अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर का प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है, जो हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण है और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
Page Contents
Toggle1. Introduction | परिचय
अढ़ाई दिन का झोपड़ा अजमेर में तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में स्थित है।
यह हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य कला का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
यह स्थल आज भी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
2. Historical Background | ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1. प्रारंभिक निर्माण चौहान शासक बीसलदेव ने 1153 ई. में करवाया।
2. यह मूलतः एक संस्कृत महाविद्यालय था।
3. 1192 ई. में मोहम्मद गौरी ने अजमेर पर विजय प्राप्त कर इसे मस्जिद में परिवर्तित किया।
3. Architectural Features | स्थापत्य विशेषताएँ
हिंदू और मुस्लिम कला का संगम।
सात मेहराबों (arches) का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा।
कलात्मक नक्काशी और भव्य स्तंभ इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं।
4. Transformation into Mosque | मस्जिद में परिवर्तन
1. मूल संस्कृत महाविद्यालय को मोहम्मद गौरी ने मस्जिद में बदल दिया।
2. बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे विस्तारित कर मस्जिद का रूप दिया।
3. स्थापत्य में दोनों संस्कृतियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
5. Religious Significance | धार्मिक महत्व
यहाँ अढ़ाई दिन का उर्स एक सूफी फकीर पंजाब शाह के नाम पर लगता है।
धार्मिक आस्था और इतिहास का संगम स्थल।
अजमेर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण।
सारांश (Summary)
अढ़ाई दिन का झोपड़ा, अजमेर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से एक प्रमुख स्थल है। इसका निर्माण प्रारंभ में चौहान शासक बीसलदेव द्वारा 1153 ई. में एक संस्कृत महाविद्यालय के रूप में करवाया गया था। किंतु 1192 ई. में मोहम्मद गौरी ने अजमेर पर विजय प्राप्त करने के बाद इसे मस्जिद में बदल दिया। इसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसमें सात मेहराबें बनवाकर इसे मस्जिद का स्वरूप प्रदान किया। इस स्मारक की विशेषता यह है कि इसमें हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य कला का सुंदर मेल देखने को मिलता है। यहाँ अढ़ाई दिन का उर्स एक सूफी संत पंजाब शाह के नाम पर आयोजित किया जाता है, जिससे यह स्थल धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। आज यह स्थान पर्यटकों और इतिहासकारों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अढ़ाई दिन का झोपड़ा भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा प्रतीक है, जो हमें इतिहास और स्थापत्य कला के संगम का अद्भुत अनुभव कराता है।
Facts Table (तथ्य तालिका)
तथ्य |
विवरण |
| स्थान | अजमेर, राजस्थान |
| निर्माणकर्ता | चौहान शासक बीसलदेव |
| निर्माण | वर्ष 1153 ई. |
| परिवर्तित करने वाला | मोहम्मद गौरी व कुतुबुद्दीन ऐबक |
| विशेषता | हिंदू-मुस्लिम स्थापत्य का संगम, सात मेहराबें |
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. Where is Adhai Din Ka Jhonpra located? | अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहाँ स्थित है?
यह अजमेर, राजस्थान में तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में स्थित है।
2. Who built Adhai Din Ka Jhonpra initially? | अढ़ाई दिन का झोपड़ा सबसे पहले किसने बनवाया था?
इसे चौहान शासक बीसलदेव ने 1153 ई. में बनवाया था।
3. What was the original purpose of this structure? | इस भवन का प्रारंभिक उद्देश्य क्या था?
यह मूल रूप से एक संस्कृत महाविद्यालय था।
4. Who converted it into a mosque? | इसे मस्जिद में किसने बदला?
मोहम्मद गौरी ने 1192 ई. में इसे मस्जिद में परिवर्तित किया।
5. Which ruler expanded it further? | इसे आगे किस शासक ने विस्तारित किया?
कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे मस्जिद का रूप दिया और सात मेहराब बनवाए।
6. Why is it called Adhai Din Ka Jhonpra? | इसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा क्यों कहा जाता है?
यहाँ अढ़ाई दिन का उर्स सूफी फकीर पंजाब शाह के नाम पर लगता है, इसलिए इसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहते हैं।
7. What is the architectural significance of this site? | इस स्थल की स्थापत्य विशेषता क्या है?
इसमें हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य का अद्भुत संगम है।
8. How many arches are built here? | यहाँ कितनी मेहराबें बनी हैं?
यहाँ सात मेहराबें हैं।
9. Which festival is associated with this site? | इस स्थल से कौन सा पर्व जुड़ा है?
यहाँ अढ़ाई दिन का उर्स मनाया जाता है।
10. Why is Adhai Din Ka Jhonpra famous? | अढ़ाई दिन का झोपड़ा क्यों प्रसिद्ध है?
यह स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है।
