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FESTIVAL OF VAISAKH | वैशाख माह के त्यौहार

FESTIVAL OF VAISAKH | वैशाख माह के त्यौहार

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FESTIVAL OF VAISAKH वैशाख मास हिंदू संस्कृति का पवित्र महीना है। इस माह में अक्षय तृतीया और बुद्ध पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं, जो विवाह, समृद्धि और आध्यात्मिकता का प्रतीक हैं।

1. परिचय

वैशाख मास, हिंदू पंचांग का दूसरा महीना है, जिसे शुभ और पवित्र माना जाता है। इस माह के पर्व धार्मिक महत्व, सामाजिक एकता और समृद्धि का संदेश देते हैं।

2. अक्षय तृतीया / आखा तीज (वैशाख शुक्ला तृतीया)

यह हिंदू पंचांग की सबसे शुभ तिथियों में से एक है।

राजस्थान में इसे आखा तीज कहा जाता है।

इसे अबूझ सावा माना जाता है, यानी इस दिन विवाह व अन्य शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं।

किसान इसे नई फसल और समृद्धि का पर्व मानते हैं।

इस दिन बीकानेर का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है।

परंपरागत रूप से इस दिन हजारों विवाह सम्पन्न होते थे, जिनमें बाल विवाह भी शामिल थे।

3. पीपल पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा)

वैशाख पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है।

भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का दिन।

इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसे जीवनदायी और पवित्र माना जाता है।

यह दिन भी अबूझ सावा माना जाता है।

4. सारांश

वैशाख मास हिंदू परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शुभ तिथियों और धार्मिक पर्वों से भरपूर है। इस माह का सबसे प्रमुख पर्व अक्षय तृतीया (आखा तीज) है, जो वैशाख शुक्ला तृतीया को मनाई जाती है। इसे दोष रहित दिन माना गया है, जिस पर विवाह, नए कार्यों की शुरुआत और धार्मिक अनुष्ठान सर्वोत्तम माने जाते हैं। राजस्थान में यह पर्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन बीकानेर की स्थापना हुई थी। किसान इसे नई फसल और अन्न से भरे घर का प्रतीक मानते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो इस दिन हजारों विवाह होते थे, जिनमें बाल विवाह की परंपरा भी थी।

इसी प्रकार, वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) भी प्रमुख पर्व है। इसे भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन लोग पीपल वृक्ष की पूजा करते हैं। यह वृक्ष धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से जीवनदायी माना गया है। यही कारण है कि इसे भी अबूझ सावा की श्रेणी में रखा गया है।

वैशाख माह के पर्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। ये पर्व समाज को एकजुट करते हैं, समृद्धि और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को परंपराओं से जोड़ते हैं।

5. तथ्य तालिका (Facts Table)

पर्व /उत्सव 

 तिथि (पंचांग)

महत्व क्षेत्र विशेष मान्यता

अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ला तृतीया विवाह व समृद्धि का पर्व राजस्थान अबूझ सावा
बीकानेर स्थापना दिवस  अक्षय तृतीया के दिन  बीकानेर नगर की स्थापना बीकानेर ऐतिहासिक महत्व
पीपल पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा  पीपल वृक्ष की पूजा भारत जीवनदायी वृक्ष पूजा
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा  भगवान बुद्ध का जन्म और ज्ञान प्राप्ति भारत व विश्व आध्यात्मिक महत्व
किसान उत्सव   अक्षय तृतीया के आसपास  नई फसल का उत्सव राजस्थान अन्न व समृद्धि का प्रतीक

6. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. अक्षय तृतीया कब मनाई जाती है? → वैशाख शुक्ला तृतीया को।

2. आखा तीज का राजस्थान में क्या महत्व है? → यह अबूझ सावा माना जाता है और बीकानेर स्थापना दिवस भी इसी दिन होता है।

3. अबूझ सावा का क्या अर्थ है? → दोष रहित दिन, जिस पर सभी कार्य शुभ माने जाते हैं।

4. वैशाख पूर्णिमा को कौन सा वृक्ष पूज्य है? → पीपल वृक्ष।

5. बुद्ध पूर्णिमा का अन्य नाम क्या है? → वैशाख पूर्णिमा।

6. किसानों के लिए अक्षय तृतीया का क्या महत्व है? → नई फसल और समृद्धि का प्रतीक।

7. चार प्रमुख दोष रहित तिथियाँ कौन सी मानी जाती हैं? → रामनवमी, अक्षय तृतीया, दशहरा और फाल्गुन फलरिया दूज।

8. अक्षय का क्या अर्थ है? → जो कभी नष्ट न हो, जो चिरस्थायी हो।

9. बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है? → भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण इसी दिन हुआ।

10. परंपरागत रूप से आखा तीज पर किस प्रकार के विवाह अधिक होते थे? → बाल विवाह।

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