Phad Painting of Rajasthan – राजस्थान की पारंपरिक फड़ चित्रकला : लोककला, परंपरा और भक्ति का संगम

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Phad Painting of Rajasthan – भीलवाड़ा और शाहपुरा की अनोखी फड़ चित्रकला लोककला, धर्म, संगीत और भक्ति का जीवंत संगम है।


1. Introduction – परिचय

Phad Painting of Rajasthan (फड़ चित्रकला) राजस्थान की प्राचीन पटचित्र परंपरा है।

यह भीलवाड़ा और शाहपुरा में विशेष रूप से विकसित हुई।

यह एक चलती फिरती कथा-पट (Portable Scroll Painting) होती है।

इसे धार्मिक कथा-वाचन, नृत्य और संगीत के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

फड़ भोपों द्वारा देवी-देवताओं की गाथाओं के लिए उपयोग की जाती है।

 2. Origin and History – उत्पत्ति और इतिहास

1. लगभग 700 वर्ष पूर्व मेवाड़ क्षेत्र के पुर गांव में फड़ परंपरा विकसित हुई।

2. इसे आगे बढ़ाने का कार्य पांचाजी जोशी और शाहपुरा के जोशी परिवार ने किया।

3. शाहपुरा को आज Phad Art का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

4. Phad Painting of Rajasthan फड़ मुख्यतः लोकदेवताओं जैसे पाबूजी, देवनारायणजी, रामदेवजी पर आधारित हैं।

 3. Style and Technique – शैली और तकनीक

फड़ लंबी और संकरी कपड़े की पट्टी पर बनाई जाती है।

रंग प्राकृतिक होते हैं — लाल, नीला, पीला, हरा, काला, सफेद।

प्रमुख आकृति बड़ी और केंद्र में, अन्य आकृतियाँ छोटी होती हैं।

रंग प्रतीकात्मक हैं:

देवी = नीला

देव = लाल

राक्षस = काला

साधु = पीला या सफेद

सभी चित्र गतिशील और जीवंत मुद्रा में होते हैं।

4. Major Phad Painting of Rajasthan and Themes – प्रमुख फड़ एवं विषय

(A) Pabuji Ki Phad – पाबूजी की फड़

राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता पाबूजी राठौड़ पर आधारित।

पाबूजी को “ऊँटों के रक्षक देवता” माना जाता है।

फड़ में उनकी घोड़ी केसर-कालमी काले रंग में चित्रित होती है।

वाचन नायक जाति के भोपा करते हैं।

(B) Devnarayan Ji Ki Phad – देवनारायणजी की फड़

सबसे लंबी और प्राचीन फड़।

देवनारायणजी को कष्ट निवारक देवता के रूप में पूजा जाता है।

फड़ में सर्प का चित्र और घोड़ी लीलागर (हरे रंग की) होती है।

वाचन गुर्जर जाति के भोपे करते हैं।

इस पर 1992 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया।

(C) Ramdev Ji Ki Phad – रामदेवजी की फड़

निर्माण चौथमल जोशी ने किया।

वाचन कामड़ जाति के भोपे करते हैं।

संगीत में रावणहत्त्था वाद्य का प्रयोग होता है।

(D) Ramdala & Krishnadala Phad – रामदला व कृष्णदला की फड़

इसमें राम व कृष्ण के जीवन प्रसंग चित्रित हैं।

वाचन भाट जाति के भोपे करते हैं।

दिन में गाया जाता है, बिना वाद्य यंत्र के।

(E) Bhainsasur & Amitabh Ki Phad – भैंसासुर व अमिताभ की फड़

भैंसासुर की फड़ बावरी जाति की पूजा से जुड़ी है।

“Amitabh Ki Phad” आधुनिक उदाहरण है —

भोपा रामलाल और भोपी पतासी ने अमिताभ बच्चन को लोकदेवता के रूप में चित्रित किया।

 5. Prominent Artists – प्रमुख कलाकार

श्रीलाल जोशी – फड़ कला को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी।

शांतिलाल जोशी – 1993 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त।

दुर्गालाल जोशी – 1967 में राष्ट्रपति पदक प्राप्त।

श्रीमती पार्वती जोशी – देश की प्रथम महिला फड़ चितेरी।

पांचाजी जोशी – पारंपरिक शैली के संस्थापक।

 6. Symbolism and Color Use – प्रतीकवाद और रंग योजना

लाल रंग = शक्ति व वीरता

नीला रंग = भक्ति व शांति

काला रंग = अंधकार, दुष्टता

सफेद रंग = साधुता व पवित्रता

रंगों का प्रयोग चित्र की भावना को दर्शाने हेतु किया जाता है।

 7. Rituals and Traditions – अनुष्ठान और परंपराएं

1. चातुर्मास में फड़ चित्रण नहीं किया जाता (देवता सोते हैं)।

2. देवउठनी ग्यारस से चित्रण आरंभ होता है।

3. जीर्ण फड़ को पुष्कर सरोवर में विसर्जित किया जाता है (फड़ ठंडी करना)।

4. फड़ वाचन मनौती पूर्ण होने पर किया जाता है।

5. वाचन में भोपा-भोपिन दोनों सहभागी होते हैं।

 सारांश (Summary)

Phad Painting of Rajasthan राजस्थान की फड़ चित्रकला केवल एक कला नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है, जो लोककला, भक्ति, संगीत और नाट्य का समन्वय करती है। शाहपुरा और भीलवाड़ा में विकसित यह कला कपड़े पर बनाई जाती है और देवी-देवताओं की कथा-वाचन का माध्यम बनती है। पाबूजी, देवनारायणजी और रामदेवजी जैसी फड़ें ग्रामीण जीवन की श्रद्धा और सामाजिक एकता को दर्शाती हैं। प्राकृतिक रंगों, प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों और गतिशील आकृतियों से युक्त यह कला राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास की अमूल्य धरोहर है। फड़ कलाकार जैसे श्रीलाल जोशी, शांतिलाल जोशी और पार्वती जोशी ने इस लोककला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया। आज भी यह कला परंपरा लोक संस्कृति के हृदय में जीवित है और आधुनिक युग में भी अपनी पहचान बनाए हुए है।

 Facts Table (तथ्य तालिका)

 तथ्य

 विवरण

फड़ का प्रमुख केंद्र   शाहपुरा (भीलवाड़ा), राजस्थान
आरंभ काल   लगभग 700 वर्ष पूर्व
 प्रमुख फड़ पाबूजी, देवनारायणजी, रामदेवजी
 प्रथम महिला चित्रकार श्रीमती पार्वती जोशी
 फड़ विसर्जन स्थल  पुष्कर सरोवर

 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) – Phad Painting of Rajasthan

 फड़ चित्रकला क्या है?

→ राजस्थान की पारंपरिक कपड़े पर बनाई जाने वाली कथा-चित्रकला।

 फड़ कहां की कला है?

→ भीलवाड़ा और शाहपुरा (राजस्थान) की प्रसिद्ध कला है।

 फड़ चित्रकला किस उद्देश्य से बनाई जाती है?

→ देवी-देवताओं की कथा-वाचन और पूजा हेतु।

 पाबूजी की फड़ कौन पढ़ते हैं?

→ नायक या आयड़ी जाति के भोपा-भोपिन।

 देवनारायणजी की फड़ में कौन-सा रंग प्रमुख है?

→ हरा (घोड़ी लीलागर)।

 फड़ विसर्जन कहां किया जाता है?

→ पुष्कर सरोवर में।

 फड़ चित्रण में कौन-से रंग प्रतीकात्मक हैं?

→ लाल, नीला, पीला, काला और सफेद।

 फड़ ठंडी करने का क्या अर्थ है?

→ जीर्ण फड़ को सरोवर में विसर्जित करना।

 प्रथम फड़ चितेरी महिला कौन हैं?

→ श्रीमती पार्वती जोशी।

 फड़ वाचन कब आरंभ होता है?

→ देवउठनी ग्यारस से।

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