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Kaviraja Shyamal Das, Bhilwara (कविराजा श्यामलदास, भीलवाड़ा)

Kaviraja Shyamal Das, Bhilwara (कविराजा श्यामलदास, भीलवाड़ा)

Kaviraja Shyamal Das, Bhilwara कविराजा श्यामलदास, भीलवाड़ा – वीर विनोद के रचनाकार, इतिहासकार एवं मेवाड़ राज्य के गौरव। जानें उनका जीवन, योगदान और उपलब्धियाँ।

Early Life and Education (प्रारंभिक जीवन व शिक्षा)

जन्म : 5 जुलाई, 1836 ई., छालीवाड़ा धोकलिया, भीलवाड़ा।

बचपन से ही प्रतिभाशाली – नौ वर्ष की आयु में ‘सारस्वत’ व ‘अमरकोष’ का अध्ययन।

आगे चलकर : काव्य, तर्कशास्त्र, गणित, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, तंत्र, चिकित्सा शास्त्र व महाकाव्यों का अध्ययन।

इतिहास विषय में विशेष रुचि।

Court Association (दरबारी जीवन)

1. महाराणा शंभूसिंह के दरबारी बने।

2. 1871 ई. – महाराणा शंभूसिंह ने मेवाड़ का इतिहास लिखने का कार्य सौंपा।

3. महाराणा सज्जनसिंह ने :

इतिहास लेखन हेतु एक लाख रुपये का अनुदान दिया।

श्यामलदास को राजकीय पुस्तकालय का अध्यक्ष बनाया।

4. 1881 ई. भील विद्रोह – ऋषभदेव में जाकर भीलों से समझौता कराया।

Veer Vinod (वीर विनोद – महान ग्रंथ)

ऐतिहासिक सामग्री संकलन : श्यामलदास और उनके सहयोगी, विशेषकर गौरीशंकर हीराचंद ओझा।

1871 ई. में लेखन आरंभ।

पाँच जिल्दों में विभाजित :

1. प्रथम – विश्व व भारत का भूगोल व इतिहास।

2. द्वितीय – राणा रतनसिंह से अमरसिंह प्रथम तक।

3. तृतीय – महाराणा कर्णसिंह से अमरसिंह द्वितीय तक।

4. चतुर्थ – अमरसिंह द्वितीय से जगतसिंह द्वितीय तक।

5. पंचम – महाराणा जवानसिंह से सज्जनसिंह तक।

सामाजिक विवरण : मेवाड़ की जातियां, मेले, त्योहार, रहन-सहन और संस्कृति।

Titles and Honors (उपाधियाँ व सम्मान)

1879 ई. – ‘कविराजा’ की उपाधि।

सदस्य – रॉयल एशियाटिक सोसायटी, बंगाल।

फेलो – हिस्टोरिकल सोसायटी ऑफ लंदन।

ब्रिटिश सरकार से उपाधियाँ :

‘केसर-ए-हिन्द’

‘महामहोपाध्याय’

Death (मृत्यु)

1893 ई. में निधन।

सारांश (Summary)

कविराजा श्यामलदास राजस्थान के इतिहास लेखन के अग्रदूत और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास के संवाहक थे। उनका जन्म 1836 ई. में भीलवाड़ा के छालीवाड़ा गांव में हुआ। बाल्यकाल से ही उनकी रुचि साहित्य और इतिहास में रही। महाराणा शंभूसिंह के दरबारी रहते हुए उन्होंने मेवाड़ का इतिहास लिखने का दायित्व संभाला। महाराणा सज्जनसिंह ने उन्हें अनुदान और संरक्षण दिया। उनके जीवन की सबसे बड़ी देन ‘वीर विनोद’ है, जिसे पाँच जिल्दों में प्रकाशित किया गया। इसमें न केवल मेवाड़ के राजवंश का इतिहास है, बल्कि सामाजिक जीवन, संस्कृति, त्योहारों और मेले का भी विस्तृत विवरण मिलता है। श्यामलदास को ‘कविराजा’, ‘केसर-ए-हिन्द’ और ‘महामहोपाध्याय’ जैसी उपाधियाँ मिलीं। वे रॉयल एशियाटिक सोसायटी और हिस्टोरिकल सोसायटी ऑफ लंदन से भी जुड़े। इतिहास लेखन में उनकी प्रामाणिकता, परिश्रम और दृष्टि उन्हें राजस्थान के इतिहासकारों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करती है। 1893 ई. में उनका निधन हुआ, परंतु उनकी रचना ‘वीर विनोद’ आज भी इतिहास शोधकर्ताओं के लिए अनुपम धरोहर है।

 Facts Table (तथ्य तालिका)

तथ्य

विवरण

जन्म  5 जुलाई, 1836, छालीवाड़ा धोकलिया, भीलवाड़ा
प्रमुख ग्रंथ  वीर विनोद (पाँच जिल्दों में)
उपाधियाँ  कविराजा, केसर-ए-हिन्द, महामहोपाध्याय
योगदान मेवाड़ व राजस्थान के इतिहास का प्रामाणिक लेखन
निधन  1893 ई.

FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. Kaviraja Shyamal Das ka janm kab hua? (कविराजा श्यामलदास का जन्म कब हुआ?)

Ans: कविराजा श्यामलदास का जन्म 5 जुलाई, 1836 ई. को भीलवाड़ा जिले के छालीवाड़ा धोकलिया ग्राम में हुआ।

Q2. Kaviraja Shyamal Das kis raja ke darbar se जुड़े थे? (वे किस राजा के दरबारी थे?)

Ans: वे महाराणा शंभूसिंह के दरबारी थे।

Q3. Veer Vinod kitab kisne likhi? (वीर विनोद किसकी रचना है?)

Ans: वीर विनोद की रचना कविराजा श्यामलदास ने की।

Q4. Veer Vinod kitni jildon mein hai? (वीर विनोद कितनी जिल्दों में उपलब्ध है?)

Ans: वीर विनोद पाँच जिल्दों में उपलब्ध है।

Q5. Kaviraja upadhi unhe kab mili? (कविराजा की उपाधि कब मिली?)

Ans: 1879 ई. में महाराणा सज्जनसिंह ने कविराजा की उपाधि दी।

Q6. Kaviraja Shyamal Das ko British sarkar ne kaunsi upadhi di?

Ans: उन्हें ‘केसर-ए-हिन्द’ और ‘महामहोपाध्याय’ की उपाधि दी गई।

Q7. Kaviraja Shyamal Das ki pramukh yogdan kya tha?

Ans: उनका प्रमुख योगदान मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन और ‘वीर विनोद’ की रचना है।

Q8. Shyamal Das ke sahayak kaun the?

Ans: गौरीशंकर हीराचंद ओझा उनके प्रमुख सहयोगी थे।

Q9. Veer Vinod mein samajik jivan ka bhi varnan hai kya?

Ans: हाँ, इसमें जातियों, त्योहारों, मेलों और रहन-सहन का वर्णन मिलता है।

Q10. Kaviraja Shyamal Das ki mrityu kab hui?

Ans: 1893 ई. में उनका निधन हुआ।

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