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Gaurishankar Hirachand Ojha, Sirohi (गौरीशंकर हीराचंद ओझा, सिरोही)

Gaurishankar Hirachand Ojha, Sirohi (गौरीशंकर हीराचंद ओझा, सिरोही)

Gaurishankar Hirachand Ojha, Sirohi  (गौरीशंकर हीराचंद ओझा, सिरोही) – राजस्थान के महान इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता। जानें उनका जीवन, उपलब्धियाँ और प्रमुख ग्रंथ।

Early Life and Education (प्रारंभिक जीवन व शिक्षा)

जन्म : 1863 ई., रोहिड़ा ग्राम, सिरोही रियासत।

विद्वान, इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता के रूप में प्रसिद्ध।

प्रारंभिक सेवा : उदयपुर राज्य में रेजीडेन्ट के अधीन, बाद में अजमेर में सेवा।

Scholarly Contributions (विद्वत्तापूर्ण योगदान)

1. 1894 ई. – पहली बार हिन्दी में भारतीय प्राचीन लिपि शास्त्र (माला) लिखा।

यह विश्व में पहला संकलन था, जिसने लिपियों के विकास को दर्शाया।

नाम दर्ज – गिनीज वर्ल्ड बुक।

2. 1911 ई. – सिरोही राज्य का इतिहास लिखा।

3. अन्य ग्रंथ :

सोलंकियों का प्राचीन इतिहास

राजपूताना का प्राचीन इतिहास

उदयपुर राज्य का इतिहास

डूंगरपुर राज्य का इतिहास

बांसवाड़ा राज्य का इतिहास

बीकानेर राज्य का इतिहास

जोधपुर राज्य का इतिहास

प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास

4. नैणसी री ख्यात का सम्पादन किया।

5. जेम्स टॉड के Annals की त्रुटियों को सुधारा और हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया।

6. 13 वर्षों तक नागरी प्रचारणी पत्रिका का संपादन किया।

Honors and Recognitions (सम्मान व उपाधियाँ)

1914 ई. – रायबहादुर की उपाधि।

1927 – अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति।

1933 – सम्मेलन द्वारा अभिनंदन एवं भारतीय अनुशीलन की उपाधि।

ब्रिटिश सरकार द्वारा – महामहोपाध्याय की उपाधि।

दो बार दिल्ली दरबार में विशिष्ट अतिथि।

1937 – काशी विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट. (मानद उपाधि)।

1937 – साहित्य वाचस्पति की पदवी।

Death (मृत्यु)

17 अप्रैल, 1947 – जन्मभूमि रोहिड़ा, सिरोही में निधन।

 सारांश (Summary)

गौरीशंकर हीराचंद ओझा राजस्थान के इतिहास लेखन की परंपरा के प्रमुख स्तंभ और भारत के महान पुरातत्ववेत्ताओं में से एक थे। 1863 ई. में सिरोही रियासत के रोहिड़ा ग्राम में जन्मे ओझा ने अपने जीवन को इतिहास और संस्कृति के अध्ययन हेतु समर्पित किया। 1894 ई. में उन्होंने ‘भारतीय प्राचीन लिपि शास्त्र (माला)’ लिखकर विश्व में पहली बार भारतीय लिपियों का व्यवस्थित संकलन प्रस्तुत किया और गिनीज वर्ल्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर और प्रतापगढ़ राज्यों का इतिहास लिखा। साथ ही ‘नैणसी री ख्यात’ का सम्पादन और जेम्स टॉड के ग्रंथ की त्रुटियों का परिशोधन कर इतिहास लेखन को अधिक प्रामाणिक स्वरूप दिया। ओझा को ‘रायबहादुर’, ‘महामहोपाध्याय’, ‘भारतीय अनुशीलन’ और ‘साहित्य वाचस्पति’ जैसी उपाधियों से नवाजा गया। वे अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति और काशी विश्वविद्यालय से डी.लिट. की मानद उपाधि प्राप्त करने वाले विद्वान थे। 17 अप्रैल, 1947 को उनका निधन हुआ। उनका योगदान राजस्थान और भारतीय इतिहास को एक नई दिशा देने वाला रहा।

 Facts Table (तथ्य तालिका)

तथ्य

विवरण

जन्म 1863 ई., रोहिड़ा, सिरोही
प्रमुख ग्रंथ भारतीय प्राचीन लिपि शास्त्र (माला), सिरोही राज्य का इतिहास
संपादन कार्य  नैणसी री ख्यात, टॉड के एनॉल्स का परिशोधन
उपाधियाँ   रायबहादुर, महामहोपाध्याय, साहित्य वाचस्पति
निधन  17 अप्रैल, 1947, रोहिड़ा, सिरोही

FAQs (Frequently Asked Questions)

Q1. Gaurishankar Hirachand Ojha ka janm kab hua? (जन्म कब हुआ?)

Ans: इनका जन्म 1863 ई. में सिरोही रियासत के रोहिड़ा ग्राम में हुआ।

Q2. Ojha ji ki pratham rachna kaun si thi?

Ans: 1894 ई. में लिखी गई ‘भारतीय प्राचीन लिपि शास्त्र (माला)’।

Q3. Gaurishankar Ojha ne Rajasthan kaun-kaun se rajyaon ka itihas likha?

Ans: सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, बीकानेर, जोधपुर और प्रतापगढ़।

Q4. Ojha ji ne kis pustak ka sampadan kiya?

Ans: ‘नैणसी री ख्यात’ का सम्पादन किया।

Q5. J.H. Todd ke Annals mein Ojha ji ka kya yogdan tha?

Ans: उन्होंने उसकी त्रुटियों का परिशोधन कर हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया।

Q6. Ojha ji ko ‘Rai Bahadur’ ki upadhi kab mili?

Ans: उन्हें 1914 ई. में यह उपाधि मिली।

Q7. Ojha ji kis patrika ke sampadak rahe?

Ans: वे 13 वर्ष तक ‘नागरी प्रचारणी पत्रिका’ के संपादक रहे।

Q8. Ojha ji ko D.Litt ki upadhi kis vishwavidyalay ne di?

Ans: 1937 ई. में काशी विश्वविद्यालय ने मानद डी.लिट. की उपाधि दी।

Q9. Ojha ji ka sabse prasiddh yogdan kya hai?

Ans: ‘भारतीय प्राचीन लिपि शास्त्र (माला)’ और राजस्थान के विभिन्न राज्यों का इतिहास लेखन।

Q10. Gaurishankar Hirachand Ojha ka dehant kab hua?

Ans: 17 अप्रैल, 1947 को सिरोही में हुआ।

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