. एशियाटिक सोसाइटी ऑफ कलकत्ता ने राजपूताना का ऐतिहासिक सर्वेक्षण टैसीटोरी को सौंपा।
2. सर्वप्रथम जोधपुर आए, जहाँ पं. रामकरण आसोपा ने उनका सहयोग किया।
3. बीकानेर में चारण साहित्य और हस्तलिखित ऐतिहासिक ग्रंथों का विवरणात्मक सूची तैयार की।
Major Works and Publications (प्रमुख ग्रंथ और प्रकाशन)
Rajasthani Bardic Literature and Historical Survey
Grammar of Western Rajasthani
A Descriptive Catalogue of the Bardic and Historical Chronicles
अनुवादित भारतीय ग्रंथ: रामचरितमानस, रामायण, महाभारत।
डिंगल ग्रंथों का संपादन: Beli Crison Rukmini Ri, Rao Jaitsi Ro Chand।
Archaeological Contributions (पुरातात्विक योगदान)
बीकानेर में दर्शनीय म्यूजियम की स्थापना।
सरस्वती और दृषद्वती घाटी, कालीबंगा सभ्यता की खोज।
रंगमहल, बड़ोपल, रतनगढ़ आदि पुरातात्विक स्थलों का अन्वेषण।
Influence on Rajasthani Literature (राजस्थानी साहित्य पर प्रभाव)
डिंगल साहित्य और चारण साहित्य की अमूल्य सेवा।
भारतीय ग्रंथों का इतालवी में अनुवाद।
राजस्थानी ऐतिहासिक ग्रंथों के संरक्षण और प्रचार में योगदान।
सारांश (Summary)
डॉ. एल. पी. टैसीटोरी इटली के सुप्रसिद्ध भाषाविद् और इतिहासकार थे जिन्होंने राजस्थान के चारण साहित्य और ऐतिहासिक ग्रंथों के संरक्षण में अतुलनीय योगदान दिया। एशियाटिक सोसाइटी ऑफ कलकत्ता ने राजपूताना के ऐतिहासिक सर्वेक्षण का कार्य उन्हें सौंपा, जिसके तहत उन्होंने जोधपुर और बीकानेर में विस्तृत अध्ययन किया। पं. रामकरण आसोपा की सहायता से उन्होंने राजस्थानी ग्रंथों का संकलन किया और उनके अनुवाद इतालवी में किए। टैसीटोरी ने दो प्रमुख ग्रंथ लिखे: ‘राजस्थानी चारण साहित्य एवं ऐतिहासिक सर्वे’ और ‘पश्चिमी राजस्थानी का व्याकरण’। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ए डिस्क्रीप्टिव केटलॉग ऑफ द बार्डिक एंड हिस्टोरिकल क्रोनिकल्स’ राजस्थानी ऐतिहासिक साहित्य का अमूल्य स्रोत है। उन्होंने रामचरितमानस, रामायण और महाभारत सहित अनेक भारतीय ग्रंथों का अनुवाद किया। टैसीटोरी ने बीकानेर में म्यूजियम की स्थापना की और कालीबंगा सभ्यता सहित कई पुरातात्विक स्थलों का अन्वेषण किया। उनके योगदान ने न केवल राजस्थानी साहित्य और इतिहास को संरक्षित किया बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति गहन जागरूकता भी उत्पन्न की।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| जन्मस्थान | इटली |
| कार्यक्षेत्र | जोधपुर, बीकानेर |
| प्रमुख ग्रंथ | Rajasthani Bardic Literature, Grammar of Western Rajasthani |
| पुरातात्विक योगदान | कालीबंगा, रंगमहल, बड़ोपल, रतनगढ़ की खोज |
| मृत्यु | वर्ष 1919 ई., बीकानेर |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – केवल हिंदी)
1. डॉ. एल. पी. टैसीटोरी कौन थे? – भाषाविद्
2. टैसीटोरी का मूल देश कौन सा था? – इटली
3. टैसीटोरी ने किस रियासत में कार्य किया? – बीकानेर
4. उन्होंने कौन सा ऐतिहासिक सर्वेक्षण किया? – राजपूताना सर्वेक्षण
5. प्रमुख ग्रंथ कौन से हैं? – चारण साहित्य सर्वे, पश्चिमी राजस्थानी व्याकरण
6. टैसीटोरी ने कौन से भारतीय ग्रंथों का अनुवाद किया? – रामचरितमानस, रामायण, महाभारत
7. डिंगल ग्रंथों का संपादन कौन किया? – बेलि क्रिसन रुक्मिणी री, राव जैतसी रो छन्द
8. पुरातात्विक खोज में उनका योगदान क्या था? – कालीबंगा और अन्य स्थल
9. बीकानेर में उन्होंने क्या स्थापित किया? – म्यूजियम
10. मृत्यु कब हुई? – 1919
