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BALA KILA|  बाला किला (गिरि दुर्ग), अलवर – इतिहास, स्थापत्य और अद्वितीयता

BALA KILA|  बाला किला (गिरि दुर्ग), अलवर – इतिहास, स्थापत्य और अद्वितीयता

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Bala kila Alwar Fort राजस्थान का प्रसिद्ध गिरि दुर्ग है, जो कभी शत्रु द्वारा जीता नहीं गया। 928 संवत में हसन खां मेवाती द्वारा निर्मित इस किले में 15 बड़ी बुर्ज, 52 छोटी बुर्ज और 3359 कंगुरे हैं, जो इसकी सामरिक शक्ति को दर्शाते हैं।

1. परिचय

बाला किला (Bala Qila) → अलवर नगर के पास अरावली की पहाड़ियों पर स्थित।

इसे बालागढ़ श्रेणी का दुर्ग कहा जाता है।

प्रसिद्धि → यह दुर्ग कभी भी शत्रु द्वारा जीता नहीं गया।

2. निर्माण और इतिहास

🔹 प्रारंभिक निर्माण

सबसे पहले → आमेर नरेश कालीक के पुत्र अलघ राय ने यहाँ एक छोटी गढ़ी बनवाई।

बाद में निकुंब क्षत्रियों ने इस पर अधिकार कर विस्तार किया।

🔹 हसन खां मेवाती और विस्तार

संवत् 928 (लगभग 15वीं सदी) में हसन खां मेवाती ने दुर्ग का निर्माण करवाया।

इसमें सरोवर का निर्माण → सूरज कुण्ड।

🔹 मुग़ल और शेरशाह का नियंत्रण

दुर्ग पर अलावत खां और बाबर का अधिकार रहा।

 शेरशाह सूरी ने इसे मुगलों से छीन लिया।

सलीम शाह के शासनकाल में दुर्गाध्यक्ष ने सलीम सागर तालाब का निर्माण कराया।

🔹 प्रताप सिंह का अधिकार

1775 ई. → अलवर के महाराजा प्रतापसिंह ने इस पर अधिकार किया।

3. स्थापत्य विशेषताएँ

दुर्ग में कुल 15 बड़ी बुर्ज, 52 छोटी बुर्ज।

3359 कंगुरे, प्रत्येक में दो छिद्र → गोलियाँ चलाने हेतु।

परकोटा (Boundary wall) की ऊँचाई → 40-50 फीट।

प्राकृतिक सुरक्षा हेतु ऊँची पहाड़ियों पर निर्मित।

4. ऐतिहासिक महत्व

दुर्ग कभी शत्रु द्वारा जीता नहीं गया → सामरिक दृष्टि से अजेय।

मुग़ल, शेरशाह और स्थानीय राजाओं के संघर्षों का साक्षी।

जल संसाधनों (सूरज कुण्ड, सलीम सागर तालाब) से परिपूर्ण।

5. प्रमुख तथ्य बिंदु

1. निर्माण संवत् 928 → हसन खां मेवाती।

2. दुर्ग का प्रकार → गिरि दुर्ग।

3. बुर्ज → 15 बड़ी, 52 छोटी।

4. कंगुरे → 3359, प्रत्येक में 2 छिद्र।

5. महत्वपूर्ण जल स्रोत → सूरज कुण्ड, सलीम सागर।

6. सारांश 

बाला किला, अलवर राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध गिरि दुर्गों में से एक है, जिसकी पहचान इसकी अजेयता से होती है। यह दुर्ग कभी भी किसी शत्रु द्वारा जीता नहीं गया, इसलिए इसे “Never Win by Enemy Fort” भी कहा जाता है। सबसे पहले यहाँ एक छोटी गढ़ी का निर्माण आमेर नरेश कालीक के पुत्र अलघ राय ने करवाया था, जिसे बाद में निकुंब क्षत्रियों ने अपने अधिकार में लेकर विस्तार किया। संवत् 928 में हसन खां मेवाती ने इस दुर्ग का भव्य निर्माण करवाया। इसके भीतर स्थित सूरज कुण्ड सरोवर जल का प्रमुख स्रोत था। इस दुर्ग में 15 बड़ी और 52 छोटी बुर्जों के साथ कुल 3359 कंगुरे बने हैं, जिनमें से हर कंगुरे में दो छेद थे, जहाँ से गोलियाँ चलाई जा सकती थीं। इसकी 40-50 फीट ऊँची परकोटा दीवार इसे अभेद्य बनाती थी। आगे चलकर यह दुर्ग मुगलों और शेरशाह सूरी के अधिकार में रहा, लेकिन 1775 ई. में महाराजा प्रतापसिंह ने इस पर कब्ज़ा कर इसे अलवर राज्य की शान बना दिया।

7. तथ्य तालिका

तथ्य

विवरण

दुर्ग का नाम  बाला किला, अलवर
निर्माण वर्ष संवत् 928
निर्माता हसन खां मेवाती
बुर्ज 15 बड़ी, 52 छोटी
विशेषता 3359 कंगुरे, कभी शत्रु द्वारा न जीता गया

8. FAQs

Q1. बाला किला कहाँ स्थित है?

बाला किला राजस्थान के अलवर नगर के पास अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है।

Q2. बाला किला का निर्माण किसने करवाया था?

इस दुर्ग का निर्माण संवत् 928 में हसन खां मेवाती ने करवाया था।

Q3. बाला किला की स्थापत्य विशेषताएँ क्या हैं?

इसमें 15 बड़ी, 52 छोटी बुर्जें और 3359 कंगुरे हैं, प्रत्येक कंगुरे में दो छिद्र हैं।

Q5. बाला किला के अंदर कौन-कौन से सरोवर हैं?

इसमें सूरज कुण्ड और सलीम सागर तालाब स्थित हैं।

Q6. प्रारंभ में इस गढ़ी का निर्माण किसने करवाया था?

आमेर नरेश कालीक के पुत्र अलघ राय ने एक छोटी गढ़ी का निर्माण करवाया था।

Q7. इस किले पर किस-किस का शासन रहा?

निकुंब क्षत्रियों, अलावत खां, बाबर, शेरशाह सूरी, मुगलों और अंततः प्रतापसिंह का शासन रहा।

Q8. प्रतापसिंह ने इस दुर्ग पर कब अधिकार किया?

महाराजा प्रतापसिंह ने 1775 ई. के आस-पास इस दुर्ग पर अधिकार किया।

Q9. इस किले की परकोटा कितनी ऊँची है?

इस दुर्ग की परकोटा दीवार लगभग 40-50 फीट ऊँची है।

Q10. बाला किला किस श्रेणी का दुर्ग है?

यह एक गिरि दुर्ग (Hill Fort) है।

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