You are currently viewing Vijaydan Detha | विजयदान देथा : राजस्थानी साहित्य के प्रख्यात लेखक
Vijaydan Detha | विजयदान देथा : राजस्थानी साहित्य के प्रख्यात लेखक

Vijaydan Detha | विजयदान देथा : राजस्थानी साहित्य के प्रख्यात लेखक

Vijaydan Detha विजयदान देथा – राजस्थानी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और कथाकार। जानिए उनके जीवन, प्रमुख रचनाएँ और पुरस्कार-सम्मान।

1️⃣ जन्म और प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)

जन्म: 1926 ई., बोरुंदा गाँव, राजस्थान

भाषा: राजस्थानी

साहित्यिक यात्रा: उपन्यास, लघु कथा, लोक कथाओं का संकलन

निधन: 2013 ई.

2️⃣ प्रमुख रचनाएँ (Major Works)

उपन्यास: तीड़ोराव, माँ रो बदलो, अलेखू हिटलर, रूंख, महामिलन

लघु कथाएँ: बापू के तीन हत्यारे, अनोखा पेड़, चौधराइन की चतुराई, सतनप्रिया, प्रिय मृणाल

कथा संग्रह: बातां री फुलवारी – 14 खण्डों में लोक कथाओं का संकलन

लोक साहित्य: राजस्थानी कहावतें, मुहावरें और लोकगीत

3️⃣ पुरस्कार और सम्मान (Awards & Honors)

1974: केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (राजस्थानी) – बातां री फुलवारी के 10वें खण्ड के लिए

साहित्य चुडामणि पुरस्कार

2002: बिहारी पुरस्कार

2007: पद्मश्री

2012: राजस्थान रत्न पुरस्कार (प्रथम)

4️⃣ फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक प्रभाव (Film Adaptations & Cultural Impact)

दुविधा (1973) – मणिकौल

चरणदास चोर (1975) – श्याम बेनेगल

परिणति (1989) – प्रकाश झा

पहेली (2005) – अमोल पालेकर

राजस्थान की लोक कथाओं और संस्कृति को देश-विदेश में प्रसिद्ध किया

📜 सारांश (Summary)

विजयदान देथा राजस्थान के प्रख्यात लेखक और कथाकार थे, जिन्होंने राजस्थानी भाषा में उपन्यास, लघु कथा और लोक कथाओं के माध्यम से साहित्यिक दृष्टि से अमूल्य योगदान दिया। उनका प्रमुख ग्रंथ बातां री फुलवारी लोक कथाओं का संग्रह है, जिसे 14 खण्डों में तैयार किया गया और इसके 10वें खण्ड के लिए उन्हें 1974 में केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। देथा ने लोकगीत, कहावतें और मुहावरों का संकलन कर राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया। उनकी कहानियों पर आधारित फिल्मों में दुविधा, चरणदास चोर, परिणति और पहेली शामिल हैं, जो उनकी साहित्यिक प्रतिभा और लोक संस्कृति की गहरी समझ को दर्शाती हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य चुडामणि पुरस्कार, बिहारी पुरस्कार, पद्मश्री और राजस्थान रत्न जैसे कई सम्मान प्राप्त हुए। विजयदान देथा का योगदान आज भी हिंदी और राजस्थानी साहित्य में महत्वपूर्ण और प्रेरणास्रोत माना जाता है।

📊 तथ्य तालिका (Facts Table)

तथ्य

विवरण

जन्म 1926 ई., बोरुंदा, राजस्थान
प्रमुख रचनाएँ ब्रातां री फुलवारी, तीड़ोराव, माँ रो बदलो, अलेखू हिटलर
पुरस्कार  साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974), पद्मश्री (2007), राजस्थान रत्न (2012)
फिल्में  दुविधा, चरणदास चोर, परिणति, पहेली
साहित्यिक योगदान राजस्थानी लोक कथाओं और संस्कृति का संरक्षण और प्रचार

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. विजयदान देथा का जन्म कब और कहाँ हुआ?

👉 1926 ई. में बोरुंदा गाँव, राजस्थान।

Q2. विजयदान देथा की प्रमुख रचना कौन-सी है?

👉 बातां री फुलवारी।

Q3. उनके किस ग्रंथ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?

👉 बातां री फुलवारी के 10वें खण्ड के लिए।

Q4. विजयदान देथा की किस कहानी पर फिल्म बनी?

👉 दुविधा, चरणदास चोर, परिणति, पहेली।

Q5. विजयदान देथा को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?

👉 साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य चुडामणि पुरस्कार, बिहारी पुरस्कार, पद्मश्री, राजस्थान रत्न पुरस्कार।

Q6. देथा ने किस भाषा में लिखा?

👉 राजस्थानी।

Q7. उनकी रचनाओं का साहित्यिक महत्व क्या है?

👉 राजस्थानी लोक कथाओं और संस्कृति का संरक्षण और प्रचार।

Q8. “बातां री फुलवारी” कितने खण्डों में प्रकाशित हुआ?

👉 14 खण्डों में।

Q9. देथा की लघु कथाओं में कौन-कौन सी प्रमुख हैं?

👉 बापू के तीन हत्यारे, अनोखा पेड़, चौधराइन की चतुराई, सतनप्रिया, प्रिय मृणाल।

Q10. विजयदान देथा का निधन कब हुआ?

👉 2013 ई. में।

More Information 

Our Telegram Channel – GKFAST
राजस्थान के लोकदेवता 
राजस्थान की लोकदेवी 
संत सम्प्रदाय 
राजस्थान के दुर्ग 
राजस्थान के poet-writer
राजस्थान के Festival