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Lakshmikumari Chundawat | लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत : राजस्थानी साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका

Lakshmikumari Chundawat | लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत : राजस्थानी साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका

Lakshmikumari Chundawat लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत – राजस्थानी साहित्य की प्रमुख लेखिका। जानिए उनके जीवन, रचनाएँ, राजनीतिक योगदान और पुरस्कार-सम्मान।

1️⃣ जन्म और प्रारंभिक जीवन (Birth & Early Life)

जन्म: 1916 ई., देवगढ़, मेवाड़

विवाह: रावतसर, बीकानेर

भाषा: राजस्थानी

राजनीतिक जीवन: राजस्थान विधानसभा सदस्य, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष

2️⃣ प्रमुख रचनाएँ (Major Works)

उपन्यास और कहानियाँ: माझल रात, भूमल, पाबूजी री बात, डूंगजी जवारजी री बात, सोरठ बीजां री बात, बाघो भरमली हूंकारा, टाबरां री बाते, अमोलक वाता, केरे कचवा बात

अनुवाद कार्य: रूसी कथाओं का राजस्थानी अनुवाद गजबण

साहित्यिक योगदान: राजस्थानी लोककथाओं और सामाजिक विषयों पर लेखन

3️⃣ पुरस्कार और सम्मान (Awards & Honors)

पद्मश्री पुरस्कार

महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन कुंभा पुरस्कार

टैसीटोरी नथा स्वर्ण पुरस्कार

मारवाड़ी साहित्य सम्मेलन पुरस्कार

साहित्य महोपाध्याय, हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग

राजस्थान साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के विशिष्ट पुरस्कार

सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार (गजबण अनुवाद के लिए)

राजस्थान रत्न पुरस्कार-2012 (प्रथम)

4️⃣ साहित्यिक और सामाजिक योगदान (Literary & Social Contribution)

राजस्थानी भाषा में अनेक उपन्यास और कथाएँ रची

लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्य संरक्षित किए

महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक योगदान

शिक्षण, सामाजिक चेतना और संस्कृति के प्रसार में सक्रिय

📜 सारांश (Summary)

लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत राजस्थानी साहित्य की प्रमुख लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उनका जन्म 1916 ई. में मेवाड़ राज्य के देवगढ़ में हुआ और विवाह बीकानेर के रावतसर में हुआ। उन्होंने राजस्थानी भाषा में कई महत्त्वपूर्ण उपन्यास और कथाएँ लिखीं, जिनमें माझल रात, भूमल, पाबूजी री बात, डूंगजी जवारजी री बात, सोरठ बीजां री बात, बाघो भरमली हूंकारा, टाबरां री बाते, अमोलक वाता, केरे कचवा बात आदि शामिल हैं। उन्होंने रूसी कथाओं का राजस्थानी अनुवाद गजबण किया, जिसके लिए उन्हें ‘सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार’ प्राप्त हुआ। लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत राजस्थान विधान सभा की सदस्य और राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष भी रही। उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें पद्मश्री, राजस्थान रत्न, साहित्य महोपाध्याय, मारवाड़ी साहित्य सम्मेलन पुरस्कार और अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनका लेखन राजस्थानी संस्कृति और लोककथाओं के संरक्षण के लिए अमूल्य योगदान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

📊 तथ्य तालिका (Facts Table)

तथ्य

 विवरण

जन्म 1916 ई., देवगढ़, मेवाड़
प्रमुख रचनाएँ  माझल रात, भूमल, पाबूजी री बात, डूंगजी जवारजी री बात, सोरठ बीजां री बात
पुरस्कार  पद्मश्री, राजस्थान रत्न, सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार
राजनीतिक योगदान  राजस्थान विधानसभा सदस्य, राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष
साहित्यिक योगदान   राजस्थानी लोककथाओं और सामाजिक विषयों का संरक्षण

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत का जन्म कब हुआ?

👉 1916 ई. में देवगढ़, मेवाड़ में।

Q2. उनकी प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?

👉 माझल रात, भूमल, पाबूजी री बात, डूंगजी जवारजी री बात, सोरठ बीजां री बात, बाघो भरमली हूंकारा।

Q3. लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

👉 पद्मश्री, राजस्थान रत्न, सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार आदि।

Q4. उनका राजनीतिक योगदान क्या था?

👉 राजस्थान विधानसभा की सदस्य और राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष।

Q5. उन्होंने किस भाषा में साहित्य लिखा?

👉 मुख्य रूप से राजस्थानी में।

Q6. किस अनुवाद के लिए उन्हें सोवियत पुरस्कार मिला?

👉 रूसी कथाओं का राजस्थानी अनुवाद गजबण।

Q7. उनका साहित्यिक महत्व क्या है?

👉 राजस्थानी लोककथाओं और सामाजिक विषयों का संरक्षण।

Q8. उनकी कहानियों में कौन-कौन से प्रमुख विषय हैं?

👉 सामाजिक मूल्य, लोक संस्कृति और महिला सशक्तिकरण।

Q9. उन्हें राजस्थान रत्न पुरस्कार कब मिला?

👉 2012 में (प्रथम)।

Q10. लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत का योगदान आज किस रूप में देखा जाता है?

👉 राजस्थानी साहित्य और संस्कृति के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण में प्रेरणास्रोत के रूप में।

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