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Prithviraj Rathore | पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) : वीर रस और भक्तिकाव्य के प्रतिष्ठित कवि

Prithviraj Rathore | पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) : वीर रस और भक्तिकाव्य के प्रतिष्ठित कवि

Prithviraj Rathore पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) – राजस्थानी काव्य के महाकवि। जानिए उनके जीवन, प्रमुख रचनाएँ और साहित्यिक योगदान।


1️⃣ जन्म और प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)

जन्म: संवत 1606, बीकानेर

निधन: संवत 1656, मथुरा

परिवार: बीकानेर नरेश रायसिंह के अनुज

रचना शैली: वीर रस, शृंगार रस और भक्ति रस का अद्भुत मिश्रण

2️⃣ प्रमुख काव्य रचनाएँ (Major Poetic Works)

बेलि क्रिसन रूकमणी री – सर्वोत्कृष्ट राजस्थानी काव्य, जिसे दुरसा आढ़ा ने ‘पांचवाँ वेद’ कहा

अन्य काव्य: ठाकुर जी रा, दूहा गंगा जीरा दूहा (गंगालहरी), दसम अगवत रा दूहा

शैली और महत्त्व: वीर रस, भक्तिकाव्य और शृंगार रस का सम्मिश्रण

3️⃣ साहित्यिक महत्त्व और विशेषताएँ (Literary Importance & Features)

डॉ. तेस्सितोरी ने इन्हें डिंगल का ‘होरेस’ कहा

कर्नल टॉड ने इनके काव्य में ‘दस सहस्त्र घोड़ों का बल’ मानकर इनके तेजस्वी व्यक्तित्व और ओजपूर्ण कविता की सराहना की

लोकश्रुति के अनुसार, इनके मृत्यु के समय सफेद कौवे का आगमन हुआ था, जो उनके प्रति सम्मान दर्शाता है

राजसी भोग-विलास और माटी के लोकमानस दोनों को एक साथ काव्य में पिरोया

📜 सारांश (Summary)

पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) राजस्थानी काव्य के महान कवि थे, जिनका जीवन 1606 से 1656 तक फैला। बीकानेर नरेश रायसिंह के अनुज और अकबर के दरबार के प्रतिष्ठित कवि थे। उनके काव्य में वीर रस, शृंगार रस और भक्ति रस का समन्वय अद्भुत रूप से दृष्टिगोचर होता है। उनका प्रमुख काव्य बेलि क्रिसन रूकमणी री को दुरसा आढ़ा ने ‘पांचवाँ वेद’ कहा और इसे राजस्थानी साहित्य का सर्वोत्कृष्ट महाकाव्य माना गया। डॉ. तेस्सितोरी ने उन्हें डिंगल का ‘होरेस’ कहा और कर्नल टॉड ने उनके काव्य में दस सहस्त्र घोड़ों के बल का मान देकर उनकी कविता की महत्ता बताई। पृथ्वीराज राठौड़ ने राजसी जीवन और माटी के लोकमानस दोनों को काव्य में उतारा। उनके अन्य काव्य जैसे ठाकुर जी रा, दूहा गंगा जीरा दूहा, दसम अगवत रा दूहा भी वीर रस और भक्तिकाव्य के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। लोकश्रुति में उनके मृत्यु के समय सफेद कौवे का आगमन दर्शाता है कि लोकों ने उन्हें विशेष सम्मान दिया।

📊 तथ्य तालिका (Facts Table)

तथ्य

 विवरण

जन्म   संवत 1606, बीकानेर
निधन संवत 1656, मथुरा
प्रमुख काव्य  बेलि क्रिसन रूकमणी री, ठाकुर जी रा, दूहा गंगा जीरा दूहा
रस  वीर रस, शृंगार रस, भक्ति रस
साहित्यिक मान्यता   डिंगल का ‘होरेस’, दुरसा आढ़ा ने ‘पांचवाँ वेद’ कहा

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. पृथ्वीराज राठौड़ (पीथल) का जन्म कब हुआ?

👉 संवत 1606 में बीकानेर में।

Q2. पृथ्वीराज राठौड़ का प्रमुख काव्य कौन-सा है?

👉 बेलि क्रिसन रूकमणी री।

Q3. पृथ्वीराज राठौड़ के काव्य की प्रमुख विशेषता क्या है?

👉 वीर रस, शृंगार रस और भक्ति रस का सम्मिश्रण।

Q4. उनके अन्य प्रमुख काव्य कौन-से हैं?

👉 ठाकुर जी रा, दूहा गंगा जीरा दूहा, दसम अगवत रा दूहा।

Q5. डॉ. तेस्सितोरी ने पृथ्वीराज राठौड़ को किस रूप में वर्णित किया?

👉 डिंगल का ‘होरेस’।

Q6. कर्नल टॉड ने उनके काव्य की क्या सराहना की?

👉 उन्होंने इसे ‘दस सहस्त्र घोड़ों के बल’ का मानकर तेजस्वी और ओजपूर्ण बताया।

Q7. लोकश्रुति के अनुसार उनके मृत्यु के समय क्या हुआ?

👉 सफेद कौवे का आगमन हुआ, जो सम्मान का प्रतीक है।

Q8. उनके काव्य में राजसी भोग-विलास कैसे दिखे?

👉 उनके काव्य में राजसी जीवन और लोकमानस का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

Q9. ‘बेलि क्रिसन रूकमणी री’ का महत्व क्या है?

👉 इसे दुरसा आढ़ा ने ‘पांचवाँ वेद’ कहा और राजस्थानी का सर्वोत्कृष्ट काव्य माना।

Q10. पृथ्वीराज राठौड़ का साहित्यिक योगदान क्या है?

👉 राजस्थानी काव्य में वीर रस और भक्तिकाव्य का उत्कृष्ट मिश्रण प्रस्तुत करना।

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