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ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती दरगाह अजमेर (Khwaja Moinuddin Chishti Dargah Ajmer)

ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती दरगाह अजमेर (Khwaja Moinuddin Chishti Dargah Ajmer)

Khwaja Moinuddin Chishti Dargah Ajmer ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती दरगाह अजमेर भारत का प्रसिद्ध सूफी तीर्थ स्थल है, जहाँ सभी धर्मों के लोग श्रद्धा से आते हैं। इतिहास, स्थापत्य और महत्व जानिए।

1. परिचय

अजमेर की तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह स्थित है।

यह भारत ही नहीं बल्कि विदेशियों का भी आस्था केंद्र है।

ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (1142–1233 ई.) को “ग़रीब नवाज़” कहा जाता है।

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1. पक्की मजार 1464 ई. में बनी।

2. उस समय अजमेर मालवा के सुल्तान मोहम्मद खिलजी के अधिकार में था।

3. मुगल बादशाह अकबर और जहाँगीर ने दरगाह को भव्यता दी।

3. स्थापत्य विशेषताएँ

75 फीट ऊँचा बुलन्द दरवाजा।

अकबरी मस्जिद – अकबर द्वारा निर्मित।

दरगाह की बड़ी और छोटी देग – अकबर (1567 ई.) और जहाँगीर (1613 ई.) द्वारा भेंट।

4. प्रमुख निर्माण

1. निज़ाम द्वार – निज़ाम मीर उस्मान अली द्वारा बनवाया गया।

2. महफ़िल खाना – 1888 ई. में बशीरूद्दौला द्वारा निर्मित।

3. मुख्य मजार – 1537 ई. में सुल्तान ग़ियासुद्दीन खिलजी द्वारा।

4. बेगमी दालान – जहाँआरा बेगम (शाहजहाँ की पुत्री) द्वारा।

5. शाहजहानी मस्जिद – शाहजहाँ द्वारा निर्मित।

6. चाँदी का कटहरा – सवाई जयसिंह (1700–43 ई.) द्वारा।

5. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

सूफी परंपरा का प्रमुख केंद्र।

उर्स मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं।

सभी धर्मों के लोग यहाँ श्रद्धा से आते हैं।

सांप्रदायिक सौहार्द्र का प्रतीक।

6. प्रमुख कब्रें

बीबी हाफ़िज़ जमाल (ख्वाजा साहब की पुत्री)।

चिमनी बेगम (शाहजहाँ की पुत्री)।

ख्वाजा साहब के दो पोते।

माण्डू के दो सुल्तान।

भिश्ती निज़ामुद्दीन सक्का – “एक दिन का सुल्तान”।

7. सारांश 

अजमेर की ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती दरगाह भारत का सबसे प्रमुख सूफी तीर्थ स्थल है, जो न केवल मुस्लिम श्रद्धालुओं बल्कि सभी धर्मावलम्बियों के लिए आस्था का केंद्र है। ख्वाजा साहब को “गरीब नवाज़” के नाम से जाना जाता है, और उनकी शिक्षाएँ मानवता, दया और समानता पर आधारित थीं। 1464 ई. में बनी मजार को बाद में मुगल शासकों ने विस्तार दिया। अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ ने यहाँ मस्जिदें, दालान और देगें भेंट कीं। 75 फीट ऊँचा बुलन्द दरवाजा, अकबरी मस्जिद, शाहजहानी मस्जिद और बेगमी दालान इस स्थल को स्थापत्य दृष्टि से अद्भुत बनाते हैं। उर्स पर्व पर यहाँ कव्वालियाँ गाई जाती हैं और लाखों लोग शामिल होते हैं। इस दरगाह में कई ऐतिहासिक व्यक्तियों की कब्रें भी हैं, जैसे शाहजहाँ की पुत्री चिमनी बेगम और भिश्ती निज़ामुद्दीन सक्का। यह दरगाह भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है।

8. तथ्य तालिका (Facts Table)

तथ्य

 विवरण

निर्माण   वर्ष 1464 ई. में मजार का निर्माण
मुख्य द्वार  निज़ाम द्वार (हैदराबाद के निज़ाम द्वारा)
ऊँचाई   बुलन्द दरवाजा – 75 फीट
प्रमुख निर्माण अकबरी मस्जिद, शाहजहानी मस्जिद, बेगमी दालान
प्रमुख व्यक्ति  ख्वाजा साहब, शाहजहाँ की पुत्री, निज़ामुद्दीन सक्का

9. FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. Khwaja Moinuddin Chishti Dargah कहाँ स्थित है?

Ans: यह दरगाह राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित है।

Q2. ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को किस नाम से जाना जाता है?

Ans: उन्हें “गरीब नवाज़” कहा जाता है।

Q3. दरगाह का बुलन्द दरवाजा कितनी ऊँचाई का है?

Ans: यह 75 फीट ऊँचा है।

Q4. बड़ी देग किसने भेंट की थी?

Ans: बड़ी देग बादशाह अकबर ने 1567 ई. में भेंट की।

Q5. छोटी देग किसने भेंट की थी?

Ans: छोटी देग बादशाह जहाँगीर ने 1613 ई. में दी।

Q6. शाहजहानी मस्जिद किसने बनवाई?

Ans: इसे मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया।

Q7. बेगमी दालान का निर्माण किसने कराया?

Ans: शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा बेगम ने।

Q8. महफिल खाना किस वर्ष बना?

Ans: 1888 ई. में।

Q9. दरगाह में सबसे पहले पक्की मजार कब बनी?

Ans: 1464 ई. में।

Q10. भिश्ती निज़ामुद्दीन सक्का किस नाम से प्रसिद्ध हैं?

Ans: “एक दिन का सुल्तान”।

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