Batik Painting – बातिक चित्रकला : मोम और रंगों से सजी पारंपरिक कपड़ा कलाl

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Batik Painting राजस्थान की पारंपरिक कला है, जिसमें मोम और रंगों से सूती या रेशमी कपड़ों पर अनोखे चित्र बनाए जाते हैं।

1. Introduction – परिचय

Batik Painting (बातिक चित्रकला) वस्तुतः एक शिल्प कला है, जो कपड़े पर मोम और रंगों की सहायता से की जाती है।

इस कला में चित्र बनाते समय कपड़े के कुछ हिस्सों को मोम से ढककर रंगों से रंगा जाता है।

बातिक चित्रकला का प्रमुख उद्देश्य है – कपड़े पर सौंदर्यपूर्ण, पारदर्शी और दरारों वाला प्रभाव उत्पन्न करना।

यह कला राजस्थान के साथ-साथ भारत के कई हिस्सों में प्रसिद्ध है।

2. Process of Batik Art – बातिक कला की प्रक्रिया

1. पहले सूती, रेशमी, लिलन या साटन कपड़े पर आउटलाइन बनाई जाती है।

2. मोम (Wax) और बेरजा (Resin) का घोल तैयार किया जाता है।

3. कपड़े के जिस हिस्से को रंगना नहीं होता, उस पर मोम लगाया जाता है।

4. फिर कपड़े को रंग में डुबोया जाता है — मोम लगे भाग पर रंग नहीं चढ़ता।

5. कपड़ा सूखने पर मोम हटाया जाता है और नई परत पर फिर से रंग किया जाता है।

6. यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक पूरा चित्र पूर्ण रूप में न उभर आए।

7. रंग हमेशा हल्के से गहरे क्रम में लगाए जाते हैं।

3. Tools and Materials – उपकरण और सामग्री

कपड़ा: सूती, रेशमी, मलमल, साटन, लिलन

मोम मिश्रण: मोम + बेरजा (Resin)

ब्रश और पेंटिंग उपकरण: मोम लगाने हेतु ब्रश, रंगने के पात्र

रंग: प्राकृतिक या रासायनिक

प्रकाश स्रोत: मोम हटाने के बाद पारदर्शिता देखने हेतु

4. Effects and Features – प्रमुख विशेषताएँ

बातिक कला की सबसे बड़ी पहचान दरारें (Cracks) हैं, जो विशेष आकर्षण पैदा करती हैं।

इन दरारों से प्रकाश गुजरने पर रंग अधिक चमकीले और पारदर्शी दिखते हैं।

यह कला भारतीय परंपरा, देवी-देवता, पशु-पक्षी, एवं प्राकृतिक दृश्यों को दर्शाती है।

प्रत्येक रंग की परत के साथ चित्र में नई गहराई जुड़ती है।

कला का प्रभाव स्थायी और सजावटी दोनों होता है।

5. Themes and Designs – प्रमुख विषय व डिज़ाइन

धार्मिक विषय: देवी-देवताओं के चित्र

प्राकृतिक दृश्य: पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, पर्वतीय दृश्य

सांस्कृतिक दृश्य: लोककथाएँ, ग्रामीण जीवन

आधुनिक रूप: अमूर्त कला, ज्यामितीय पैटर्न

6. Famous Centers and Artists – प्रसिद्ध केंद्र व कलाकार

1. खण्डेला (सीकर, राजस्थान) – बातिक कला का प्रमुख केंद्र।

2. उमेशचन्द्र शर्मा – इस शैली के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध चितेरे।

3. जयपुर और उदयपुर – बातिक वस्त्र निर्माण के लिए प्रसिद्ध।

4. गुजरात और पश्चिम बंगाल – आधुनिक डिज़ाइनों के लिए जाने जाते हैं।

7. Importance and Uses – महत्व और उपयोग

बातिक कला हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग का महत्वपूर्ण भाग है।

इसका प्रयोग साड़ियों, स्कार्फ, कुर्तियों, पर्दों और दीवार सजावट में किया जाता है।

यह कला पारंपरिक और आधुनिक दोनों रूपों में लोकप्रिय है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला रोजगार में इसका विशेष योगदान है।

8. सारांश (Summary)

बातिक चित्रकला एक ऐसी परंपरागत कला है जिसमे मोम और रंगों के अनोखे मिश्रण से कपड़े पर जीवन्त चित्र बनाए जाते हैं। इस तकनीक में कपड़े के विभिन्न हिस्सों पर मोम लगाकर उन्हें रंगों से बार-बार रंगा जाता है, जिससे चित्र में सुंदर दरारें और पारदर्शिता उत्पन्न होती है। सूती, रेशमी, मलमल या साटन जैसे कपड़ों पर यह कला भव्य दिखाई देती है। भारत में विशेष रूप से राजस्थान का सीकर (खण्डेला) क्षेत्र इस कला का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ के उमेशचन्द्र शर्मा जैसे कलाकारों ने इस परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। बातिक कला केवल वस्त्र सज्जा नहीं बल्कि भारतीय परंपरा, धार्मिक भावना और लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति भी है। आज यह कला देश-विदेश में भारतीय शिल्प कौशल का प्रतीक बन चुकी है।

9. Facts Table (तथ्य तालिका)

 तथ्य

विवरण

प्रमुख केंद्र खण्डेला (सीकर), राजस्थान
 प्रमुख कलाकार उमेशचन्द्र शर्मा
 प्रमुख सामग्री  मोम, बेरजा, प्राकृतिक रंग
 विशेष प्रभाव  दरारें (Cracks) और पारदर्शिता
 उपयोग क्षेत्र  वस्त्र, साड़ियाँ, पर्दे, सजावट

10. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

 बातिक कला क्या है?

→ मोम और रंगों से कपड़े पर बनाई जाने वाली चित्रकला।

 बातिक कला में कौन-सा कपड़ा प्रयोग होता है?

→ सूती, रेशमी, मलमल या साटन।

 बातिक कला की विशेषता क्या है?

→ दरारों (क्रेक्स) और पारदर्शी रंगों का प्रभाव।

 मोम क्यों लगाया जाता है?

→ चित्र के कुछ भागों को रंगने से रोकने के लिए।

 बातिक चित्रकला कहाँ प्रसिद्ध है?

→ सीकर के खण्डेला में।

 बातिक कला में किस रंग से शुरुआत की जाती है?

→ हल्के रंगों से।

 प्रमुख कलाकार कौन हैं?

→ उमेशचन्द्र शर्मा।

 मोम मिश्रण कैसे बनता है?

→ मोम और बेरजा मिलाकर।

 बातिक कला में कौन से विषय मिलते हैं?

→ देवी-देवता, पशु-पक्षी, प्राकृतिक दृश्य।

 बातिक कला का आधुनिक उपयोग क्या है?

→ वस्त्रों और गृह सजावट में।

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