Margashirsha Month Festivals मार्गशीर्ष माह हिंदू पंचांग का अत्यंत पुण्य महीना है। इस मास में गीता जयंती, दत्तात्रेय जयंती और मार्गशीर्ष पूर्णिमा जैसे प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं। यह साधना, दान और भक्ति का सर्वोत्तम समय माना जाता है।
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Toggleमार्गशीर्ष माह का महत्व (Significance of Margashirsha Month)
मार्गशीर्ष माह, जिसे अगहन मास भी कहते हैं, हिंदू पंचांग में गहन धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा है – “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” अर्थात महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इस मास में व्रत, दान, स्नान और साधना विशेष फलदायी होते हैं।
गीता जयंती (Gita Jayanti)
तिथि: मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
महत्व: इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
अनुष्ठान: गीता पाठ, हवन, दान, और तीर्थ स्नान।
प्रमुख स्थल: कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
दत्तात्रेय जयंती (Dattatreya Jayanti)
तिथि: मार्गशीर्ष पूर्णिमा
महत्व: त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के संयुक्त अवतार दत्तात्रेय जी का जन्मदिवस।
अनुष्ठान: उपवास, पूजा, दत्तात्रेय स्तोत्र पाठ।
प्रमुख स्थल: महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा (Margashirsha Purnima)
महत्व: इस दिन स्नान, दान और जप का विशेष फल मिलता है।
मान्यता: मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन किए गए पुण्य कर्म हजार गुना फलदायी माने जाते हैं।
दत्तात्रेय जयंती भी इसी दिन आती है।
अन्य धार्मिक उत्सव (Other Religious Observances)
साधना और उपवास: इस मास में भगवान विष्णु, शिव और सूर्य की उपासना फलदायी है।
दान-पुण्य: अन्न, वस्त्र, सोना, गौ और तुलसी का दान श्रेष्ठ माना गया है।
तीर्थ स्नान: गंगा, यमुना, नर्मदा और पुष्कर में स्नान का विशेष महत्व।
सारांश (Summary)
मार्गशीर्ष माह, जिसे अगहन मास भी कहते हैं, हिंदू धर्म में सबसे पुण्य महीनों में गिना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस महीने में किए गए व्रत, दान और साधना का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मार्गशीर्ष को अपना स्वरूप बताया है, जिससे इस माह का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस मास में भक्त विशेषकर गीता जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती मनाते हैं।
गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को आती है। यही वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिन गीता पाठ, गीता यज्ञ और दान का विशेष महत्व होता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा भी इस माह का अत्यंत पवित्र दिन है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन स्नान, व्रत और दान हजार गुना फल देता है। इसी दिन दत्तात्रेय जयंती भी मनाई जाती है। दत्तात्रेय जी को त्रिमूर्ति का संयुक्त अवतार माना जाता है। भक्त उपवास करते हैं और दत्तात्रेय भगवान की पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इसके अलावा इस महीने में दान-पुण्य, गौ सेवा, तुलसी पूजा और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। गंगा और पुष्कर जैसे पवित्र स्थलों पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
संक्षेप में, मार्गशीर्ष माह साधना, अध्यात्म और पुण्य कमाने का अवसर है। यह महीना हर भक्त को जीवन की सच्चाई और भगवान की कृपा से जोड़ने का माध्यम है।
Facts Table (मार्गशीर्ष माह के प्रमुख तथ्य)
तथ्य(Fact) |
विवरण (Details) |
| दूसरा नाम | अगहन मास |
| प्रमुख पर्व | गीता जयंती, दत्तात्रेय जयंती |
| विशेष तिथि | शुक्ल एकादशी, पूर्णिमा |
| शास्त्रीय महत्व | गीता उपदेश का दिन |
| धार्मिक अनुष्ठान | स्नान, व्रत, दान, गीता पाठ |
FAQs – 10 Facts-based Questions
1. मार्गशीर्ष माह को और किस नाम से जाना जाता है?
अगहन मास।
2. गीता जयंती कब मनाई जाती है?
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को।
3. दत्तात्रेय जयंती किस दिन होती है?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा को।
4. दत्तात्रेय किसके अवतार माने जाते हैं?
ब्रह्मा, विष्णु और महेश के।
5. गीता जयंती कहाँ विशेष रूप से मनाई जाती है?
कुरुक्षेत्र (हरियाणा)।
6. मार्गशीर्ष माह का मुख्य देवता कौन है?
भगवान विष्णु।
7. मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व क्या है?
स्नान, व्रत और दान हजार गुना फल देता है।
8. इस माह में कौन से दान श्रेष्ठ माने जाते हैं?
अन्न, गौ, वस्त्र और तुलसी।
9. भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में किस मास को अपना स्वरूप कहा?
मार्गशीर्ष।
10. मार्गशीर्ष किस ऋतु में आता है?
शरद ऋतु के अंत और शीत ऋतु की शुरुआत में।
