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CHURU KA KILA | चूरू का किला (मैदानी दुर्ग) | चाँदी के गोले दागने वाला दुर्ग – चूरू का किला

CHURU KA KILA |  चूरू का किला (मैदानी दुर्ग) | चाँदी के गोले दागने वाला दुर्ग – चूरू का किला

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CHURU KA KILA चाँदी के गोले दागने वाला दुर्ग चूरू का किला है, जिसका निर्माण 1739 ई. में ठाकुर कुशाल सिंह ने करवाया। 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के घेराव के समय यहां चाँदी के गोले तोपों से दागे गए थे। यह घटना राजस्थान ही नहीं, विश्व इतिहास में अद्वितीय है।


1. चूरू किला परिचय

स्थान: राजस्थान का चूरू जिला

निर्माण: 1739 ई. में ठाकुर कुशाल सिंह

प्रकार: मैदानी दुर्ग (Plain Fort)

विशेष पहचान: चाँदी के गोले दागने वाला किला

2. निर्माण और स्थापत्य

चौड़ा परकोटा

ऊँची प्राचीरें (Walls)

मजबूत द्वार (Gates)

मैदानी क्षेत्र में स्थित होने से विशेष सैन्य रणनीति का महत्व

3. 1857 का विद्रोह और चूरू दुर्ग

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ठाकुर शिवसिंह ने अंग्रेजों का विरोध किया

अंग्रेजों ने बीकानेर राज्य की सेना की मदद से किले को घेर लिया

चारों ओर से तोपों से हमला किया गया

चूरू किले से भी तोपों से जवाब दिया गया

4. चाँदी के गोले दागने की ऐतिहासिक घटना (Story Mode)

जब किले के गोले समाप्त होने लगे तो लुहारों और सुनारों ने नए गोले बनाने शुरू किए। लेकिन शीशे की कमी पड़ गई। तब चूरू के साहूकारों, व्यापारियों और आम जनता ने अपनी जमा चाँदी ठाकुर को अर्पित कर दी।

उन चाँदी के टुकड़ों से तोप के गोले बनाए गए।

जब तोपों से चाँदी के गोले दागे गए तो दुश्मन सेना हैरान रह गई। यह दृश्य इतना अनोखा था कि अंग्रेज सैनिकों ने जनता की देशभक्ति और बलिदान को देखकर घेरा उठा लिया।

5. लोककथाएँ और कहावतें

इस घटना के बाद यह लोकगीत प्रसिद्ध हुआ –

धोर ऊपर नींबड़ी, धोरे ऊपर तोप

चांदी गोळा चालतां, गोरां नाख्या टोप।।

वीको फीको पडत्र गयो, बण गोरां हमगीर।

चांदी गोळा चालिया, चूरू री तासीर।।

(अर्थ: रेत के टीले पर तोपें थीं, उनसे चाँदी के गोले दागे गए, अंग्रेजों का घमंड टूट गया और चूरू की वीरता अमर हो गई।)

6. सैन्य और सांस्कृतिक महत्व

चूरू किला 1857 के विद्रोह का गवाह

जनता और शासक के एकजुट बलिदान का प्रतीक

दुनिया का एकमात्र किला जहाँ चाँदी के गोले दागे गए

लोककथाओं और गीतों में आज भी स्मरणीय

 सारांश 

चूरू का किला, जिसे “चाँदी के गोले दागने वाला दुर्ग” कहा जाता है, राजस्थान की वीरता और बलिदान का प्रतीक है। इसका निर्माण 1739 ई. में ठाकुर कुशाल सिंह ने करवाया था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जब अंग्रेजों ने इस किले को घेरकर तोपों से हमला किया, तो ठाकुर शिवसिंह और चूरू की जनता ने अद्वितीय साहस दिखाया। जब तोपों के लोहे के गोले समाप्त हो गए और शीशे की कमी पड़ गई, तो चूरू के साहूकारों और आम नागरिकों ने अपनी चाँदी अर्पित कर दी। सुनारों और लुहारों ने चाँदी को पिघलाकर गोले बनाए और तोपों से दागे। अंग्रेज सेना इन चमकते गोले देखकर हतप्रभ रह गई और अंततः घेरा उठाकर पीछे हट गई। यह घटना भारत के इतिहास में अद्वितीय है, क्योंकि कहीं भी किसी किले से चाँदी के गोले नहीं दागे गए। आज चूरू का किला केवल एक दुर्ग नहीं, बल्कि जनता की त्याग भावना और स्वतंत्रता की ज्वाला का प्रतीक है।

Facts Table

तथ्य  विवरण
स्थान चूरू, राजस्थान
निर्माण 1739 ई. में ठाकुर कुशाल सिंह
प्रकार  मैदानी दुर्ग (Plain Fort)
ऐतिहासिक घटना 1857 में चाँदी के गोले दागे गए
विशेषता विश्व का अद्वितीय किला जहाँ चाँदी के गोले दागे गए

 FAQs

Q1. चूरू किले का निर्माण किसने करवाया था?

Ans. इसका निर्माण 1739 ई. में ठाकुर कुशाल सिंह ने करवाया था।

Q2. चूरू किला किस प्रकार का दुर्ग है?

Ans. यह एक मैदानी दुर्ग (Plain Fort) है।

Q3. 1857 के विद्रोह में चूरू किले का क्या योगदान रहा?

Ans. ठाकुर शिवसिंह ने अंग्रेजों का विरोध किया और जनता के सहयोग से किले की रक्षा की।

Q4. चाँदी के गोले क्यों दागे गए थे?

Ans. जब लोहे और शीशे के गोले समाप्त हो गए, तब जनता ने चाँदी दी और उससे गोले बनाए गए।

Q5. अंग्रेज सेना ने घेरा क्यों छोड़ा?

Ans. चाँदी के गोले देखकर और जनता की भावना का सम्मान करते हुए अंग्रेजों ने घेरा हटा लिया।

Q6. क्या चूरू किला राजस्थान का एकमात्र मैदानी दुर्ग है?

Ans. यह प्रमुख मैदानी दुर्गों में से एक है, जिसकी विशेषता चाँदी के गोले हैं।

Q7. चूरू किले की सबसे बड़ी ऐतिहासिक घटना क्या है?

Ans. 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष और चाँदी के गोले दागना।

Q8. लोककथाओं में इस किले का कैसे वर्णन किया गया है?

Ans. लोकगीतों में इसे “चाँदी के गोले दागने वाला दुर्ग” कहा गया है।

Q9. इस किले का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

Ans. यह किला जनता और शासक की एकजुट त्याग भावना का प्रतीक है।

Q10. क्या चाँदी के गोले दागने की घटना विश्व इतिहास में अद्वितीय है?

Ans. हाँ, यह घटना केवल चूरू किले में हुई और दुनिया में कहीं और नहीं।

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